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Sultanpur News: मिट्टी से रोजगार, प्रतिमाएं बन रहीं पहचान

Mon, 05 Oct 2026 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Mon, 05 Oct 2026 12:11 AM IST
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Livelihood from clay; idols are becoming an identity
मूर्तिकार सुशील कुमार की बनाई देवी प्रतिमा। संवाद
करौंदीकला। नौकरी की तलाश में शहरों की ओर रुख करने वाले युवाओं के बीच समुदा गांव के 24 वर्षीय सुशील कुमार ने मिट्टी को ही रोजगार का जरिया बना लिया। बीएससी तक पढ़ाई करने वाले सुशील पिछले पांच साल से प्रतिमाएं बनाकर न सिर्फ क्षेत्र के पूजा पंडालों की आस्था को आकार दे रहे हैं बल्कि पढ़ाई का खर्च भी इसी हुनर से उठाते रहे हैं। क्षेत्र में मूर्तिकला को रोजगार बनाने वाले वह इकलौते मूर्तिकार हैं।
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मिट्टी से खेलने का शौक बना हुनर
सुशील को बचपन से मिट्टी से आकृतियां बनाने का शौक था। आंगन में गणेश और शिवलिंग की छोटी प्रतिमाएं बनाने से शुरू हुआ सिलसिला धीरे-धीरे हुनर में बदल गया। उन्होंने किसी स्कूल से इसका प्रशिक्षण नहीं लिया। यू-ट्यूब और लगातार अभ्यास के जरिये बड़ी प्रतिमाएं गढ़ना सीखा। नवरात्र से करीब दो महीने पहले उनकी कार्यशाला में प्रतिमाएं तैयार करने का काम शुरू हो जाता है।
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40 से 45 पंडालों में स्थापित होती हैं प्रतिमाएं
करौंदीकला, मगरसन कला, कनरवल और शहाबुद्दीनपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में दुर्गा पूजा, गणेश पूजा, लक्ष्मी पूजा और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के करीब 40 से 45 पंडालों में सुशील की बनाई प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनकी प्रतिमाओं के चेहरे के भाव और बारीक काम लोगों को आकर्षित करते हैं। इसी वजह से कई लोग हर वर्ष उन्हीं से प्रतिमा बनवाते हैं।
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प्रतिमाओं की कमाई से पूरी की पढ़ाई
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुशील के पिता खेती करते हैं। परिवार पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसलिए सुशील ने मूर्तिकला से होने वाली आमदनी से किताबों और फीस का खर्च निकाला। अब इसी काम से वह परिवार की आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। सुशील ने बताया कि उनका लक्ष्य भविष्य में बड़ी कार्यशाला स्थापित कर गांव के युवाओं को मूर्तिकला का प्रशिक्षण देना है, जिससे हुनर को रोजगार से जोड़ा जा सके।
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