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मोहानी मदरसा पहुंचे अहमद हसन
Updated Sun, 19 Aug 2018 11:29 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हसनगंज(उन्नाव )। विधान परिषद में नेता विपक्ष अहमद हसन रविवार शाम मोहान कस्बा स्थित स्वतंत्रता सेनानी व मशहूर शायर हसरत मोहानी की जन्मस्थली पहुंचे। उन्हाेंने यहां मोहानी की याद में स्थापित मिल्लत मदरसे का निरीक्षण किया और रख रखाव के लिए दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी।
हसन रविवार शाम चार बजे मोहान पहुंचे। उन्हाेंने यहां नगर पंचायत भवन के बगल में मौलवी घराने के भवन में संचालित दरगाह तालीम मिल्लत मदरसे की हालत देखी। जर्जर अवस्था में देख उसके रख रखाव के लिए दो लाख रुपये संचालक मोहम्मद को दिए। उन्होंने कहा कि इंकलाब जिंदाबाद का नारा देने वाले मौलाना हसरत मोहानी थे। उनका नाम आजादी के दीवानों में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। 1 जनवरी 1875 को मोहान गांव में जन्मे हसरत मोहानी बेजोड़ शायर के साथ आजादी के सच्चे सिपाही थे।
आजादी के जज्बे की जो झलक उनकी गजलों में मिलती है वह और कहीं नहीं है। उन्हें उन्नतशील गजलों का प्रवर्तक भी कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि अचानक उनका मदरसा देखने का मन किया लखनऊ से अपने घर से निकल पड़े और हसरत मोहानी की सरजमीन आ गए। यहां करीब एक घंटे रुकने के बाद वापस लखनऊ लौट गए। इस दौरान पूर्व राज्य मंत्री शकील खां, नगर पंचायत रसूलाबाद चेयरमैन नईमुद्दीन, आतिफ किदवई सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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- मदरसे के रखरखाव के लिए दिए दो लाख रुपये
- स्वतंत्रता सेनानी व मशहूर शायर हसरत मोहानी की सरजमीन देखी
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हसनगंज(उन्नाव )। विधान परिषद में नेता विपक्ष अहमद हसन रविवार शाम मोहान कस्बा स्थित स्वतंत्रता सेनानी व मशहूर शायर हसरत मोहानी की जन्मस्थली पहुंचे। उन्हाेंने यहां मोहानी की याद में स्थापित मिल्लत मदरसे का निरीक्षण किया और रख रखाव के लिए दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी।
हसन रविवार शाम चार बजे मोहान पहुंचे। उन्हाेंने यहां नगर पंचायत भवन के बगल में मौलवी घराने के भवन में संचालित दरगाह तालीम मिल्लत मदरसे की हालत देखी। जर्जर अवस्था में देख उसके रख रखाव के लिए दो लाख रुपये संचालक मोहम्मद को दिए। उन्होंने कहा कि इंकलाब जिंदाबाद का नारा देने वाले मौलाना हसरत मोहानी थे। उनका नाम आजादी के दीवानों में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। 1 जनवरी 1875 को मोहान गांव में जन्मे हसरत मोहानी बेजोड़ शायर के साथ आजादी के सच्चे सिपाही थे।
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आजादी के जज्बे की जो झलक उनकी गजलों में मिलती है वह और कहीं नहीं है। उन्हें उन्नतशील गजलों का प्रवर्तक भी कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि अचानक उनका मदरसा देखने का मन किया लखनऊ से अपने घर से निकल पड़े और हसरत मोहानी की सरजमीन आ गए। यहां करीब एक घंटे रुकने के बाद वापस लखनऊ लौट गए। इस दौरान पूर्व राज्य मंत्री शकील खां, नगर पंचायत रसूलाबाद चेयरमैन नईमुद्दीन, आतिफ किदवई सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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- मदरसे के रखरखाव के लिए दिए दो लाख रुपये
- स्वतंत्रता सेनानी व मशहूर शायर हसरत मोहानी की सरजमीन देखी