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सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन के निर्माण में अब बजट का अभाव
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सुल्तानपुर में अधूरा फोरलेन सड़क निर्माण।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। वाराणसी-सुल्तानपुर फोरलेन के बंद निर्माण कार्य के पीछे धनराशि का लफड़ा भी सामने आया है। कार्यदायी संस्था ने धनराशि का अभाव बताते हुए आगे कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जबकि एनएचएआई बिना कार्य पूरा हुए और धनराशि देने को तैयार नहीं है। इधर, बिना धनराशि मिले कार्यदायी संस्था कार्य शुरू करने को तैयार नहीं हो रही है। प्रकरण का निष्कर्ष नहीं निकलने से कार्य बंद चल रहा है।
करीब पांच वर्ष पहले एनएचएआई ने सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू कराया था। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अधिग्रहीत भूमि से निर्माण हटाने में कुछ दिक्कतें आती रहीं। हालांकि एनएचएआई की मांग व प्रकरण के निस्तारण के बाद जिला प्रशासन ने अधिग्रहीत भूमि से निर्माण भी हटाकर जमीन कार्यदायी संस्था को सौंप दी। एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक कार्यदायी संस्था की मांग पर समय-समय पर धनराशि भी आवंटित की जाती रही। अभी तक कार्यदायी संस्था को 1700 करोड़ के सापेक्ष करीब 1300 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी कार्यदायी संस्था ने करीब 75 फीसदी कार्य ही पूरा किया है।
एनएचएआई समेत जिला प्रशासन के बार-बार निर्देश के बाद भी कार्यदायी संस्था की ओर से कार्य सुस्त किया जाता रहा। साथ ही सर्विस रोड के निर्माण में भी लापरवाही बरती गई। सर्विस रोड के घटिया निर्माण से राहगीरों की आवाजाही मुश्किल हो गई। अधिकारियों की रिपोर्ट पर कार्यदायी संस्था गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड को एनएचएआई ने डिबार घोषित कर दिया। डिबार घोषित करने के बाद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य ठप कर दिया। एनएचएआई ने कार्यदायी संस्था को अक्तूबर 2022 तक कार्य पूरा करने का आखिरी मौका दिया।
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इसके बाद भी अभी तक फोरलेन व ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था अब कार्य बंद करने के पीछे धनराशि के अभाव की दिक्कत बता रही है। परियोजना निदेशक के मुताबिक धनराशि का अभाव बताते हुए कार्यदायी संस्था कार्य करने से पीछे हट रही है, जबकि एनएचएआई बिना कार्य पूरा किए कार्यदायी संस्था को अब और धनराशि देने को तैयार नहीं है। इसे लेकर कार्य अटक गया है।
बिना कार्य के नहीं दी जाएगी और धनराशि
एनएचएआई वाराणसी के परियोजना निदेशक आरएस यादव ने बताया कि कार्यदायी संस्था की ओर से धनराशि का अभाव बताया जा रहा है। संस्था को धनराशि का बंदोबस्त करके कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया गया है। अभी तक संस्था को करीब 1300 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। अब बिना कार्य के और धनराशि नहीं दी जाएगी।
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करीब पांच वर्ष पहले एनएचएआई ने सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू कराया था। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद अधिग्रहीत भूमि से निर्माण हटाने में कुछ दिक्कतें आती रहीं। हालांकि एनएचएआई की मांग व प्रकरण के निस्तारण के बाद जिला प्रशासन ने अधिग्रहीत भूमि से निर्माण भी हटाकर जमीन कार्यदायी संस्था को सौंप दी। एनएचएआई के अधिकारियों के मुताबिक कार्यदायी संस्था की मांग पर समय-समय पर धनराशि भी आवंटित की जाती रही। अभी तक कार्यदायी संस्था को 1700 करोड़ के सापेक्ष करीब 1300 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी कार्यदायी संस्था ने करीब 75 फीसदी कार्य ही पूरा किया है।
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एनएचएआई समेत जिला प्रशासन के बार-बार निर्देश के बाद भी कार्यदायी संस्था की ओर से कार्य सुस्त किया जाता रहा। साथ ही सर्विस रोड के निर्माण में भी लापरवाही बरती गई। सर्विस रोड के घटिया निर्माण से राहगीरों की आवाजाही मुश्किल हो गई। अधिकारियों की रिपोर्ट पर कार्यदायी संस्था गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड को एनएचएआई ने डिबार घोषित कर दिया। डिबार घोषित करने के बाद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य ठप कर दिया। एनएचएआई ने कार्यदायी संस्था को अक्तूबर 2022 तक कार्य पूरा करने का आखिरी मौका दिया।
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इसके बाद भी अभी तक फोरलेन व ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। कार्यदायी संस्था अब कार्य बंद करने के पीछे धनराशि के अभाव की दिक्कत बता रही है। परियोजना निदेशक के मुताबिक धनराशि का अभाव बताते हुए कार्यदायी संस्था कार्य करने से पीछे हट रही है, जबकि एनएचएआई बिना कार्य पूरा किए कार्यदायी संस्था को अब और धनराशि देने को तैयार नहीं है। इसे लेकर कार्य अटक गया है।
बिना कार्य के नहीं दी जाएगी और धनराशि
एनएचएआई वाराणसी के परियोजना निदेशक आरएस यादव ने बताया कि कार्यदायी संस्था की ओर से धनराशि का अभाव बताया जा रहा है। संस्था को धनराशि का बंदोबस्त करके कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया गया है। अभी तक संस्था को करीब 1300 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। अब बिना कार्य के और धनराशि नहीं दी जाएगी।