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Sultanpur News: वन भूमि कब्जाने के आरोप में सपा विधायक ताहिर कोर्ट में तलब
Thu, 27 Jun 2024 01:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 27 Jun 2024 01:08 AM IST
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सुल्तानपुर। जिले में समाजवादी पार्टी के एकमात्र विधायक और पूर्व सांसद मोहम्मद ताहिर खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वन विभाग के लिए आरक्षित भूमि पर कब्जा करने व सरकारी कार्य में बाधा डालने के केस में एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने इसौली विधायक को तीन जुलाई को तलब किया है। 24 साल पुराना यह मामला अभी कुछ समय पहले ही एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंचा है।
यह घटना 03 फरवरी 2000 की है। उस वक्त मो. ताहिर खान न तो सांसद हुए थे और न ही विधायक थे। उस समय ताहिर खान के गांव पांचोपीरन में वन विभाग की जमीन पर कब्जा करने के मामले में वन दारोगा मुकेश कुमार ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था।
आरोप लगाया था कि ताहिर वन विभाग की जमीन पर कब्जा करने के लिए ट्रैक्टर से सड़क का निर्माण कर रहे थे और मना करने पर सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए आपराधिक बल का प्रयोग कर अपमानित किया था।
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लंबे समय से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा था किंतु कुछ समय पहले ही यह केस एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा के पास सुनवाई के लिए पहुंचा। उन्होंने इस मामले में विधायक को तीन जुलाई को तलब किया है।
इस बारे में विधायक ताहिर खान कहते हैं कि उन्हें लगता था कि यह केस खत्म हो गया है। हालांकि हर शपथपत्र में वे इसका जिक्र करते रहे हैं। विधायक कहते हैं कि यह विरोधियों की साजिश है। उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहीं भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है।
पैरवी न होने के कारण दबा रहा मामला
विधायक ताहिर खान के खिलाफ यह मामला वर्ष 2000 में दर्ज हुआ था जो सीजेएम कोर्ट में चल रहा था। किंतु अभी तक इस मामले में न तो विधायक ने जमानत करवाई है और न ही बयान आदि हुए हैं। केवल तारीख पड़ती रही। जब एमपी-एमएलए कोर्ट का गठन हुआ तो उस वक्त यह केस विशेष कोर्ट में ट्रांसफर हो जाना चाहिए था।
ऐसा हुआ होता तो अब तक शायद इस मामले में कोर्ट का फैसला भी आ चुका होता। किंतु यह मामला पुलिस व वन विभाग की कमजोर पैरवी के कारण सीजेएम कोर्ट में ही रहा। अब 24 साल बाद एमपी-एमएलए कोर्ट में यह मामला आने के बाद माना जा रहा है कि इसमें त्वरित सुनवाई होगी।
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यह घटना 03 फरवरी 2000 की है। उस वक्त मो. ताहिर खान न तो सांसद हुए थे और न ही विधायक थे। उस समय ताहिर खान के गांव पांचोपीरन में वन विभाग की जमीन पर कब्जा करने के मामले में वन दारोगा मुकेश कुमार ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था।
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आरोप लगाया था कि ताहिर वन विभाग की जमीन पर कब्जा करने के लिए ट्रैक्टर से सड़क का निर्माण कर रहे थे और मना करने पर सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए आपराधिक बल का प्रयोग कर अपमानित किया था।
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लंबे समय से यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा था किंतु कुछ समय पहले ही यह केस एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा के पास सुनवाई के लिए पहुंचा। उन्होंने इस मामले में विधायक को तीन जुलाई को तलब किया है।
इस बारे में विधायक ताहिर खान कहते हैं कि उन्हें लगता था कि यह केस खत्म हो गया है। हालांकि हर शपथपत्र में वे इसका जिक्र करते रहे हैं। विधायक कहते हैं कि यह विरोधियों की साजिश है। उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहीं भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है।
पैरवी न होने के कारण दबा रहा मामला
विधायक ताहिर खान के खिलाफ यह मामला वर्ष 2000 में दर्ज हुआ था जो सीजेएम कोर्ट में चल रहा था। किंतु अभी तक इस मामले में न तो विधायक ने जमानत करवाई है और न ही बयान आदि हुए हैं। केवल तारीख पड़ती रही। जब एमपी-एमएलए कोर्ट का गठन हुआ तो उस वक्त यह केस विशेष कोर्ट में ट्रांसफर हो जाना चाहिए था।
ऐसा हुआ होता तो अब तक शायद इस मामले में कोर्ट का फैसला भी आ चुका होता। किंतु यह मामला पुलिस व वन विभाग की कमजोर पैरवी के कारण सीजेएम कोर्ट में ही रहा। अब 24 साल बाद एमपी-एमएलए कोर्ट में यह मामला आने के बाद माना जा रहा है कि इसमें त्वरित सुनवाई होगी।