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वृद्ध की हत्या में पुत्र-पौत्रों को उम्रकैद
Unnao
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। संपत्ति के विवाद में पिता को पीटकर मौत के घाट उतारने के मामले में न्यायालय ने मृतक के पुत्र और तीन पौत्रों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने सभी पर पांच-पांच हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है।
23 सितंबर 2011 को बिहार थाना क्षेत्र के शंकरगंज गांव के मजरा सहिला निवासी संतोष पुत्र भगवनादास का संपत्ति को लेकर उसके बड़े भाई ओमप्रकाश से विवाद हो रहा था। दोनों बेटों में विवाद होते देख 70 वर्षीय पिता भगवानदास मौके पर पहुंचे और दोनों बेटों को समझाने का प्रयास किया। आक्रोश में उनके बड़े बेटे ओमप्रकाश ने अपने पुत्र (मृतक के पौत्रों) धनेंद्र, सूर्यप्रकाश और भूपेंद्र के साथ मिलकर लाठियों से हमला कर दिया। घायल भगवानदास का छोटा पुत्र संतोष उन्हें अस्पताल लेकर जा रहा था तभी उनकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही हत्यारोपी पिता-पुत्रों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एडीजे द्वितीय कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। न्यायाधीश ने मुकदमे की सुनवाई करने के बाद दोष सिद्ध होने मृतक के पुत्र ओमप्रकाश और तीन पौत्रों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने सभी पर पांच-पांच हजार रुपए अर्थदंड का भी आदेश दिया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र ने भी जिरह की।
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23 सितंबर 2011 को बिहार थाना क्षेत्र के शंकरगंज गांव के मजरा सहिला निवासी संतोष पुत्र भगवनादास का संपत्ति को लेकर उसके बड़े भाई ओमप्रकाश से विवाद हो रहा था। दोनों बेटों में विवाद होते देख 70 वर्षीय पिता भगवानदास मौके पर पहुंचे और दोनों बेटों को समझाने का प्रयास किया। आक्रोश में उनके बड़े बेटे ओमप्रकाश ने अपने पुत्र (मृतक के पौत्रों) धनेंद्र, सूर्यप्रकाश और भूपेंद्र के साथ मिलकर लाठियों से हमला कर दिया। घायल भगवानदास का छोटा पुत्र संतोष उन्हें अस्पताल लेकर जा रहा था तभी उनकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही हत्यारोपी पिता-पुत्रों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एडीजे द्वितीय कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। न्यायाधीश ने मुकदमे की सुनवाई करने के बाद दोष सिद्ध होने मृतक के पुत्र ओमप्रकाश और तीन पौत्रों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने सभी पर पांच-पांच हजार रुपए अर्थदंड का भी आदेश दिया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र ने भी जिरह की।
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