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Unnao News: दस लाख से ज्यादा लागत तो देना होगा सेस
Sun, 14 Jan 2024 02:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sun, 14 Jan 2024 02:41 PM IST
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उन्नाव। यदि आपने फरवरी 2009 के बाद भवन बनवाया है और उसकी लागत 10 लाख से ज्यादा आई है तो आपको एक फीसदी सेस (उपकर) जमा करने के लिए श्रम विभाग की नोटिस मिल सकती है।
विभाग का दावा है कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक सेस के रूप में सात करोड़ जमा हो चुके हैं। वर्तमान समय में शहर में निर्माण कराने के लिए उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत से नक्शा पास कराना होता है। इसके लिए फीस जमा करनी होती है। अब इसमें श्रम विभाग भी शामिल हो गया है।
भवन निर्माण कराने पर एक फीसदी सेस विभाग को देना होगा। सहायक श्रम आयुक्त के मुताबिक, केंद्र सरकार के 1996 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत एक फीसदी सेस लेने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में साल 2009 से इसे लागू किया गया था। इसके तहत, फरवरी 2009 के बाद भवन निर्माण दस लाख रुपये से ज्यादा होने पर एक फीसदी कुल लागत का एक फीसदी सेस देना होगा। चाहे वह निर्माण निजी हो या सरकारी।
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इंसेट
जीआईएस मैपिंग से कराया जा रहा सर्वे
सहायक श्रमायुक्त के अनुसार श्रम विभाग के पास कर्मचारियों की कमी के कारण सभी भवनों का सर्वे करना संभव नहीं है। ऐसे में विभाग जियोग्राफिक इन्फर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से मैपिंग कर भवनों की स्थित का पता लगाकर नोटिस जारी कर रहा है।
इंसेट
ऐसे तय होती है लागत
मकान की लागत कवर्ड एरिया के आधार पर तय की जाती है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, एलडीए और राजकीय निर्माण निगम जैसी सरकारी एजेंसियां हर साल प्रति स्क्वायर फुट के हिसाब से लागत तय करती हैं। इन एजेंसियों के न्यूनतम रेट के आधार पर भी मकान की लागत तय की जाती है।
इंसेट
देरी पर दो फीसदी ब्याज
सहायक श्रमायुक्त के मुताबिक, भवन मालिकों को जारी नोटिस में सेस चुकाने की समय सीमा भी तय की गई है। इस अवधि तक सेस का भुगतान न करने पर भवन मालिक को सेस की रकम का दो फीसदी ब्याज हर महीने देना पड़ सकता है। यदि निर्माण फरवरी 2009 से पहले हुआ है और नोटिस आ गया है तो गृह व जलकर के साथ बिजली का बिल आदि प्रस्तुत किया जा सकता है।
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कोट
इस वित्तीय वर्ष में नौ करोड़ का लक्ष्य है। अभी तक 25 सौ से अधिक लोगों से सात करोड़ रुपये से ज्यादा सेस वसूला जा चुका है। इस सेस की धनराशि का इस्तेमाल श्रमिकों के लिए 15 से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर खर्च किया जाएगा। एसएन नागेश, सहायक श्रमायुक्त।
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विभाग का दावा है कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक सेस के रूप में सात करोड़ जमा हो चुके हैं। वर्तमान समय में शहर में निर्माण कराने के लिए उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत से नक्शा पास कराना होता है। इसके लिए फीस जमा करनी होती है। अब इसमें श्रम विभाग भी शामिल हो गया है।
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भवन निर्माण कराने पर एक फीसदी सेस विभाग को देना होगा। सहायक श्रम आयुक्त के मुताबिक, केंद्र सरकार के 1996 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत एक फीसदी सेस लेने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में साल 2009 से इसे लागू किया गया था। इसके तहत, फरवरी 2009 के बाद भवन निर्माण दस लाख रुपये से ज्यादा होने पर एक फीसदी कुल लागत का एक फीसदी सेस देना होगा। चाहे वह निर्माण निजी हो या सरकारी।
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जीआईएस मैपिंग से कराया जा रहा सर्वे
सहायक श्रमायुक्त के अनुसार श्रम विभाग के पास कर्मचारियों की कमी के कारण सभी भवनों का सर्वे करना संभव नहीं है। ऐसे में विभाग जियोग्राफिक इन्फर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से मैपिंग कर भवनों की स्थित का पता लगाकर नोटिस जारी कर रहा है।
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ऐसे तय होती है लागत
मकान की लागत कवर्ड एरिया के आधार पर तय की जाती है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, एलडीए और राजकीय निर्माण निगम जैसी सरकारी एजेंसियां हर साल प्रति स्क्वायर फुट के हिसाब से लागत तय करती हैं। इन एजेंसियों के न्यूनतम रेट के आधार पर भी मकान की लागत तय की जाती है।
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देरी पर दो फीसदी ब्याज
सहायक श्रमायुक्त के मुताबिक, भवन मालिकों को जारी नोटिस में सेस चुकाने की समय सीमा भी तय की गई है। इस अवधि तक सेस का भुगतान न करने पर भवन मालिक को सेस की रकम का दो फीसदी ब्याज हर महीने देना पड़ सकता है। यदि निर्माण फरवरी 2009 से पहले हुआ है और नोटिस आ गया है तो गृह व जलकर के साथ बिजली का बिल आदि प्रस्तुत किया जा सकता है।
कोट
इस वित्तीय वर्ष में नौ करोड़ का लक्ष्य है। अभी तक 25 सौ से अधिक लोगों से सात करोड़ रुपये से ज्यादा सेस वसूला जा चुका है। इस सेस की धनराशि का इस्तेमाल श्रमिकों के लिए 15 से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर खर्च किया जाएगा। एसएन नागेश, सहायक श्रमायुक्त।