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Sultanpur News: मेडिकल कॉलेज में ओपीडी में इलाज के इंतजार में एक और वृद्धा की मौत
Wed, 19 Apr 2023 12:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 19 Apr 2023 12:52 AM IST
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सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुधवार को इलाज के इंतजार में एक और बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। आक्रोशित परिवारीजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ओपीडी के सामने शव रखकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे डाॅक्टरों की टीम से भी तीमारदारों की काफी कहासुनी हुई। सीएमएस के हस्तक्षेप पर आधा घंटे बाद मामला शांत हो सका। इस दौरान स्थानीय पुलिस भी पहुंच गई। इससे पहले गत बुधवार को भी यहां इलाज के अभाव में दो लोगों की मौत हो गई थी।
शहर के निरालानगर की निवासी निर्मला देवी (65) की मंगलवार को अचानक तबीयत खराब हो गई। उल्टी व कमजोरी की शिकायत पर बेटा जितेंद्र चौरसिया मां को लेकर कुड़वार नाके स्थित निजी अस्पताल में पहुंचा, जहां चिकित्सक ने हालत गंभीर बता जिला अस्पताल में एडमिट कराने का सुझाव दिया। पूर्वाह्न 11 बजे बेटे ने मां को स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी कक्ष में पहुंचाया। वहां पर मौजूद जूनियर रेजीडेंट चिकित्सकों को पूरी बात बताई। इस पर चिकित्सक ने मरीज को इंजेक्शन लगवाया और ओपीडी में फिजिशियन को दिखाने के लिए भेज दिया। जितेेंद्र अपने भाई के साथ मां निर्मला देवी को लेकर ओपीडी की गैलरी में लेकर पहुंचा ही था, तभी अचानक उसकी मांं की तबीयत फिर से खराब होने लगी। देखते ही देेखते निर्मला देवी बेहोश होकर गिर पड़ीं। इस पर उनके दोनों पुत्र बदहवास हो गए और दोनों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर-शराबा सुनकर सीएमएस ने चिकित्सकों की एक टीम मौके पर भेजी। चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि निर्मला देवी की मृत्यु हो चुकी थी। यह पता चलते ही मृतका के दोनों बेटों ने शव को ओपीडी के सामने रखकर हंगामा शुरू कर दिया। पीड़ित पक्ष ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामा होने पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी पर सीएमएस डॉ. एसके गोयल मौके पर पहुंचे। उन्होंने तीमारदारों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।
-- -इनसेट-- -
चलने की स्थिति में नहीं थी महिला
निजी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आतमजीत सिंह ने बताया कि महिला अपने बेटे के साथ इलाज के लिए पहले उनके अस्पताल में आई थी, जहां वह चलने की स्थिति में नहीं थी। पूरे शरीर में कमजोरी थी, वहीं महिला की पल्स भी काफी कमजोर हो गई थी। ऐसे में इमरजेंसी की स्थिति में उसे जिला अस्पताल जाने को कहा था।
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बुधवार को भी इलाज के अभाव में ओपीडी में दो मरीजों ने तोड़ा था दम
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुधवार को इलाज के अभाव में दो मरीजों ने दम तोड़ दिया था। 55 वर्षीय बंधुआकला निवासी सुरेंद्र ओपीडी कक्ष संख्या सात में फिजिशियन को दिखाने पहुंचे थे। हृदय रोग से संबंधित समस्या थी। बताया गया कि चिकित्सक राउंड पर निकले हैं। वह पर्चा जमाकर ओपीडी से बाहर निकल रहे थे, तभी बेहोश होकर गिर पड़े और मौत हो गई। दूसरी घटना अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के अनभुला गांव निवासी 70 वर्षीय विदेशी की है। मेडिकल कॉलेज ओपीडी के बाहर ही उन्होंने भी बुधवार को दम तोड़ दिया था। पत्नी हंसराजी के अनुसार, उनके सीने में संक्रमण की शिकायत थी। चिकित्सकों के अनुसार, उन्हें टीबी का संक्रमण था। ओपीडी के बरामदे में इलाज के इंतजार में वह बेहोश होकर गिर गए और पत्नी की गोंद में सिर रखकर उनकी मौत हो गई। इसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है।
अब ईएमओ के साथ बैठेंगे स्पेशलिस्ट
मंगलवार को वृद्धा की मौत के मामले को लेकर हुए हंगामे के बाद सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी ने इमरजेंसी कक्ष में जूनियर डाॅक्टरों के साथ स्पेशलिस्ट डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। सीएमओ ने कहा कि सुबह से लेकर ओपीडी खत्म होने तक इमरजेंसी कक्ष में सीनियर चिकित्सक आवश्यक रूप से मौजूद रहेंगे।
इमरजेंसी से ओपीडी में नहीं भेजे जाएंगे मरीज
एक सप्ताह के भीतर ओपीडी में तीन लोगों की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नया फरमान जारी किया है। सीएमएस डॉ. एसके गोयल व सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी ने बताया कि ओपीडी में हुई मरीजों की मौत की जांच के मामले में गठित कमेटी ने निर्णय लिया है कि अब कोई भी मरीज इमरजेंसी से ओपीडी में नहीं भेजा जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ेगी तो ओपीडी से चिकित्सकों को इमरजेंसी कक्ष बुलाकर मरीजों का उपचार कराया जाएगा।
-- -वर्जन-- -
महिला की मौत के बाद दोनों सीएमएस व ड्यूटी के दौरान मौजूद चिकित्सक के साथ बैठक की गई। महिला को सबसे पहले इमरजेंसी में पेनकिलर दी गई, जिससे उसने आराम होने के बात कही, लेकिन मरीज के सिम्टम्स नहीं खत्म हुए थे। मोबलाइज होने पर दिक्कत बढ़ गई।
-डॉ. डीके त्रिपाठी, सीएमओ, सुल्तानपुर।
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शहर के निरालानगर की निवासी निर्मला देवी (65) की मंगलवार को अचानक तबीयत खराब हो गई। उल्टी व कमजोरी की शिकायत पर बेटा जितेंद्र चौरसिया मां को लेकर कुड़वार नाके स्थित निजी अस्पताल में पहुंचा, जहां चिकित्सक ने हालत गंभीर बता जिला अस्पताल में एडमिट कराने का सुझाव दिया। पूर्वाह्न 11 बजे बेटे ने मां को स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी कक्ष में पहुंचाया। वहां पर मौजूद जूनियर रेजीडेंट चिकित्सकों को पूरी बात बताई। इस पर चिकित्सक ने मरीज को इंजेक्शन लगवाया और ओपीडी में फिजिशियन को दिखाने के लिए भेज दिया। जितेेंद्र अपने भाई के साथ मां निर्मला देवी को लेकर ओपीडी की गैलरी में लेकर पहुंचा ही था, तभी अचानक उसकी मांं की तबीयत फिर से खराब होने लगी। देखते ही देेखते निर्मला देवी बेहोश होकर गिर पड़ीं। इस पर उनके दोनों पुत्र बदहवास हो गए और दोनों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर-शराबा सुनकर सीएमएस ने चिकित्सकों की एक टीम मौके पर भेजी। चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि निर्मला देवी की मृत्यु हो चुकी थी। यह पता चलते ही मृतका के दोनों बेटों ने शव को ओपीडी के सामने रखकर हंगामा शुरू कर दिया। पीड़ित पक्ष ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामा होने पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी पर सीएमएस डॉ. एसके गोयल मौके पर पहुंचे। उन्होंने तीमारदारों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया।
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चलने की स्थिति में नहीं थी महिला
निजी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आतमजीत सिंह ने बताया कि महिला अपने बेटे के साथ इलाज के लिए पहले उनके अस्पताल में आई थी, जहां वह चलने की स्थिति में नहीं थी। पूरे शरीर में कमजोरी थी, वहीं महिला की पल्स भी काफी कमजोर हो गई थी। ऐसे में इमरजेंसी की स्थिति में उसे जिला अस्पताल जाने को कहा था।
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बुधवार को भी इलाज के अभाव में ओपीडी में दो मरीजों ने तोड़ा था दम
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुधवार को इलाज के अभाव में दो मरीजों ने दम तोड़ दिया था। 55 वर्षीय बंधुआकला निवासी सुरेंद्र ओपीडी कक्ष संख्या सात में फिजिशियन को दिखाने पहुंचे थे। हृदय रोग से संबंधित समस्या थी। बताया गया कि चिकित्सक राउंड पर निकले हैं। वह पर्चा जमाकर ओपीडी से बाहर निकल रहे थे, तभी बेहोश होकर गिर पड़े और मौत हो गई। दूसरी घटना अमेठी जिले के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के अनभुला गांव निवासी 70 वर्षीय विदेशी की है। मेडिकल कॉलेज ओपीडी के बाहर ही उन्होंने भी बुधवार को दम तोड़ दिया था। पत्नी हंसराजी के अनुसार, उनके सीने में संक्रमण की शिकायत थी। चिकित्सकों के अनुसार, उन्हें टीबी का संक्रमण था। ओपीडी के बरामदे में इलाज के इंतजार में वह बेहोश होकर गिर गए और पत्नी की गोंद में सिर रखकर उनकी मौत हो गई। इसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है।
अब ईएमओ के साथ बैठेंगे स्पेशलिस्ट
मंगलवार को वृद्धा की मौत के मामले को लेकर हुए हंगामे के बाद सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी ने इमरजेंसी कक्ष में जूनियर डाॅक्टरों के साथ स्पेशलिस्ट डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। सीएमओ ने कहा कि सुबह से लेकर ओपीडी खत्म होने तक इमरजेंसी कक्ष में सीनियर चिकित्सक आवश्यक रूप से मौजूद रहेंगे।
इमरजेंसी से ओपीडी में नहीं भेजे जाएंगे मरीज
एक सप्ताह के भीतर ओपीडी में तीन लोगों की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नया फरमान जारी किया है। सीएमएस डॉ. एसके गोयल व सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी ने बताया कि ओपीडी में हुई मरीजों की मौत की जांच के मामले में गठित कमेटी ने निर्णय लिया है कि अब कोई भी मरीज इमरजेंसी से ओपीडी में नहीं भेजा जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ेगी तो ओपीडी से चिकित्सकों को इमरजेंसी कक्ष बुलाकर मरीजों का उपचार कराया जाएगा।
महिला की मौत के बाद दोनों सीएमएस व ड्यूटी के दौरान मौजूद चिकित्सक के साथ बैठक की गई। महिला को सबसे पहले इमरजेंसी में पेनकिलर दी गई, जिससे उसने आराम होने के बात कही, लेकिन मरीज के सिम्टम्स नहीं खत्म हुए थे। मोबलाइज होने पर दिक्कत बढ़ गई।
-डॉ. डीके त्रिपाठी, सीएमओ, सुल्तानपुर।