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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   The number of loan borrowers increased by 32 percent in the financial year 2021-22

वित्तीय वर्ष 2021-22 में लोन लेने वालों की संख्या 32 फीसदी बढ़ी

Mon, 23 May 2022 05:57 PM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Mon, 23 May 2022 05:57 PM IST
सार

  • शहर के 30 बैंकों के द्वारा दिए कुुल लोन पर दर्ज की गई है यह बढ़ोतरी  
  • सरकारी क्षेत्र के बैंकों में स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक रहे शीर्ष पर  

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The number of loan borrowers increased by 32 percent in the financial year 2021-22
demo photo - फोटो : pixabay

विस्तार

सोनम शुक्ला
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बरेली। वर्ष 2020-21 में कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था खस्ता हाल रही। कई बैंकें  अपने तय लक्ष्य को भी नहीं पा सकीं लेकिन वित्तीय वर्ष 2021-22 में 32.59 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यह इजाफा शहर के 30 बैंकों के द्वारा दिए कुुल लोन पर दर्ज किया गया है। कहा जा सकता है कि कोराना 2.0 में लोन लेने वालों की संख्या में इजाफा हुआ।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6192.6 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसका महज 86.12% ही प्राप्त किया जा सका। वर्ष 2021-22 के लिए यह लक्ष्य 6893.84 करोड़
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तय किया गया था, जिसमें 1289.82 करोड़ की वृद्धि के साथ बैंकों ने 8183.66 करोड़ की राशि लोन में दी। यह तय लक्ष्य सौ फीसदी से 18.71 फीसदी अधिक था। 
बैंक के अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था एकदम चरमरा गई थी। उस दौरान कई छोटे व्यापारी या दुकानदारों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। सबसे बड़ा कारण मध्यम और निम्न वर्ग की आय के साधन सीमित होते चले गए थे। बड़ी संख्या में लोगों के पलायन और नौकरियां चले जाने के कारण उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। लोग अपनी पुरानी चली आ रही ईएमआई का भुगतान भी नहीं कर सके थे। हालांकि उस दौरान सरकार ने कुछ शर्तों के साथ ईएमआई न वसूले जाने के निर्देश देकर बड़ी संख्या में लोगों को राहत पहुंचाई थी। अधिकारियों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 में अर्थ व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया। पहले की अपेक्षा चीजें और हालात बेहतर हुए। एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र में लोन लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है। आंकड़े बताते हैं कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों में स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक शीर्ष पर रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में एचडीएफसी की लोन की दर सर्वाधिक रही। दिसंबर 2021 में जारी आंकड़ों के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए भी अधिक रहा। 
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यह हैं मुख्य कारण

  • - लीड बैंक के अनुसार, कोरोना के बाद से सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई बेहतर योजनाएं चलाईं हैं। इस कारण छोटे व्यापारों या दुकान आदि के लिए लोन लिए जाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके अलावा कृषि के क्षेत्र में भी लोन को प्राथमिकता दी गई है। 
  • - लोन लेना भी पहले की अपेक्षा आसान हो गया है। अब छोटे लोन में सिक्योरिटी भी जमा नहीं होती है तो इस कारण से लोन इस क्षेत्र में ज्यादा बढ़ा है। 

लोन का बढ़ना शहर की अर्थव्यवस्था के लिए काफी बेहतर साबित होता है। कोरोना के चलते अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई थी। यह इस बात का प्रमाण है कि अर्थव्यवस्था बेहतर हो रही है। क्योंकि बैंक लोन उसी दर से बढ़ता है जिस दर से बैंकों में जमा बढ़ती है। - डॉ. शिखा, अर्थशास्त्री

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