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ईद-उल-अजहा पर नहीं होगी सामूहिक नमाज
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सुल्तानपुर। ईद-उल-अजहा का त्योहार एक अगस्त को मनाया जाएगा। कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से इस साल मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की सामूहिक नमाज नहीं हो पाएगी। मौलानाओं ने अपने-अपने घरों में शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए नमाज अदा करने की अपील की है।
बकरीद के त्योहार को लेकर कुर्बानी के लिए बकरों की खरीद-फरोख्त का काम शुरू हो गया है। लोग नए कपड़े भी सिलवा रहे हैं। शहर के चौक स्थित जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अब्दुल लतीफ बताते हैं कि ईद-उल-अजहा का त्योहार नबी हजरत इस्माइल की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। हजरत इस्माइल के पिता नबी हजरत इब्राहिम ने ख्वाब में देखा था कि वह अपने बेटे को खुदा की राह में कुर्बान कर रहे हैं।
इसके बाद वह अपने बेटे हजरत इस्माइल को लेकर उनकी कुर्बानी करने के लिए मैदान में गए। अपनी आंख पर पट्टी बांधकर हजरत इस्माइल को जमीन पर लिटा दिया। उसके बाद हजरत इस्माइल की कुर्बानी करने के लिए उनके गले पर छुरी चलाई। खुदा ने हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबा (भेड़) भेज दिया और हजरत इस्माइल की जान बच गई। इसी खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है।
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सार्वजनिक स्थानों पर न करें कुर्बानी
कोरोना महामारी से बचने के लिए हमारी सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उस पर अमल हम सबकी जिम्मेदारी है। ऐसे माहौल में ईद-उल-अजहा में अपने घरों में ही रहकर नमाज अदा करें। फोन से ईद की मुबारकबाद पेश करें। कहीं सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी नहीं होगी।
-हैदर अब्बास खां, अध्यक्ष हुसैनी शिया वेलफेयर एसोसिएशन
घर पर अदा करें नमाज
कोविड-19 की बढ़ती रफ्तार से जिले वासी सशंकित हैं। ऐसे में मस्जिदों में चार-पांच लोग शारीरिक दूरी का पालन करते हुए बकरीद की नमाज अदा करेंगे। इसके अलावा बाकी लोग अपने-अपने घरों में रहते हुए नमाज अदा करें।
-मौलाना अब्दुल लतीफ, पेश इमाम चौक जामा मस्जिद
नहीं होंगे सार्वजनिक आयोजन
सरकारी दिशा-निर्देश के मुताबिक ईद-उल-अजहा की नमाज ईद-उल-फितर की तरह ईदगाहों के बजाय घरों में अदा करें। पाबंदी के अनुसार मस्जिदों में भी पांच से ज्यादा लोग इकट्ठा न हों। कोई भी सार्वजनिक आयोजन नहीं किया जाएगा।
-मौलाना उस्मान कासमी, नाजिम-ए-आला मदरसा जामिया इस्लामिया खैराबाद
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का करें पालन
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करें। कुर्बानी एक मजहबी फरीजा है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार खुले में कुर्बानी न की जाए। बंद जगहों पर पूरी एहतियात के साथ बिना भीड़ जमा कि ए कुर्बानी करें। कुर्बानी की तस्वीर सोशल मीडिया पर हरगिज वायरल न की जाय।
-मौलाना कसीम कासमी, इमाम हबीबिया मस्जिद
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बकरीद के त्योहार को लेकर कुर्बानी के लिए बकरों की खरीद-फरोख्त का काम शुरू हो गया है। लोग नए कपड़े भी सिलवा रहे हैं। शहर के चौक स्थित जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अब्दुल लतीफ बताते हैं कि ईद-उल-अजहा का त्योहार नबी हजरत इस्माइल की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। हजरत इस्माइल के पिता नबी हजरत इब्राहिम ने ख्वाब में देखा था कि वह अपने बेटे को खुदा की राह में कुर्बान कर रहे हैं।
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इसके बाद वह अपने बेटे हजरत इस्माइल को लेकर उनकी कुर्बानी करने के लिए मैदान में गए। अपनी आंख पर पट्टी बांधकर हजरत इस्माइल को जमीन पर लिटा दिया। उसके बाद हजरत इस्माइल की कुर्बानी करने के लिए उनके गले पर छुरी चलाई। खुदा ने हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबा (भेड़) भेज दिया और हजरत इस्माइल की जान बच गई। इसी खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है।
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सार्वजनिक स्थानों पर न करें कुर्बानी
कोरोना महामारी से बचने के लिए हमारी सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उस पर अमल हम सबकी जिम्मेदारी है। ऐसे माहौल में ईद-उल-अजहा में अपने घरों में ही रहकर नमाज अदा करें। फोन से ईद की मुबारकबाद पेश करें। कहीं सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी नहीं होगी।
-हैदर अब्बास खां, अध्यक्ष हुसैनी शिया वेलफेयर एसोसिएशन
घर पर अदा करें नमाज
कोविड-19 की बढ़ती रफ्तार से जिले वासी सशंकित हैं। ऐसे में मस्जिदों में चार-पांच लोग शारीरिक दूरी का पालन करते हुए बकरीद की नमाज अदा करेंगे। इसके अलावा बाकी लोग अपने-अपने घरों में रहते हुए नमाज अदा करें।
-मौलाना अब्दुल लतीफ, पेश इमाम चौक जामा मस्जिद
नहीं होंगे सार्वजनिक आयोजन
सरकारी दिशा-निर्देश के मुताबिक ईद-उल-अजहा की नमाज ईद-उल-फितर की तरह ईदगाहों के बजाय घरों में अदा करें। पाबंदी के अनुसार मस्जिदों में भी पांच से ज्यादा लोग इकट्ठा न हों। कोई भी सार्वजनिक आयोजन नहीं किया जाएगा।
-मौलाना उस्मान कासमी, नाजिम-ए-आला मदरसा जामिया इस्लामिया खैराबाद
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का करें पालन
मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करें। कुर्बानी एक मजहबी फरीजा है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार खुले में कुर्बानी न की जाए। बंद जगहों पर पूरी एहतियात के साथ बिना भीड़ जमा कि ए कुर्बानी करें। कुर्बानी की तस्वीर सोशल मीडिया पर हरगिज वायरल न की जाय।
-मौलाना कसीम कासमी, इमाम हबीबिया मस्जिद