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पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद, जेठ बरी
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:31 AM IST
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पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद, जेठ बरी
उन्नाव। पत्नी की हत्या करने वाले युवक को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आरोपी युवक पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। कोर्ट ने जेठ को बरी कर दिया है। मृतका की मां ने दामाद व उसके बड़े भाई पर दहेज की मांग पूरी न होने पर बेटी की हत्या करने का मुकदमा दो वर्ष पूर्व गंगाघाट थाने में दर्ज कराया था।
गंगाघाट थानाक्षेत्र के मंसुखखेड़ा में रहने वाली मिलन पुत्री स्वर्गीय सुखलाल ने पुरवा कोतवाली के कसरौर निवासी अभिषेक पुत्र भीम शंकर से वर्ष 2014 में प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद अभिषेक मिलन के साथ ही गंगाघाट के तेजीपुरवा में रहने लगा था। मिलन की मां रामप्यारी ने बताया कि शादी के बाद से ही अभिषेक दहेज में बाइक व प्रापर्टी की मांग कर रहा था।
दहेज न देने पर वह बेटी को प्रताड़ित करता था। 27 मई 2015 को उसने बेटी की हत्या कर फांसी के फंदे पर लटका दिया। बेटी की मौत की खबर पर मां ने गंगाघाट थाने में दामाद अभिषेक व उसके बड़े भाई प्रमोद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह मामला विचाराधीन था। मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्म्द राशिद ने अभिषेक को हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने अभिषेक को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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हालांकि दहेज प्रतिषेध अधिनियम में उसे आरोपमुक्त कर दिया गया। वादी पक्ष से अपर शासकीय अधिवक्ता रामजीवन यादव ने मजबूती से पक्ष रखा।
- मां ने दामाद पर बेटी की हत्या का लगाया था आरोप, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पाया दोषी, 15 हजार अर्थदंड भी लगा
अमर उजाला ब्यूरो
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उन्नाव। पत्नी की हत्या करने वाले युवक को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आरोपी युवक पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। कोर्ट ने जेठ को बरी कर दिया है। मृतका की मां ने दामाद व उसके बड़े भाई पर दहेज की मांग पूरी न होने पर बेटी की हत्या करने का मुकदमा दो वर्ष पूर्व गंगाघाट थाने में दर्ज कराया था।
गंगाघाट थानाक्षेत्र के मंसुखखेड़ा में रहने वाली मिलन पुत्री स्वर्गीय सुखलाल ने पुरवा कोतवाली के कसरौर निवासी अभिषेक पुत्र भीम शंकर से वर्ष 2014 में प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद अभिषेक मिलन के साथ ही गंगाघाट के तेजीपुरवा में रहने लगा था। मिलन की मां रामप्यारी ने बताया कि शादी के बाद से ही अभिषेक दहेज में बाइक व प्रापर्टी की मांग कर रहा था।
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दहेज न देने पर वह बेटी को प्रताड़ित करता था। 27 मई 2015 को उसने बेटी की हत्या कर फांसी के फंदे पर लटका दिया। बेटी की मौत की खबर पर मां ने गंगाघाट थाने में दामाद अभिषेक व उसके बड़े भाई प्रमोद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट में यह मामला विचाराधीन था। मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्म्द राशिद ने अभिषेक को हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने अभिषेक को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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हालांकि दहेज प्रतिषेध अधिनियम में उसे आरोपमुक्त कर दिया गया। वादी पक्ष से अपर शासकीय अधिवक्ता रामजीवन यादव ने मजबूती से पक्ष रखा।
- मां ने दामाद पर बेटी की हत्या का लगाया था आरोप, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पाया दोषी, 15 हजार अर्थदंड भी लगा
अमर उजाला ब्यूरो