बोर्ड परीक्षाएं सिर, केंद्र में व्यवस्थाएं नदारद
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यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 मार्च से शुरू होने जा रही हैं, लेकिन अभी भी कई परीक्षा केंद्रों में इंतजाम के लिए बजट रोड़ा बन है है। हाल यह है कि कई केंद्रों में फर्नीचर तक दुरुस्त नहीं हैं। दर्जनों केंद्रों में पानी का इंतजाम नहीं है। अरसे से खराब पड़े हैंडपंप अब तक दुरुस्त नहीं कराए जा सके। केंद्र व्यवस्थापकों ने बताया कि परीक्षा के लिए कोई अलग से बजट नहीं आता है। कक्षा 9,10,11 व 12 के छात्र-छात्राओं की फीस से ही इंतजाम किए जाते हैं। उसमें भी इतना धन नहीं आ पाता कि व्यवस्थाएं चाक चौबंद कराई जा सकें।
बानगी के तौर पर सदर स्थित अटल बिहारी इंटर कालेज को लें। 18 फरवरी से शुरू हो रहीं बोर्ड परीक्षाओं में इस स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। यहां छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए सीटें टूटी हैं। अभी तक सीटों की मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है। स्कूल में जो हैंडपंप लगा है वह भी खराब है। स्कूल प्रबंधन बोर्ड परीक्षाओं से पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की बात कह रहा है। इसी तरह शहर के रानी शंकर सहाय परीक्षा केंद्र में एक कमरे में फर्नीचर बनने के लिए पड़ा हुआ है। स्कूल में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि कुछ फर्नीचर टूटा हुआ है। उसे बनाने के लिए बढ़ई से कहा गया है। शनिवार से वह आकर काम करेगा। परीक्षा की शुुरुआत होने तक फर्नीचर बनकर तैयार हो जाएगा।
सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना भी फेल
बोर्ड परीक्षा में पारदर्शिता रहे इसके लिए पिछले वर्ष परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने के निर्देश शासन ने दिए थे। निर्देश के बाद तीन अच्छे प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर अन्य किसी भी स्कूल में सीसीटीवी नहीं लगाए गए। प्रधानाचार्यों की माने तो सीसीटीवी लगाने में लगभग पचास हजार रुपये का खर्च आएगा। सरकार ने सीसी टीवी लगाने के लिए कोई बजट तो दिया नहीं सीसीटीवी कैसे लगाए जा सकते हैं। ऐसे में यह योजना भी फेल हो गई।
क्या बोले डीआईओएस
परीक्षा कराने के नाम पर कोई अलग से बजट नहीं आता। कई मदों में पैसा होता है उसी से व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाती हैं। फिलहाल जो बजट है उसी से काम किया जा रहा है। - देवकी सिंह, डीआईओएस