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‘आधुनिक शिक्षा हासिल कर लीडर बनें मुसलमान’
Unnao
Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। मुसलमानों के लिए दुनिया की सबसे अहम सऊदी अरब की मक्का शरीफ स्थित मसजिद-ए-हरम (खाना-ए-काबा) के इमाम ने मौलाना खालिद अल गामदी ने गुरुवार को लखनऊ कानपुर मार्ग स्थित बजेहरा में जोहर की नमाज अदा कराई। इमाम-ए-हरम के पीछे नमाज अदा करने के लिए काफी तादाद में नमाजी पहुंचे। इमाम-ए-हरम ने इमामत करने के पहले यहां पर एफआई अली मियां इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की बुनियाद रखी। इस दौरान उन्होंने अरबी भाषा में दी गई तकरीर में मुसलमानों से दीनी तालीम के साथ ही आधुनिक शिक्षा हासिल करने की हिदायत दी और कहा कि मुसलमान आधुनिक शिक्षा हासिल कर लीडर बनें। उन्होंने विश्वशांति पर जोर दिया।
इमाम मौलाना खालिद अल गामदी का काफिला दोपहर बारह बजे बजेहरा के एफआई अली मियां इंस्टीट्यूट आफ मेेडिकल साइंस के मैदान पहुंचा। यहां के छात्र-छात्राओं ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। इमाम ने इंस्टीट्यूट की बुनियाद रखने के बाद तकरीर की। अरबी भाषा में दी गई तकरीर का अनुवाद मौलाना जफर नदवी ने किया। उन्होंने अजीम मुसलिम शख्सियत मौलाना अबुल हसन अली नदवी (मौलाना अली मियां) के नाम पर इंस्टीट्यूट खोलने वालों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में दो इल्म हैं। पहला शरई इल्म, जिसका ताल्लुक अल्लाहताला और उसकी जात से है। दूसरा शजरी इल्म (आधुनिक शिक्षा), जिसका संबंध दुनियावी तालीम से है। कहा कि आधुनिक शिक्षा हासिल कर दुनिया में लोगों की भलाई करें। इस इल्म को हासिल कर मुसलमान लीडर बनें, न कि किसी के पीछे चलने वाला। चिकित्सा विज्ञान, खगोल विज्ञान, गणित और सभी शैक्षिक विधाओं में उलेमा की एक बड़ी जमात मिलेगी। इसलामी हुकूमत जब यूरोप तक फैली थी तब उलेमा ने सिविलाईजेशन समेत दूसरी शिक्षा का विस्तार कराया। दुनिया उनसे इल्म हासिल करती थी। आज जरूरत है कि हम दुनिया के सभी इल्म चाहे वह चिकित्सा विज्ञान हो, इंजीनियरिंग हो या फिर कोई दूसरी शिक्षा, उसे न सिर्फ सीखें बल्कि उसमें कुछ नया करने की कोशिश करें। आज हमें दीनी और दुनियावी तालीम हासिल करके अपने किरदार को इतना ऊंचा बनाना है कि लोग इसलाम की ओर मुड़ें और पूरी दुनिया में इसलाम की तालीम पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए उनकी जरूरत पर वह हर जगह पहुंचेंगे।
कार्यक्रम आयोजक इकबाल, नोमान जुनूनी आदि लोगों ने इमाम-ए-हरम को मोमेंटो भेंट किए। इस मौके पर मौलाना सलमान नदवी, मौलाना जफर नदवी, इकबाल, नोमान जुनूनी, अनवर रहमान जीलानी, शुजाउर्रहमान सफवी, सैफ रहमान सफवी, अबरार अहमद, डा. ताहा फारूकी, ए रहमान इल्वी आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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इमाम मौलाना खालिद अल गामदी का काफिला दोपहर बारह बजे बजेहरा के एफआई अली मियां इंस्टीट्यूट आफ मेेडिकल साइंस के मैदान पहुंचा। यहां के छात्र-छात्राओं ने फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। इमाम ने इंस्टीट्यूट की बुनियाद रखने के बाद तकरीर की। अरबी भाषा में दी गई तकरीर का अनुवाद मौलाना जफर नदवी ने किया। उन्होंने अजीम मुसलिम शख्सियत मौलाना अबुल हसन अली नदवी (मौलाना अली मियां) के नाम पर इंस्टीट्यूट खोलने वालों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में दो इल्म हैं। पहला शरई इल्म, जिसका ताल्लुक अल्लाहताला और उसकी जात से है। दूसरा शजरी इल्म (आधुनिक शिक्षा), जिसका संबंध दुनियावी तालीम से है। कहा कि आधुनिक शिक्षा हासिल कर दुनिया में लोगों की भलाई करें। इस इल्म को हासिल कर मुसलमान लीडर बनें, न कि किसी के पीछे चलने वाला। चिकित्सा विज्ञान, खगोल विज्ञान, गणित और सभी शैक्षिक विधाओं में उलेमा की एक बड़ी जमात मिलेगी। इसलामी हुकूमत जब यूरोप तक फैली थी तब उलेमा ने सिविलाईजेशन समेत दूसरी शिक्षा का विस्तार कराया। दुनिया उनसे इल्म हासिल करती थी। आज जरूरत है कि हम दुनिया के सभी इल्म चाहे वह चिकित्सा विज्ञान हो, इंजीनियरिंग हो या फिर कोई दूसरी शिक्षा, उसे न सिर्फ सीखें बल्कि उसमें कुछ नया करने की कोशिश करें। आज हमें दीनी और दुनियावी तालीम हासिल करके अपने किरदार को इतना ऊंचा बनाना है कि लोग इसलाम की ओर मुड़ें और पूरी दुनिया में इसलाम की तालीम पहुंचे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए उनकी जरूरत पर वह हर जगह पहुंचेंगे।
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कार्यक्रम आयोजक इकबाल, नोमान जुनूनी आदि लोगों ने इमाम-ए-हरम को मोमेंटो भेंट किए। इस मौके पर मौलाना सलमान नदवी, मौलाना जफर नदवी, इकबाल, नोमान जुनूनी, अनवर रहमान जीलानी, शुजाउर्रहमान सफवी, सैफ रहमान सफवी, अबरार अहमद, डा. ताहा फारूकी, ए रहमान इल्वी आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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