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Sultanpur News: समय से दवा लें तो ठीक हो जाता है टीबी रोग
Mon, 24 Mar 2025 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 24 Mar 2025 12:14 AM IST
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सुल्तानपुर। चालू वर्ष में जिले को टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) मुक्त बनाने की दिशा में काम हो गया है। घर-घर जाकर टीबी रोगियों को खोजा जा रहा है। अभी तक जिले में 1204 टीबी मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। क्षय रोगियों की पहचान के बाद उन्हें गोद देकर इलाज कराने की व्यवस्था की गई है। चिकित्सकों का कहना है कि अगर समय से दवा लें तो टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत जिले को 2025 तक टीवी मुक्त करना है। इसके लिए टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए निक्षय मित्र बनाए गए हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ.आरके कनौजिया ने बताया कि टीबी के दो तरह के मरीज पाए जाते हैं। टीबी की बीमारी प्रमुख रूप से फेफड़े में पाई जाती है। इसके अलावा हड्डी, गला, मस्तिष्क समेत अन्य अंगों में यह बीमारी हो सकती है।
बताया कि दो सप्ताह तक खांसी, बुखार का आना, वजन में कमी, खांसते समय बलगम के साथ खून आना मुख्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण वाले मरीजाें को उन्होंने चिकित्सक से चेकअप कराने की सलाह दी है।
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इलाज, दवा मुफ्त, मिलते हैं पोषण के लिए 500 रुपये
टीबी मरीजों को इलाज और दवा के साथ ही सरकार 500 रुपये देती है। यह पैसा डीबीटी के माध्यम से सीधे मरीज के खाते में भेजा जाता है। इस पैसे से मरीज पोषण युक्त खाद्य पदार्थ खरीद सकते हैं। जिला क्षय रोग वरिष्ठ पर्यवेक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में जांच, उपचार और इलाज फ्री होता है। 2025 तक जिले को क्षय मुक्त बनाने की दिशा में काम चल रहा है।
जिले में घट रहे टीबी मरीज
जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय से मिले आंकड़ों की मानें तो साल दर साल टीवी मरीजों की संख्या में कमी हो रही है। वर्ष 2019 में क्षय रोगियों की संख्या 4838 थी, जो 2020 में 4407 हो गई। इसी तरह 2021 में 3789 मरीज, 2022 में 3792 और 2023 में 3972 मरीज मिले। 2024 में यह आंकड़ा 2129 है और जनवरी 2025 से अब तक केवल 1204 टीबी मरीज हैं।
इनसेट..
निक्षय मित्रों के जरिए हो रहा इलाज
सीएमओ डॉ. ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए निक्षय मित्र बनाए जा रहे हैं। ये क्षय रोगियों को गोद लेते हैं और बीमारी के खात्मे तक देखरेख करते हैं। जिले में अभी तक 459 से अधिक निक्षय मित्र बनाए गए हैं। निक्षय मित्र कोई भी व्यक्ति, अधिकारी, स्वयंसेवी संगठन, जनप्रतिनिधि हो सकता है।
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राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत जिले को 2025 तक टीवी मुक्त करना है। इसके लिए टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए निक्षय मित्र बनाए गए हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ.आरके कनौजिया ने बताया कि टीबी के दो तरह के मरीज पाए जाते हैं। टीबी की बीमारी प्रमुख रूप से फेफड़े में पाई जाती है। इसके अलावा हड्डी, गला, मस्तिष्क समेत अन्य अंगों में यह बीमारी हो सकती है।
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बताया कि दो सप्ताह तक खांसी, बुखार का आना, वजन में कमी, खांसते समय बलगम के साथ खून आना मुख्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण वाले मरीजाें को उन्होंने चिकित्सक से चेकअप कराने की सलाह दी है।
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इलाज, दवा मुफ्त, मिलते हैं पोषण के लिए 500 रुपये
टीबी मरीजों को इलाज और दवा के साथ ही सरकार 500 रुपये देती है। यह पैसा डीबीटी के माध्यम से सीधे मरीज के खाते में भेजा जाता है। इस पैसे से मरीज पोषण युक्त खाद्य पदार्थ खरीद सकते हैं। जिला क्षय रोग वरिष्ठ पर्यवेक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में जांच, उपचार और इलाज फ्री होता है। 2025 तक जिले को क्षय मुक्त बनाने की दिशा में काम चल रहा है।
जिले में घट रहे टीबी मरीज
जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय से मिले आंकड़ों की मानें तो साल दर साल टीवी मरीजों की संख्या में कमी हो रही है। वर्ष 2019 में क्षय रोगियों की संख्या 4838 थी, जो 2020 में 4407 हो गई। इसी तरह 2021 में 3789 मरीज, 2022 में 3792 और 2023 में 3972 मरीज मिले। 2024 में यह आंकड़ा 2129 है और जनवरी 2025 से अब तक केवल 1204 टीबी मरीज हैं।
इनसेट..
निक्षय मित्रों के जरिए हो रहा इलाज
सीएमओ डॉ. ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए निक्षय मित्र बनाए जा रहे हैं। ये क्षय रोगियों को गोद लेते हैं और बीमारी के खात्मे तक देखरेख करते हैं। जिले में अभी तक 459 से अधिक निक्षय मित्र बनाए गए हैं। निक्षय मित्र कोई भी व्यक्ति, अधिकारी, स्वयंसेवी संगठन, जनप्रतिनिधि हो सकता है।