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कसाब को फांसी: देर आए दुुरुस्त आए

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Unnao
Unnao Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। मुंबई पर हुए आतंकी हमले में जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब को बुधवार सुबह पुणे के यरवदा जेल में फांसी दी गई। उसको फांसी दिए जाने की खबर आते ही जगह जगह चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कई जगहों पर मिठाई बांटकर और पटाखे फोड़कर लोगों ने खुशी मनाई। करीब दो साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद फांसी दिए जाने पर कुछ लोगोें ने नाखुशी जाहिर की तो कुछ ने इसे कानूनी प्रक्रिया करार देते हुए देश की जीत बताया। इस दौरान राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर सुनवाई पर भी लोगों ने चर्चा की। जिले भर में लोगों ने कुछ इस तरह से प्रतिक्रियाएं दीं-
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अजमल कसाब हमारे मुल्क पर हमला करने आया था। वह मुल्क का मुजरिम है इसलिए मुल्क के कानून ने उसे जो भी सजा दी वह बिल्कुल सही और दुरुस्त है। अजमल की फांसी मुल्क में आतंक फैलाने वालों के लिए इबरत (नसीहत) है।
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मौलाना निसार अहमद मिस्बाही शहर काजी
हमारे वतन के साथ बगावत करने वाले का यही अंजाम होना चाहिए, अजमल कसाब ने बेगुनाहों की जान ली और हमारे वतन पर हमला किया। वह मुल्क और कानून दोनों का मुजरिम था। उसे फांसी होनी ही चाहिए थी।
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मौलाना राशिदुल कादिरी चतुर्वेदी
मेरे हिसाब से कसाब को बहुत पहले ही सरेआम फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए था। उसने बेगुनाहों की जान ली थी। इस्लाम बेगुनाह इंसान तो क्या पेड़ पौधों को भी तकलीफ पहुंचाने की इजाजत नहीं देता। कसाब ने तो इंसानियत का कत्ल किया था। मुल्क को इंसाफ मिला लेकिन देर से मिला।
कारी तौसीफ रजा


हुकूमत ने जो किया है वह बिलकुल सही कदम है, अगर किसी ने जुर्म किया है तो उसे उसके हिसाब से ही सजा मिलनी चाहिए। इस मामले में कानून ने अपना काम किया है।
डा. ताहा फारूकी


संविधान ने भारत के नागरिकों को दया याचिका के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाने का अधिकार दिया है। कई बेगुनाहों की जान लेने वाला अजमल कसाब देश का नागरिक नहीं था इसके बावजूद दया याचिका दायर की गई। राष्ट्रपति ने इस पर विचार करने में काफी समय लगाया। देर से सही, पर गुनाह की सही सजा मिली।
मो. रफी, छात्र
कसाब को बहुत पहले ही फांसी हो जानी चाहिए थी। केंद्र सरकार ने पता नहीं क्यों इतनी देर की। देश की अखंडता पर हमला करने वाले आतंकी की रक्षा और खाने पीने में करोड़ों रुपया खर्च किया गया। देर से ही सही लेकिन कानून ने अपना काम किया।
मस्तराम, जिला संयोजक भाजपा

कई लोगों की जिंदगी लेने वाले आतंकी का तो मौके पर ही काम तमाम कर देना चाहिए था। इतने लोगों की हत्या करने वाले आतंकी को सरकार ने सजा दिलाने में देर की। अंतत: मुंबई हमले में मरने वाले बेगुनाहों के परिवारों को न्याय मिल ही गया।
मालती बाजपेयी, भाजपा नेता
आतंकी को फंासी देश की एकता और अखंडता पर हमला करने वालों के लिए चेतावनी है। देश किसी भी धर्म, जाति, राजनीति और भाषा से ऊपर है। देश की अस्मिता पर हमला करने वालाें को कानून ने उनकी जगह दिखाई है। कसाब की फंासी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों की जीत है।
सुधीर रावत, सपा विधायक


देश की जनता को आज न्याय मिल ही गया। देर से ही सही देश पर हमला करने वालों को कानून ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।
राजकुमार निगम, हिंदू महासभा प्रांतीय उपाध्यक्ष
देश की अखंडता पर हमला करने वालों का यही अंजाम होता है चाहे वह अजमल कसाब हो या कोई और, सरकार और कानून ने अपना काम किया है। कसाब की फांसी देश की एकता, इंसानियत और कानून की जीत है।
वीर प्रताप सिंह कांग्रेस जिलाध्यक्ष
मुंबई में बेगुनाहों का कत्लेआम करने वाले आतंकी को फांसी का काफी समय से इंतजार था। उसकी फांसी से पूरे देश की अमन पसंद जनता ने चैन की सांस ली है। कानून ने देश पर हमला करने वाले आतंकियों को बता दिया है कि ऐसा करने वाले देर से ही सही जमींदोज हो जाते हैं।
कैप्टेन सरदार, व्यापारी


कसाब को फांसी देना सही कदम-राज कुमार
उन्नाव। विश्व हिंदू महासंघ व हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने झंडेश्वर महादेव मंदिर बड़ा चौराहा में एक गोष्ठी का आयोजन किया। गोपाष्टमी पर गौवंश की पूजा के साथ उनके महत्व व उपयोगिता तथा गौमाता के प्रति समाज की श्रद्धा व आस्था पर प्रकाश डाला गया।

महासंघ के कार्यकर्ताओें को संबोधित करते हुए संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष राजकुमार निगम ने गोपाष्टमी पर देश हित में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्णय के आधार पर अजमल कसाब को फांसी दिए जाने को सही बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी देशद्रोही होता है। देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त कानून बनने चाहिए और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अफजल गुरू को भी फांसी दी जानी चाहिए। इस अवसर पर वेद प्रकाश श्रीवास्तव, रघुवंश मणि त्रिवेदी, विनोद शर्मा, अरूण प्रकाश चौहान, दिनेश चंद्र शुक्ल, गोविंद निगम, ज्ञानेंद्र पाठक, विकास कनौजिया, धीरेंद्र प्रताप सिंह, हिमांशु तिवारी, प्रतीक कुमार तिवारी, पवन तिवारी, राघवेंद्र सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
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