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Sultanpur News: बेटे को संरक्षण में लेने की पिता की याचिका खारिज
Fri, 05 Apr 2024 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 05 Apr 2024 12:43 AM IST
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सुल्तानपुर। नाबालिग बेटे को अपने संरक्षण में लेने के लिए पिता की ओर से दी गई याचिका फैमिली कोर्ट की अपर प्रधान न्यायाधीश तृतीय मधु गुप्ता ने खारिज कर दी। कोर्ट ने नाबालिग को नाना के साथ रहने पर मुहर लगा दी। अदालत ने पिता को शर्तों के साथ बेटे से मिलने की इजाजत दी है।
अधिवक्ता अजीर्जुहमान के मुताबिक कुड़वार थाने के पठखापुर गांव निवासी मो. अहमद की पुत्री अफरोज जहां की शादी 30 मई 2013 को कूरेभार थाने के रतापुर गांव के मो. इरफान के साथ हुई थी। 28 जनवरी 2015 को अफरोज जहां की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
अफरोज जहां के पिता व अन्य मायके वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाया था। अफरोज जहां की मौत के समय उसका बेटा जीशान अहमद करीब 11 माह का था। मां की मौत के बाद जीशान अपने नाना मो. अहमद के साथ रहने लगा था।
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21 जुलाई 2015 को मो. इरफान ने बेटे जीशान को अपने संरक्षण में लेने के लिए कोर्ट में गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट के तहत याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वह जीशान का नैसर्गिक अभिभावक हैं। लिहाजा बेटे को उनके संरक्षण में दिया जाए।
इसका जीशान अहमद के नाना मो. अहमद ने विरोध किया। कहा कि पिता के पास रहने पर जीशान की जान को खतरा है। कोर्ट ने दोनों पक्षाें के साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद आदेश दिया है कि जीशान अहमद अपने नाना के साथ ही रहेगा।
अदालत ने पिता मो. इरफान को आदेश दिया है कि वह बेटे से शर्तों के साथ मिल सकेगा। वह प्रत्येक रविवार को पूर्व सूचना देकर मिल सकता है। इसके अलावा वह फोन से पुत्र से बात भी कर सकेगा और जन्मदिन, त्योहार व परिवार में कोई आयोजन होने पर भी उसे मिलने की इजाजत होगी।
आठ वर्ष चला मुकदमा, छह लोगों ने दी गवाही
नाबालिग के संरक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बीच करीब आठ वर्ष तक कोर्ट में मुकदमेबाजी चली। अधिवक्ता अजीर्जुहमान ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से छह लोगोंं की गवाही दर्ज की गई। याचिकाकर्ता मो. इरफान की ओर से दो लोगों ने गवाही दी जबकि जीशान के नाना ने चार लोगाें की गवाही पेश की थी।
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अधिवक्ता अजीर्जुहमान के मुताबिक कुड़वार थाने के पठखापुर गांव निवासी मो. अहमद की पुत्री अफरोज जहां की शादी 30 मई 2013 को कूरेभार थाने के रतापुर गांव के मो. इरफान के साथ हुई थी। 28 जनवरी 2015 को अफरोज जहां की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
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अफरोज जहां के पिता व अन्य मायके वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाया था। अफरोज जहां की मौत के समय उसका बेटा जीशान अहमद करीब 11 माह का था। मां की मौत के बाद जीशान अपने नाना मो. अहमद के साथ रहने लगा था।
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21 जुलाई 2015 को मो. इरफान ने बेटे जीशान को अपने संरक्षण में लेने के लिए कोर्ट में गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट के तहत याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वह जीशान का नैसर्गिक अभिभावक हैं। लिहाजा बेटे को उनके संरक्षण में दिया जाए।
इसका जीशान अहमद के नाना मो. अहमद ने विरोध किया। कहा कि पिता के पास रहने पर जीशान की जान को खतरा है। कोर्ट ने दोनों पक्षाें के साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद आदेश दिया है कि जीशान अहमद अपने नाना के साथ ही रहेगा।
अदालत ने पिता मो. इरफान को आदेश दिया है कि वह बेटे से शर्तों के साथ मिल सकेगा। वह प्रत्येक रविवार को पूर्व सूचना देकर मिल सकता है। इसके अलावा वह फोन से पुत्र से बात भी कर सकेगा और जन्मदिन, त्योहार व परिवार में कोई आयोजन होने पर भी उसे मिलने की इजाजत होगी।
आठ वर्ष चला मुकदमा, छह लोगों ने दी गवाही
नाबालिग के संरक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बीच करीब आठ वर्ष तक कोर्ट में मुकदमेबाजी चली। अधिवक्ता अजीर्जुहमान ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से छह लोगोंं की गवाही दर्ज की गई। याचिकाकर्ता मो. इरफान की ओर से दो लोगों ने गवाही दी जबकि जीशान के नाना ने चार लोगाें की गवाही पेश की थी।