{"_id":"5c8e9ad2bdec2213ee5d3d6d","slug":"181552849618-unnao-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाहन रोकने के लिए बनें नियम से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाहन रोकने के लिए बनें नियम से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। जिला अस्पताल परिसर तक वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए लगाई गई बेरिकेडिंग ने मरीजों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। इमरजेंसी व जनरल वार्ड से मरीज स्ट्रेचर व व्हील चेयर की मदद से डायग्नोस्टिक सेंटर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। मरीजों को लंबा चक्कर लगाकर डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचना पड़ रहा है।
वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए जिला अस्पताल में लोहे की ग्रिल लगवाने के साथ ही दोनों ओर लोहे के गेट की बेरिकेडिंग कर दी गई। पुरुष अस्पताल के मुख्यद्वार पर लगे गेट पर चौकीदार की तैनाती रहती है जबकि महिला अस्पताल के छोर पर लगे बेरिकेडिंग गेट में ताला लगा दिया गया है। यहां किसी भी कर्मी की तैनाती नहीं की गई है।
इमरजेंसी और वार्ड में भर्ती मरीजों को पैथालॉजी ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्ड ब्वाय पर्याप्त न होने से घायलों को पैथालॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर ले जाने की जिम्मेदारी भी तीमारदारों को उठानी पड़ती है। सीएमएस डॉ. अंजू द्विवेदी ने बताया कि वाहनों को रोकने के लिए बेरिकेडिंग की गई है। एक समय में एक मरीज निकलने के लिए रास्ता भी दिया गया है। दरवाजा खुलने से वाहनों का प्रवेश दोबारा शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
-महिला अस्पताल के निकट कर दी गई बेरिकेडिंग
-स्ट्रेचर व व्हील चेयर से डायग्नोस्टिक सेंटर तक नहीं पहुंच पा रहे मरीज
विज्ञापन
वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए जिला अस्पताल में लोहे की ग्रिल लगवाने के साथ ही दोनों ओर लोहे के गेट की बेरिकेडिंग कर दी गई। पुरुष अस्पताल के मुख्यद्वार पर लगे गेट पर चौकीदार की तैनाती रहती है जबकि महिला अस्पताल के छोर पर लगे बेरिकेडिंग गेट में ताला लगा दिया गया है। यहां किसी भी कर्मी की तैनाती नहीं की गई है।
विज्ञापन
इमरजेंसी और वार्ड में भर्ती मरीजों को पैथालॉजी ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्ड ब्वाय पर्याप्त न होने से घायलों को पैथालॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर ले जाने की जिम्मेदारी भी तीमारदारों को उठानी पड़ती है। सीएमएस डॉ. अंजू द्विवेदी ने बताया कि वाहनों को रोकने के लिए बेरिकेडिंग की गई है। एक समय में एक मरीज निकलने के लिए रास्ता भी दिया गया है। दरवाजा खुलने से वाहनों का प्रवेश दोबारा शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
-महिला अस्पताल के निकट कर दी गई बेरिकेडिंग
-स्ट्रेचर व व्हील चेयर से डायग्नोस्टिक सेंटर तक नहीं पहुंच पा रहे मरीज