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धूमधाम से मनाया श्रीराम आचार्य का जन्मदिन
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शहर के कालेज रोड स्थित गायत्री मंदिर में आयोजित यज्ञोपवीत संस्कार में जनेऊ धारण करते बटुक।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। कालेज रोड स्थित गायत्री शक्ति पीठ युग ऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ व अखिल विश्व गायत्री परिवार हरिद्वार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ज्ञान व कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती-की पूजा-अर्चना की गई। यहां 25 बटुकों का यज्ञोपवीत कराया गया।
देव संस्कृति के निर्माता यज्ञ पिता गायत्री माता के पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए वरिष्ठ परिव्राजक जय सिंह वर्मा ने संगीतमय संचालन करते हुए आहुतियां डलवाईं। बताया कि यज्ञ कलयुग का कल्प वृक्ष है। इससे सारे विश्व का कल्याण होता है। व्यवस्थापक सिद्धनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि परमपूज्य गुरुदेव ने कहा था कि आप सब हमारे बच्चे हैं। हमने ऋषि परंपरा को ग्रहण किया है। ब्राह्मण अपरिग्रही होता है तथा संत सेवाभावी होता है। आपको दोनों परंपराओं को कायम रखना चाहिए, यही हमारी इच्छा है। यहां वरिष्ठजनों को गायत्री मंत्र पट्टिका से सम्मानित कर उनसे आशीर्वाद लेते हुए कहा कि जो माता-पिता गुरु एवं वृद्धजनों का सम्मान व सेवा करते हैं, उनके चार पदारथ आयु-विद्या-यश-बल बढ़ते हैं।
पंडित चंद्रकिशोर द्विवेदी ने वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच सुरेन्द्र तिवारी, कपिल द्विवेदी, विनय कुमार शुक्ला सहित 25 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत कराया। बताया कि उपनयन गायत्री का मूर्तिमान प्रतीक है। यह रक्षा कवच का काम करता है। वरिष्ठ संरक्षक चंद्रकांत तिवारी जी ने सभी माताओं-बहनों से अपील किया है कि सबसे पहले बच्चों को संस्कारवान बनायें। शांतिकुंज की ओर से चलाये गये सभी अभियानों में सहयोग करने की अपेक्षा की। सभी गायत्री परिजनों एवं बटुकों के परिवारीजन ने सैकड़ों की संख्या में सभी बटुकों के मंगलमय जीवन की कामना की। यहां सुरेश कुमार मिश्रा, सिद्धनाथ श्रीवास्तव, अजय कुमार शुक्ला, विश्वास त्रिपाठी, मंगल सिंह चौहान, सुशील जायसवाल, जय सिंह वर्मा, मेवालाल पाल, रामकरीबे पाल एवं महिला मंडल सहित सभी वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
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देव संस्कृति के निर्माता यज्ञ पिता गायत्री माता के पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ में विश्व कल्याण के लिए वरिष्ठ परिव्राजक जय सिंह वर्मा ने संगीतमय संचालन करते हुए आहुतियां डलवाईं। बताया कि यज्ञ कलयुग का कल्प वृक्ष है। इससे सारे विश्व का कल्याण होता है। व्यवस्थापक सिद्धनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि परमपूज्य गुरुदेव ने कहा था कि आप सब हमारे बच्चे हैं। हमने ऋषि परंपरा को ग्रहण किया है। ब्राह्मण अपरिग्रही होता है तथा संत सेवाभावी होता है। आपको दोनों परंपराओं को कायम रखना चाहिए, यही हमारी इच्छा है। यहां वरिष्ठजनों को गायत्री मंत्र पट्टिका से सम्मानित कर उनसे आशीर्वाद लेते हुए कहा कि जो माता-पिता गुरु एवं वृद्धजनों का सम्मान व सेवा करते हैं, उनके चार पदारथ आयु-विद्या-यश-बल बढ़ते हैं।
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पंडित चंद्रकिशोर द्विवेदी ने वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच सुरेन्द्र तिवारी, कपिल द्विवेदी, विनय कुमार शुक्ला सहित 25 बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत कराया। बताया कि उपनयन गायत्री का मूर्तिमान प्रतीक है। यह रक्षा कवच का काम करता है। वरिष्ठ संरक्षक चंद्रकांत तिवारी जी ने सभी माताओं-बहनों से अपील किया है कि सबसे पहले बच्चों को संस्कारवान बनायें। शांतिकुंज की ओर से चलाये गये सभी अभियानों में सहयोग करने की अपेक्षा की। सभी गायत्री परिजनों एवं बटुकों के परिवारीजन ने सैकड़ों की संख्या में सभी बटुकों के मंगलमय जीवन की कामना की। यहां सुरेश कुमार मिश्रा, सिद्धनाथ श्रीवास्तव, अजय कुमार शुक्ला, विश्वास त्रिपाठी, मंगल सिंह चौहान, सुशील जायसवाल, जय सिंह वर्मा, मेवालाल पाल, रामकरीबे पाल एवं महिला मंडल सहित सभी वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
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