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10 किमी रेलवे रूट में 1700 पेंड्रोल क्लिपें गायब
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Sun, 23 Apr 2017 12:32 AM IST
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उन्नाव जंक्शन स्थित प्लेटफार्म नंबर दो पर खुली व टूटी पेंड्रोल क्लिप।
- फोटो : अमर उजाला
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शुक्लागंज से उन्नाव के बीच यात्री रेल सफर भगवान भरोसे हैं। यह खुलासा जीआरपी एसपी के आदेश पर कराई गई पटरियों की जांच में हुआ है। जांच में उन्नाव से शुक्लागंज के बीच करीब 10 किमी लंबे रेलवे रूट पर 1700 पेंड्रोल क्लिपें ही गायब मिलीं। महत्वपूर्ण यह है कि पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से पटरियों को जोड़ने की अहम कड़ी है। इस रूट पर लगातार हो रहे हादसों के बाद भी रेलवे प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दिया था।
करीब छह महीने में उन्नाव जंक्शन और शुक्लागंज के बीच कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें पश्चिमी केबिन के पास टावर वैगन का डिरेल होना, गंगाघाट स्टेशन से पहले छमकनाली के पास मालगाड़ी का पलटना, सोनिक व अजगैन के बीच पुष्पक एक्सप्रेस का टूटी पटरी से गुजर जाना और गुरुवार को कुसुंभी स्टेशन के पास टूटे ज्वाइंट से उत्सर्ग एक्सप्रेस का गुजरना प्रमुख हैं। कुसुंभी स्टेशन पर तो चालक के इमरजेंसी ब्रेक लगाने से हादसे से बचा जा सका था।
उत्सर्ग एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जांच के लिए आए एसपी जीआरपी विनय कुमार ने ट्रैक की निगरानी और निरीक्षण करने के आदेश जीआरपी को दिए थे। इसके बाद जीआरपी अफसरों ने पड़ताल की। जिसमें सामने आया कि उन्नाव से शुक्लागंज के बीच के करीब दस किमी लंबे ट्रैक से 1700 से अधिक पेंड्रोल क्लिपें गायब हैं। विभागीय अफसरों की मानें तो पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से पटरी को जोड़ने का काम करती हैं। अगर यह नहीं हाेंगी तो कभी भी पटरी फैल सकती है और ट्रेन के डिरेल होने से बड़ा हादसा हो सकता है।
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पेंड्रोल क्लिप न होने की स्थिति तब है जब इस रूट पर सवारी व मालगाड़ियों को मिलाकर रोजाना करीब दो सैकड़ा ट्रेनों का आवागमन होता है। इसमें शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेन भी शामिल है। इस बारे में जीआरपी एसओ सीपी सिंह ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर जब ट्रैक के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि केवल उन्नाव से शुक्लागंज के बीच ही 1700 पेंड्रोल क्लिप नहीं लगी हैं। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट एसपी को भेजी जाएगी।
जागी जीआरपी मगर सो रहे रेलवे अधिकारी
उन्नाव। उत्सर्ग एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से बचने के बाद एसपी के सख्त होने पर जीआरपी की नींद उड़ी है। अधिकारियों ने ट्रैक का सघन निरीक्षण शुरू करवा दिया है, लेकिन लगातार हो रहे हादसों के बाद भी रेलवे अधिकारी अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हे।
पेंड्रोल क्लिप का काम स्लीपर से रेल लाइन को जोड़ना होता है। इस क्लिप के नहीं होने से पटरी ढीली हो जाती है। हर 64 सेंटीमीटर की दूरी पर पेंड्रोल क्लिप लगाई जाती है। तय दूरी पर पेंड्रोल क्लिप नहीं होने से पटरी में गैप आ सकता है और इससे बड़ा हादसा होने का भी डर रहता है। - हसन अस्करी जैदी, रिटायर्ड चीफ पीडब्ल्यूआई
करीब छह महीने में उन्नाव जंक्शन और शुक्लागंज के बीच कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें पश्चिमी केबिन के पास टावर वैगन का डिरेल होना, गंगाघाट स्टेशन से पहले छमकनाली के पास मालगाड़ी का पलटना, सोनिक व अजगैन के बीच पुष्पक एक्सप्रेस का टूटी पटरी से गुजर जाना और गुरुवार को कुसुंभी स्टेशन के पास टूटे ज्वाइंट से उत्सर्ग एक्सप्रेस का गुजरना प्रमुख हैं। कुसुंभी स्टेशन पर तो चालक के इमरजेंसी ब्रेक लगाने से हादसे से बचा जा सका था।
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उत्सर्ग एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जांच के लिए आए एसपी जीआरपी विनय कुमार ने ट्रैक की निगरानी और निरीक्षण करने के आदेश जीआरपी को दिए थे। इसके बाद जीआरपी अफसरों ने पड़ताल की। जिसमें सामने आया कि उन्नाव से शुक्लागंज के बीच के करीब दस किमी लंबे ट्रैक से 1700 से अधिक पेंड्रोल क्लिपें गायब हैं। विभागीय अफसरों की मानें तो पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से पटरी को जोड़ने का काम करती हैं। अगर यह नहीं हाेंगी तो कभी भी पटरी फैल सकती है और ट्रेन के डिरेल होने से बड़ा हादसा हो सकता है।
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पेंड्रोल क्लिप न होने की स्थिति तब है जब इस रूट पर सवारी व मालगाड़ियों को मिलाकर रोजाना करीब दो सैकड़ा ट्रेनों का आवागमन होता है। इसमें शताब्दी जैसी वीआईपी ट्रेन भी शामिल है। इस बारे में जीआरपी एसओ सीपी सिंह ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर जब ट्रैक के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि केवल उन्नाव से शुक्लागंज के बीच ही 1700 पेंड्रोल क्लिप नहीं लगी हैं। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट एसपी को भेजी जाएगी।
जागी जीआरपी मगर सो रहे रेलवे अधिकारी
उन्नाव। उत्सर्ग एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से बचने के बाद एसपी के सख्त होने पर जीआरपी की नींद उड़ी है। अधिकारियों ने ट्रैक का सघन निरीक्षण शुरू करवा दिया है, लेकिन लगातार हो रहे हादसों के बाद भी रेलवे अधिकारी अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हे।
पेंड्रोल क्लिप का काम स्लीपर से रेल लाइन को जोड़ना होता है। इस क्लिप के नहीं होने से पटरी ढीली हो जाती है। हर 64 सेंटीमीटर की दूरी पर पेंड्रोल क्लिप लगाई जाती है। तय दूरी पर पेंड्रोल क्लिप नहीं होने से पटरी में गैप आ सकता है और इससे बड़ा हादसा होने का भी डर रहता है। - हसन अस्करी जैदी, रिटायर्ड चीफ पीडब्ल्यूआई