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खतरे की आहट दे रहीं भवनों पर लगी होर्डिंग्स
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सुल्तानपुर में बस स्टेशन के पास दीवार पर लगी होर्डिंग।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। शहर के व्यस्ततम इलाकों में लगी विशालकाय होर्डिंग्स खतरे का सबब बनी हैं। इस खतरे को लेकर जिला व नगर पालिका प्रशासन बेखबर है। जर्जर इमारतों पर लगी भारी-भरकम होर्डिंग्स कभी भी दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती हैं।
शहर में प्रचार सामग्रियों का टैक्स नगर पालिका वसूल करती है। विज्ञापन प्रचार एजेंसियों ने इसके लिए नगर पालिका से अनुबंध भी कर रखा है। शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों पर गौर किया जाए तो बस स्टेशन के निकट, लखनऊ नाका ओवरब्रिज व कई अन्य स्थलों पर रोज हजारों लोगों का आवागमन होता है। जमीन पर लगी होर्डिंग्स का आंकड़ा तो नगर पालिका के पास हैै लेकिन पुराने मकानों की छतों पर लगी प्रचार सामग्री की कोई जानकारी नहीं है। नगर पालिका के मुताबिक शहर में जमीन पर 11 यूनिपोल व दो टीवी पोल लगे हैं। छतों पर जो होर्डिंग्स लगाई गई हैं, उसका आंकड़ा नगर पालिका के पास नहीं है।
नगर पालिका कर्मियों का कहना है कि शहर में प्रचार व्यवस्था का अनुबंध एक फर्म के साथ किया गया है। उससे शुल्क लिया जाता है। बस स्टेशन के कई पुराने और जर्जर हो चुके मकानों की छतों पर विशालकाय लोहे की होर्डिंग्स लगाकर कंपनियों की प्रचार सामग्रियों को सेट किया जाता है। लखनऊ नाका ओवरब्रिज के निकट स्थित कई भवन स्वामियों ने भी अपनी छतों पर इस प्रकार केे एंगल लगवा रखे हैं। इनका किराया भी भवन स्वामी ले रहे हैं। जर्जर इमारतों पर बगैर सुरक्षा के प्रबंध किए इन लोहे के एंगलों पर प्रचार सामग्रियां लगाना कितना खतरनाक है, इस बात की फिक्र एजेंसी संचालक, नगर पालिका और प्रशासन तक को नहीं है। ये होर्डिेंग्स खराब मौसम में कभी भी धराशाई हो सकती हैं।
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इस मामले में नगर पालिका भवन स्वामियों की स्वैच्छिक अनुमति का जिक्र कर अपना पल्ला झाड़ लेती है। नगर पालिका अध्यक्ष के पति अजय जायसवाल ने बताया कि सड़क की पटरियों पर लगी होर्डिंग्स का शुल्क नगर पालिका लेती है। इसके अलावा टॉवरों का शुल्क लिया जाता है। घरों पर जो लोग व्यक्तिगत रूप से होर्डिंग्स लगवा रहे हैं। इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका की नहीं है।
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शहर में प्रचार सामग्रियों का टैक्स नगर पालिका वसूल करती है। विज्ञापन प्रचार एजेंसियों ने इसके लिए नगर पालिका से अनुबंध भी कर रखा है। शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों पर गौर किया जाए तो बस स्टेशन के निकट, लखनऊ नाका ओवरब्रिज व कई अन्य स्थलों पर रोज हजारों लोगों का आवागमन होता है। जमीन पर लगी होर्डिंग्स का आंकड़ा तो नगर पालिका के पास हैै लेकिन पुराने मकानों की छतों पर लगी प्रचार सामग्री की कोई जानकारी नहीं है। नगर पालिका के मुताबिक शहर में जमीन पर 11 यूनिपोल व दो टीवी पोल लगे हैं। छतों पर जो होर्डिंग्स लगाई गई हैं, उसका आंकड़ा नगर पालिका के पास नहीं है।
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नगर पालिका कर्मियों का कहना है कि शहर में प्रचार व्यवस्था का अनुबंध एक फर्म के साथ किया गया है। उससे शुल्क लिया जाता है। बस स्टेशन के कई पुराने और जर्जर हो चुके मकानों की छतों पर विशालकाय लोहे की होर्डिंग्स लगाकर कंपनियों की प्रचार सामग्रियों को सेट किया जाता है। लखनऊ नाका ओवरब्रिज के निकट स्थित कई भवन स्वामियों ने भी अपनी छतों पर इस प्रकार केे एंगल लगवा रखे हैं। इनका किराया भी भवन स्वामी ले रहे हैं। जर्जर इमारतों पर बगैर सुरक्षा के प्रबंध किए इन लोहे के एंगलों पर प्रचार सामग्रियां लगाना कितना खतरनाक है, इस बात की फिक्र एजेंसी संचालक, नगर पालिका और प्रशासन तक को नहीं है। ये होर्डिेंग्स खराब मौसम में कभी भी धराशाई हो सकती हैं।
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इस मामले में नगर पालिका भवन स्वामियों की स्वैच्छिक अनुमति का जिक्र कर अपना पल्ला झाड़ लेती है। नगर पालिका अध्यक्ष के पति अजय जायसवाल ने बताया कि सड़क की पटरियों पर लगी होर्डिंग्स का शुल्क नगर पालिका लेती है। इसके अलावा टॉवरों का शुल्क लिया जाता है। घरों पर जो लोग व्यक्तिगत रूप से होर्डिंग्स लगवा रहे हैं। इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका की नहीं है।