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नए दौर में बढ़ी राग दरबारी की प्रासंगिकता : डॉ. रंजना

Sat, 15 Jul 2023 11:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Sat, 15 Jul 2023 11:30 PM IST
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The relevance of Raga Darbari has increased in the new era
सुलतानपुर। विकास के इस दौर में राग दरबारी उपन्यास की प्रासंगिकता काफी बढ़ गई है। यह उपन्यास समाज और राजनीति पर तीखी टिप्पणी है। इसमें हमारे पाखंडपूर्ण जीवन और परंपराओं पर प्रहार किया गया है। विडंबना यह कि 55 साल पहले छपे इस उपन्यास में चित्रित अनेक बातें आज भी जस की तस हैं बल्कि कुछ हालात सुधरने के बजाय बिगड़ ही रहे हैं।
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ये बातें राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रंजना पटेल ने कहीं। वह शनिवार को महाविद्यालय के संगोष्ठी कक्ष में बाबू धनंजय सिंह स्मृति आंतरिक व्याख्यान माला के अंतर्गत ''सामयिक संदर्भों में राग दरबारी की प्रासंगिकता'' विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रही थीं।
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उन्होंने कहा कि राग दरबारी उपन्यास गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत करता है। इसमें जनता की बात को उनकी पीड़ा और शिकायत को व्यंग्य के अंदाज में कहा गया है। सच तो यह है कि व्यवस्था पर जो प्रहार आम लोग करना चाह रहे थे, वह इस उपन्यास ने किया।
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संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रबंधक सुरेंद्र नाथ सिंह, आभार ज्ञापन हिंदी विभागाध्यक्ष इंद्रमणि कुमार और संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. दिनेश कुमार त्रिपाठी, पूर्व प्राचार्य प्रो. एमपी सिंह सहित महाविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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