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गैस सिलेंडर होने के बावजूद चूल्हे पर बनता मिला एमडीएम
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सुल्तानपुर। जिले के 2469 विद्यालयों में मिड डे मील योजना की हकीकत जानने के लिए डीएम ने टीम भेजी तो पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई।
कई विद्यालयों में गैस सिलेंडर होने के बावजूद लकड़ी व कंडे से भोजन बनता मिला। साथ ही कई जगहों पर सोमवार को वितरित होने वाला फल बच्चों को नहीं मिला।
जिले के 1730 परिषदीय प्राथमिक विद्यालय, 612 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 54 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, 66 इंटर कॉलेज व सात मदरसा संचालित हैं जहां मध्याह्न भोजन योजना का लाभ बच्चों को मिलता है।
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी सी. इंदुमती ने एक साथ 292 लोगों को एमडीएम जांच के लिए नामित किया था। इसमें एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी, एडीओ, पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी शामिल थे।
साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सभी खंड शिक्षाधिकारी एवं एबीआरसी भी निरीक्षण में निकले। बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय ने दूबेपुर विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चुनहा का निरीक्षण किया, जहां गैस सिलेंडर होने के बावजूद भी चूल्हे पर एमडीएम पकता हुआ मिला।
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बीएसए ने प्रधानाध्यापक को गैस सिलेंडर पर ही एमडीएम बनवाने का निर्देश दिया। साथ ही एमडीएम समन्वयक से चेतावनी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कुड़वार विकास खंड क्षेत्र के मॉडल स्कूल पूरे लेदई प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया, जहां मेन्यू के मुताबिक सब्जी-रोटी बच्चों को वितरित होती हुई पाई गई। जिले के कई ऐसे विद्यालय भी मिले, जहां पर सोमवार को वितरित होने वाला फल बच्चों को नहीं प्राप्त हुआ।
जांच करने पहुंचे लोगों ने अपनी रिपोर्ट जिला मुख्यालय पर भेजी है। मध्याह्न भोजन योजना के निरीक्षण के लिए मिले प्रपत्र में 28 बिंदुओं पर निरीक्षणकर्ताओं से सूचना मांगी गई थी।
मध्याह्न भोजन योजना का निरीचक्षण करने निकले 292 लोगों में कई ने देर शाम तक अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी थी। एमडीएम के जिला समन्वयक संदीप यादव ने बताया कि 2469 में लगभग 1800 विद्यालयों की जांच रिपोर्ट मिली है।
इसे फीड कराया जा रहा है। बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया कि संकलित जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
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कई विद्यालयों में गैस सिलेंडर होने के बावजूद लकड़ी व कंडे से भोजन बनता मिला। साथ ही कई जगहों पर सोमवार को वितरित होने वाला फल बच्चों को नहीं मिला।
जिले के 1730 परिषदीय प्राथमिक विद्यालय, 612 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 54 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, 66 इंटर कॉलेज व सात मदरसा संचालित हैं जहां मध्याह्न भोजन योजना का लाभ बच्चों को मिलता है।
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी सी. इंदुमती ने एक साथ 292 लोगों को एमडीएम जांच के लिए नामित किया था। इसमें एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी, एडीओ, पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी शामिल थे।
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साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सभी खंड शिक्षाधिकारी एवं एबीआरसी भी निरीक्षण में निकले। बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय ने दूबेपुर विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चुनहा का निरीक्षण किया, जहां गैस सिलेंडर होने के बावजूद भी चूल्हे पर एमडीएम पकता हुआ मिला।
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बीएसए ने प्रधानाध्यापक को गैस सिलेंडर पर ही एमडीएम बनवाने का निर्देश दिया। साथ ही एमडीएम समन्वयक से चेतावनी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कुड़वार विकास खंड क्षेत्र के मॉडल स्कूल पूरे लेदई प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया, जहां मेन्यू के मुताबिक सब्जी-रोटी बच्चों को वितरित होती हुई पाई गई। जिले के कई ऐसे विद्यालय भी मिले, जहां पर सोमवार को वितरित होने वाला फल बच्चों को नहीं प्राप्त हुआ।
जांच करने पहुंचे लोगों ने अपनी रिपोर्ट जिला मुख्यालय पर भेजी है। मध्याह्न भोजन योजना के निरीक्षण के लिए मिले प्रपत्र में 28 बिंदुओं पर निरीक्षणकर्ताओं से सूचना मांगी गई थी।
मध्याह्न भोजन योजना का निरीचक्षण करने निकले 292 लोगों में कई ने देर शाम तक अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी थी। एमडीएम के जिला समन्वयक संदीप यादव ने बताया कि 2469 में लगभग 1800 विद्यालयों की जांच रिपोर्ट मिली है।
इसे फीड कराया जा रहा है। बीएसए संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया कि संकलित जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।