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गुटखे पर बैन का सच: अपना गुटखा बनाइए, खाइए!
विजय जैन
Updated Wed, 03 Apr 2013 05:36 PM IST
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हाईकोर्ट के फैसले के बाद उत्तरप्रदेश में भले ही गुटखे की बिक्री पर रोक लगा दी गई हो, लेकिन गुटखा खाने वाले बेफिक्र हैं। थोड़े से दाम ज्यादा चुकाने के बाद उन्हें गुटखा तो नहीं, लेकिन गुटखे जैसा खाद्य पदार्थ पहले की तरह हर गली-नुक्कड़ पर मिल रहा है।
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ये है सादा पान मसाला और जर्दा यानी सुगंधित खुशबू वाला तंबाकू।
इन दोनों को मिलाकर गुटखे के स्वाद वाला मिश्रण तैयार होता है और शौकीन लोग इसे बड़े चाव से खा रहे हैं।
ऐसे बन रहा है गुटखा
सादा पान मसाला का एक पाऊच बाजार में 3 रुपये में उपलब्ध है, वहीं जर्दे का पाऊच 4 रुपये का मिलता है।
दोनों को मिश्रण कर लिया जाए तो 7 रुपये में गुटखे के दो पाऊच तैयार हो जाते हैं।
हालांकि इसका स्वाद गुटखे जैसा नहीं होता, लेकिन ये गुटखे का अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
गुटखा खाने वाले एक व्यक्ति ने अमर उजाला को बताया कि रेडीमेड गुटखे का अपना ही मजा है। अब वो नहीं मिलेगा तो मजबूरी में पान मसाला और जर्दे को मिलाकर ही खाएंगे। अब भाई आदत है तो धीरे-धीरे ही जाएगी।
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वैसे आम गुटखा बाजार में 2 से 3 रुपये का बिकता था, जिसकी बिक्री पर अब रोक लगा दी गई है। चोरी छिपे कहीं बिक भी रहा है तो ऊंचे दामों पर।
यही कारण है कि पहले गुटखा बनाने वाली कंपनियों ने अब पान मसाला और जर्दा अलग-अलग बनाकर बेचना शुरू कर दिया है।
कहां-कहां प्रतिबंध
गोवा, मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, पंजाब
गुटखा खाने से पहले ध्यान दें
1. रोज 30 मिनट तक तंबाकू चबाना 4 सिगरेट से मिलने वाले निकोटिन के बराबर है।
2. जीभ, जबड़ों व गालों के भीतर संवेदनशील सफेद पेच बनने पर ‘ल्यूकोप्लेकिया’ हो जाता है। इससे आसपास कैंसर की कोशिकाएं विकसित होने लगती है।
3. तंबाकू चबाने वालों में कार्डियोवस्कुलर रोग(फेफड़ों की बीमारी) होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे 40 फीसदी मौतें हो जाती है।
4. तंबाकू में पाए जाने वाले निकोटिन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, रक्त धमनियों में रुकावट आती है। रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे हार्ट प्रभावित होता है।
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5. तंबाकू चबाने से दांतों की जड़ों को नुकसान पहुंचता है, जिससे केविटी जमा होती है। सांस में दुर्गेंध होने के साथ ही ओरल कैंसर की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
6. सामान्य व्यक्ति की तुलना में गुटखा खाने वालों में ओरल कैंसर की संभावना 50 गुना ज्यादा रहती है।