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पितृ विसर्जन पर लोगों को पूर्वजों को दी विदाई
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10.11. सुल्तानपुर के सीताकुंड घाट पर पितृ विसर्जन पर पिंडदान करते लोग।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। पितृ विसर्जन पर बुधवार को हिंदुओं ने अपने पूर्वजों को विदाई दी। आदि गंगा गोमती में स्नान के बाद सीताकुंड घाट पर लोगों ने पूर्वजों के तर्पण के लिए पिंडदान किया। शुद्धता के लिए मुंडन कराकर धन, वस्त्र व खाद्य सामग्री गरीबों को दान किया।
पंद्रह दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का बुधवार को समापन हो गया। हिंदू धर्म की मान्यता है कि इस पक्ष में पूर्वज धरती पर अपने वंशजों से सेवा लेने आते हैं। इस पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को स्नान के बाद कुश व काला तिल के साथ पानी देते हैं। तिथि के अनुसार, लोग अपने पूर्वजों के तर्पण के लिए पुरोहित को भोजन और दान-दक्षिण भी देते हैं। पितृपक्ष के इन 15 दिनों में लोग भोजन का भोग लगाते हैं।
अमावस्या के दिन मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान व अन्य प्रकार के दान कर अपने पूर्वजों की विदाई करते हैं। बुधवार को अमावस्या के दिन सीताकुंड घाट पर गोमती नदी के किनारे सुबह से पिंडदान करने वाले लोग इकट्ठा होने लगे। लोगों ने आदि गंगा गोमती में स्नानकर अपने पूर्वजों को पानी दिया। इसके बाद लोगों ने पुरोहित के मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान किया। कुछ लोगों ने गोमती में स्नान के बाद गोदान भी कराया। पिंडदान करने के बाद लोगों ने गरीबों को वस्त्र, आटा, चावल, आलू व पैसा दान किया। नदी के किनारे नहीं पहुंच पाने वाले लोगों ने घरों पर ही अपने पूर्वजों का रीति रिवाज व परंपरा के अनुसार तर्पण किया। पितृ विसर्जन की शुद्धि के लिए लोगों ने मुंडन भी कराया।
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पंद्रह दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का बुधवार को समापन हो गया। हिंदू धर्म की मान्यता है कि इस पक्ष में पूर्वज धरती पर अपने वंशजों से सेवा लेने आते हैं। इस पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को स्नान के बाद कुश व काला तिल के साथ पानी देते हैं। तिथि के अनुसार, लोग अपने पूर्वजों के तर्पण के लिए पुरोहित को भोजन और दान-दक्षिण भी देते हैं। पितृपक्ष के इन 15 दिनों में लोग भोजन का भोग लगाते हैं।
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अमावस्या के दिन मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान व अन्य प्रकार के दान कर अपने पूर्वजों की विदाई करते हैं। बुधवार को अमावस्या के दिन सीताकुंड घाट पर गोमती नदी के किनारे सुबह से पिंडदान करने वाले लोग इकट्ठा होने लगे। लोगों ने आदि गंगा गोमती में स्नानकर अपने पूर्वजों को पानी दिया। इसके बाद लोगों ने पुरोहित के मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान किया। कुछ लोगों ने गोमती में स्नान के बाद गोदान भी कराया। पिंडदान करने के बाद लोगों ने गरीबों को वस्त्र, आटा, चावल, आलू व पैसा दान किया। नदी के किनारे नहीं पहुंच पाने वाले लोगों ने घरों पर ही अपने पूर्वजों का रीति रिवाज व परंपरा के अनुसार तर्पण किया। पितृ विसर्जन की शुद्धि के लिए लोगों ने मुंडन भी कराया।
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