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डामर के गड्ढे में डूबकर बच्चे की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 09 Apr 2015 11:49 PM IST
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बांगरमऊ। पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस परिसर में खेल रहा बच्चे की डामर भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई। सूचना पर आसपास के लोग और पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी बच्चे को निकाला नहीं जा सका। इसके बाद जेसीबी की मदद से बच्चे को बाहर निकाला गया मगर तबतक उसकी मौत हो चुकी थी।
बांगरमऊ कसबा में ब्लाक रोड पर स्थित पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस परिसर में ही कर्मचारी आवास है। यहां चौकीदार रहे गयारी की कई साल पहले मौत हो चुकी है। उसकी पत्नी मृतक आश्रित के रूप में चौकीदार के पद पर तैनात है और यहीं कर्मचारी आवास में रह रही है।
उसकी एक बेटी जीतू कुछ समय से उसके साथ ही रह रही है। गुरुवार दोपहर जीतू का आठ साल का बेटा गोलू गेस्ट हाउस परिसर में ही खेल रहा था इसी दौरान वह डामर के टैंक में गिर गया। चीखने पर लोगों की नजर पड़ी तो आसपास के अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और रस्सी और डंडे से गोलू को निकालने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली।
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सूचना पर बांगरमऊ कोतवाली प्रभारी रणजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे। कोई प्रयास सफल न होते देख आनन-फानन जेसीबी को लाया गया और उसकी मदद से बच्चे को टैंक से बाहर निकाला गया मगर तबतक उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे के परिजन उसका पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुए।
कोतवाली प्रभारी ने बताया कि परिजन कोई लिखित सूचना न देते हुए किसी प्रकार की कार्रवाई न किए जाने की बात कह रहे हैं। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हरिशंकर यादव से बात करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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बांगरमऊ कसबा में ब्लाक रोड पर स्थित पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस परिसर में ही कर्मचारी आवास है। यहां चौकीदार रहे गयारी की कई साल पहले मौत हो चुकी है। उसकी पत्नी मृतक आश्रित के रूप में चौकीदार के पद पर तैनात है और यहीं कर्मचारी आवास में रह रही है।
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उसकी एक बेटी जीतू कुछ समय से उसके साथ ही रह रही है। गुरुवार दोपहर जीतू का आठ साल का बेटा गोलू गेस्ट हाउस परिसर में ही खेल रहा था इसी दौरान वह डामर के टैंक में गिर गया। चीखने पर लोगों की नजर पड़ी तो आसपास के अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और रस्सी और डंडे से गोलू को निकालने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली।
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सूचना पर बांगरमऊ कोतवाली प्रभारी रणजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे। कोई प्रयास सफल न होते देख आनन-फानन जेसीबी को लाया गया और उसकी मदद से बच्चे को टैंक से बाहर निकाला गया मगर तबतक उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे के परिजन उसका पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुए।
कोतवाली प्रभारी ने बताया कि परिजन कोई लिखित सूचना न देते हुए किसी प्रकार की कार्रवाई न किए जाने की बात कह रहे हैं। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता हरिशंकर यादव से बात करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।