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सूरन-बंडा की खेती से चमकाई तकदीर
Amarujala Bureau
Updated Wed, 28 Jun 2017 10:01 PM IST
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प्रगतिशील किसान हैं अशोक
- फोटो : अमर उजाला
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दृढ़ इच्छा शक्ति और परिश्रम से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पीपी कमैचा ब्लॉक क्षेत्र के शेरपुर परसरामपुर के किसान अशोक कुमार वर्मा ने। उन्होंने सूरन व बंडा की खेती कर अपनी तकदीर संवार ली है। देश-विदेश में अपना उत्पाद बेच कर सुल्तानपुर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। धान के बेहतर उत्पादन के लिए उन्हें 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने कृषि रत्न से सम्मानित किया था।
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प्रतापपुर कमैचा ब्लॉक के शेरपुर परसरामपुर निवासी अशोक कुमार वर्मा सूरन व बंडा की खेती करने वाले जिले के इकलौते बड़े किसान हैं। पिछले 11 साल से वे लगातार सूरन व बंडा की खेती करते चले आ रहे हैं। नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद से सूरन व बंडा का बीज लाकर खेत में बोआई करते हैं। करीब 10 माह में तैयार होने वाली फसल की खोदाई करवाकर बीज उत्पादन के लिए बेच देते हैं।
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2001 से पहले अशोक सिर्फ धान, गेहूं, अरहर, चना, मटर, ज्वार, बाजरा आदि की खेती करते थे। तब उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बाद अशोक ने सब्जी की खेती के हाथ आगे बढ़ाया और अपने भाई शिवकुमार वर्मा के साथ नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद जाकर सूरन व बंडा का बीज खरीदा। केरल, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ के अलावा सूबे के 15 से 20 जिलों में बीज उत्पादन के लिए सूरन व बंडा बेचते हैं। धान उत्पादन के लिए उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2001 में कृषि रत्न से सम्मानित किया था।
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