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ज्यादातर विद्यालयों में कम पहुंचे प्रश्नपत्र
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सुल्तानपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चल रही वार्षिक परीक्षाओं में अव्यवस्था का बोलबाला है। ज्यादातर विद्यालयों में नामांकित बच्चों के सापेक्ष प्रश्नपत्र तक नहीं पहुंचे। ऐसे में शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिख रहे हैं और बच्चे उत्तर पुस्तिकाओं में ब्लैकबोर्ड से देखकर प्रश्न हल कर रहे हैं। यही नहीं कई विद्यालयों में झुंड में बैठकर बच्चों को परीक्षा देते देखा गया।
परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मंगलवार से परीक्षाओं का आयोजन हुआ। पहले दिन प्राथमिक विद्यालयों में मौखिक परीक्षाएं ही आयोजित हुईं। दूसरे दिन बुधवार को जब लिखित परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों के पैकेट खोले गए तो ज्यादातर विद्यालयों में नामांकित बच्चों के सापेक्ष प्रश्नपत्र कम मिले। जिला मुख्यालय से कम संख्या में भेजे गए प्रश्नपत्रों को देखते हुए अध्यापकों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखे।
लंभुआ के प्राथमिक विद्यालय दहेव गोपालपट्टी में कक्षा तीन में नामांकित 16 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ छह प्रश्नपत्र मिले। उच्च प्राथमिक विद्यालय लंभुआ प्रथम में कक्षा छह में नामांकित 44 बच्चों के सापेक्ष 26 और कक्षा आठ में 40 बच्चों के सापेक्ष 26 प्रश्नपत्र पाए गये। दूबेपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय नकराही में कक्षा छह में 50 बच्चों के सापेक्ष 40 तथा कक्षा आठ में 44 बच्चों के सापेक्ष 27 प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। लंभुआ के उच्च प्राथमिक विद्यालय करनपुर में कक्षा छह में पंजीकृत 58 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ 26 प्रश्नपत्र भेजे गए थे।
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इसी विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरिया का पूरा में कक्षा सात में पंजीकृत 89 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ नौ और कक्षा आठ में 80 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ आठ प्रश्नपत्र भेजे गए थे। प्राथमिक विद्यालय लंभुआ में कक्षा दो में 55 बच्चों के सापेक्ष 47, कक्षा तीन में 60 बच्चों के सापेक्ष 50, कक्षा चार में 67 बच्चों के सापेक्ष 50 और कक्षा पांच में 49 बच्चों के सापेक्ष 44 प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। प्राथमिक विद्यालय रिखपुर में कक्षा पांच में नामांकित 19 बच्चों के सापेक्ष 10 प्रश्नपत्र भेजे गए थे।
उच्च प्राथमिक विद्यालय मलाकदोषपट्टी में कक्षा छह में पंजीकृत 32 बच्चों के सापेक्ष 10 प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। प्राथमिक विद्यालय खरमझुई में कक्षा तीन में 17 बच्चों के सापेक्ष आठ और कक्षा चार में सात बच्चों के सापेक्ष दो प्रश्नपत्र प्राप्त हुआ। बुधवार को प्राथमिक स्तर पर हिंदी एवं गणित तथा संस्कृत/उर्दू की परीक्षा का जैसे-तैसे आयोजन हुआ। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर हिंदी, विज्ञान तथा संस्कृत/उर्दू की परीक्षाएं कराई गईं।
कुड़वार के परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं अव्यवस्थाओं के बीच चल रही हैं। छात्र संख्या के अनुरूप प्रश्नपत्रों की कमी ज्यादातर विद्यालयों में रही। प्रथम पाली में प्रश्नपत्र देरी से पहुंचे। खंड शिक्षाधिकारी उदय राज मौर्य ने बताया कि छात्र संख्या बढ़ने के कारण प्रश्नपत्रों की कमी की समस्या उत्पन्न हो रही है।
बल्दीराय के परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा के दौरान अव्यवस्था हावी रही। कंपोजिट विद्यालय जरईकलां में आधे विद्यार्थी फर्नीचर पर तो आधे फर्श पर बैठकर परीक्षा देते दिखे। थ्री सीटर बेंच पर चार-चार बच्चों को बैठाकर परीक्षाएं आयोजित कराई गईं। कमोबेश यही हाल अन्य परिषदीय विद्यालयों का भी रहा। तमाम परिषदीय विद्यालयों में प्रश्नपत्रों की कमी का मामला सामने आया है।
यूपी बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षक ड्यूटी के लिए मुक्त किए गए बेसिक शिक्षकों की वजह से वार्षिक परीक्षा में समस्या उत्पन्न हो सकती है। दूबेपुर एवं जयसिंहपुर के कई विद्यालय ऐसे हैं जहां सिर्फ प्रधानाध्यापक ही विद्यालय में बचे हैं। ऐसे में परीक्षाओं का आयोजन कैसे हो पाएगा, यह बड़ा प्रश्न है।
कई विद्यालयों में तो इंचार्ज प्रधानाध्यापक समेत सभी शिक्षक यूपी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी में लगा दिए गए हैं। जयसिंहपुर खंड शिक्षाधिकारी अरविंद बहादुर सिंह ने बताया कि कई विद्यालयों से शिक्षकों की बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के बारे में शिकायतें मिल रही हैं। शिक्षकों के न होने से वार्षिक परीक्षाओं पर असर पड़ना तय है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दीवान सिंह यादव ने बताया कि विद्यालयों में प्रश्नपत्र कम नहीं भेजे गए हैं। जहां पर प्रश्नपत्र कम गये होंगे, उन मामलों को दिखवाया जाएगा। बोर्ड परीक्षा की वजह से शिक्षकों की कमी के बावत उन्होंने कहा कि जहां सिर्फ प्रधानाध्यापक ही बचे हैं, वहां वही वार्षिक परीक्षा संपन्न कराएंगे।
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परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मंगलवार से परीक्षाओं का आयोजन हुआ। पहले दिन प्राथमिक विद्यालयों में मौखिक परीक्षाएं ही आयोजित हुईं। दूसरे दिन बुधवार को जब लिखित परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों के पैकेट खोले गए तो ज्यादातर विद्यालयों में नामांकित बच्चों के सापेक्ष प्रश्नपत्र कम मिले। जिला मुख्यालय से कम संख्या में भेजे गए प्रश्नपत्रों को देखते हुए अध्यापकों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखे।
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लंभुआ के प्राथमिक विद्यालय दहेव गोपालपट्टी में कक्षा तीन में नामांकित 16 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ छह प्रश्नपत्र मिले। उच्च प्राथमिक विद्यालय लंभुआ प्रथम में कक्षा छह में नामांकित 44 बच्चों के सापेक्ष 26 और कक्षा आठ में 40 बच्चों के सापेक्ष 26 प्रश्नपत्र पाए गये। दूबेपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय नकराही में कक्षा छह में 50 बच्चों के सापेक्ष 40 तथा कक्षा आठ में 44 बच्चों के सापेक्ष 27 प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। लंभुआ के उच्च प्राथमिक विद्यालय करनपुर में कक्षा छह में पंजीकृत 58 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ 26 प्रश्नपत्र भेजे गए थे।
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इसी विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरिया का पूरा में कक्षा सात में पंजीकृत 89 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ नौ और कक्षा आठ में 80 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ आठ प्रश्नपत्र भेजे गए थे। प्राथमिक विद्यालय लंभुआ में कक्षा दो में 55 बच्चों के सापेक्ष 47, कक्षा तीन में 60 बच्चों के सापेक्ष 50, कक्षा चार में 67 बच्चों के सापेक्ष 50 और कक्षा पांच में 49 बच्चों के सापेक्ष 44 प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। प्राथमिक विद्यालय रिखपुर में कक्षा पांच में नामांकित 19 बच्चों के सापेक्ष 10 प्रश्नपत्र भेजे गए थे।
उच्च प्राथमिक विद्यालय मलाकदोषपट्टी में कक्षा छह में पंजीकृत 32 बच्चों के सापेक्ष 10 प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। प्राथमिक विद्यालय खरमझुई में कक्षा तीन में 17 बच्चों के सापेक्ष आठ और कक्षा चार में सात बच्चों के सापेक्ष दो प्रश्नपत्र प्राप्त हुआ। बुधवार को प्राथमिक स्तर पर हिंदी एवं गणित तथा संस्कृत/उर्दू की परीक्षा का जैसे-तैसे आयोजन हुआ। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर हिंदी, विज्ञान तथा संस्कृत/उर्दू की परीक्षाएं कराई गईं।
कुड़वार के परिषदीय विद्यालयों में वार्षिक परीक्षाएं अव्यवस्थाओं के बीच चल रही हैं। छात्र संख्या के अनुरूप प्रश्नपत्रों की कमी ज्यादातर विद्यालयों में रही। प्रथम पाली में प्रश्नपत्र देरी से पहुंचे। खंड शिक्षाधिकारी उदय राज मौर्य ने बताया कि छात्र संख्या बढ़ने के कारण प्रश्नपत्रों की कमी की समस्या उत्पन्न हो रही है।
बल्दीराय के परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा के दौरान अव्यवस्था हावी रही। कंपोजिट विद्यालय जरईकलां में आधे विद्यार्थी फर्नीचर पर तो आधे फर्श पर बैठकर परीक्षा देते दिखे। थ्री सीटर बेंच पर चार-चार बच्चों को बैठाकर परीक्षाएं आयोजित कराई गईं। कमोबेश यही हाल अन्य परिषदीय विद्यालयों का भी रहा। तमाम परिषदीय विद्यालयों में प्रश्नपत्रों की कमी का मामला सामने आया है।
यूपी बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षक ड्यूटी के लिए मुक्त किए गए बेसिक शिक्षकों की वजह से वार्षिक परीक्षा में समस्या उत्पन्न हो सकती है। दूबेपुर एवं जयसिंहपुर के कई विद्यालय ऐसे हैं जहां सिर्फ प्रधानाध्यापक ही विद्यालय में बचे हैं। ऐसे में परीक्षाओं का आयोजन कैसे हो पाएगा, यह बड़ा प्रश्न है।
कई विद्यालयों में तो इंचार्ज प्रधानाध्यापक समेत सभी शिक्षक यूपी बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी में लगा दिए गए हैं। जयसिंहपुर खंड शिक्षाधिकारी अरविंद बहादुर सिंह ने बताया कि कई विद्यालयों से शिक्षकों की बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के बारे में शिकायतें मिल रही हैं। शिक्षकों के न होने से वार्षिक परीक्षाओं पर असर पड़ना तय है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दीवान सिंह यादव ने बताया कि विद्यालयों में प्रश्नपत्र कम नहीं भेजे गए हैं। जहां पर प्रश्नपत्र कम गये होंगे, उन मामलों को दिखवाया जाएगा। बोर्ड परीक्षा की वजह से शिक्षकों की कमी के बावत उन्होंने कहा कि जहां सिर्फ प्रधानाध्यापक ही बचे हैं, वहां वही वार्षिक परीक्षा संपन्न कराएंगे।