{"_id":"5fc53af68ebc3e9bc03f67a2","slug":"civic-unnao-news-knp597269394","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाप्राण निराला की प्रतिमा उपेक्षा की शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महाप्राण निराला की प्रतिमा उपेक्षा की शिकार
विज्ञापन
उपेक्षा का शिकार बड़ा चौराहा स्थित निराला प्रतिमा स्थल।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। करीब दो दशक पहले शहर के बड़े चौराहे पर स्थापित महाप्राण निराला की प्रतिमा उपेक्षा की शिकार है। प्रतिमा के आसपास अतिक्रमण है। होर्डिंग और प्रचार सामग्री ने प्रतिमा को भी लगभग छिपा दिया है। इससे साहित्यसेवियों में नाराजगी है।
जिले की बीघापुर तहसील के गढ़ाकोला गांव के निवासी निराला का जन्म भले ही पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में हुआ लेकिन जीवन भर वह उन्नाव से जुड़े रहे। वह शहर के जगन्नाथगंज मोहल्ले में आकर ठहरते भी थे। महाप्राण निराला के चाहने वालों ने उनकी स्मृतियों को संजोने के लिए जहां निराला उद्यान और प्रेक्षागृह का नामकरण कराया। संबंधित दोनों स्थानों के बाद बड़े चौराहे पर उनकी आदमकद प्रतिमा की स्थापना भी कराई गई। जयंती और पुण्यतिथि पर साहित्यकार को याद तो किया जाता है, लेकिन स्थापित कराई गई यह प्रतिमा अब उपेक्षा की शिकार है।
प्रतिमा के लिए बनवाए गए प्लेटफार्म की आड़ में बनवाई गई दुकान लेने वालों ने कब्जा जमा रखा है। कलम और तलवार की धनी सरजमीं पर वैसे तो साहित्य गढ़ने वालों के साथ साहित्यसेवियों की कमी नहीं है, लेकिन निराला प्रतिमा की अव्यवस्था पर अनदेखी है। कई साल पहले महाप्राण निराला महाविद्यालय के तत्कालीन प्रबंधक स्व. कमलाशंकर अवस्थी ने धरना देने की चेतावनी दी थी तब, जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटवाया था। नगर पालिका ईओ आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि देखवाया जाएगा अगर अतिक्रमण हुआ है तो उसे हटवाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले की बीघापुर तहसील के गढ़ाकोला गांव के निवासी निराला का जन्म भले ही पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में हुआ लेकिन जीवन भर वह उन्नाव से जुड़े रहे। वह शहर के जगन्नाथगंज मोहल्ले में आकर ठहरते भी थे। महाप्राण निराला के चाहने वालों ने उनकी स्मृतियों को संजोने के लिए जहां निराला उद्यान और प्रेक्षागृह का नामकरण कराया। संबंधित दोनों स्थानों के बाद बड़े चौराहे पर उनकी आदमकद प्रतिमा की स्थापना भी कराई गई। जयंती और पुण्यतिथि पर साहित्यकार को याद तो किया जाता है, लेकिन स्थापित कराई गई यह प्रतिमा अब उपेक्षा की शिकार है।
विज्ञापन
प्रतिमा के लिए बनवाए गए प्लेटफार्म की आड़ में बनवाई गई दुकान लेने वालों ने कब्जा जमा रखा है। कलम और तलवार की धनी सरजमीं पर वैसे तो साहित्य गढ़ने वालों के साथ साहित्यसेवियों की कमी नहीं है, लेकिन निराला प्रतिमा की अव्यवस्था पर अनदेखी है। कई साल पहले महाप्राण निराला महाविद्यालय के तत्कालीन प्रबंधक स्व. कमलाशंकर अवस्थी ने धरना देने की चेतावनी दी थी तब, जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटवाया था। नगर पालिका ईओ आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि देखवाया जाएगा अगर अतिक्रमण हुआ है तो उसे हटवाया जाएगा।
विज्ञापन