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जिले में बेखौफ चल रहा अवैध खनन का धंधा
सुल्तानपुर
Updated Sun, 11 Sep 2016 12:31 AM IST
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चांदा थाने के शफीपुर गांव मे चल रहा खनन।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में अवैध खनन का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस की संलप्तिता से इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। दिन हो या रात गोमती नदी के तराई इलाकों में खनन माफिया पोकलैंड व जेसीबी की मदद से ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर बालू का अवैध खनन कर करोड़ों रुपये बना रहे हैं।
जिले में मिट्टी का खनन आम बात हो गई है। ग्रामीणों की सूचना के बाद कभी-कभार हरकत में आई पुलिस एक दो ट्रॉलियों को सीज कर कागजी कोरम पूरा कर लेती है लेकिन फिर सब पुराने ढर्रे पर आ जाता है।
अवैध खनन के मामले में ही पूर्व में एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या की जा चुकी है। तब इसकी पुष्टि आईजी जोन लखनऊ ने खुद की थी। उन्होंने इस धंधे में पुलिस की संलिप्तता की बात से भी इंकार नहीं किया था।
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हाईकोर्ट के अवैध खनन पर रोक के बावजूद जिले में कुड़वार, कोतवाली नगर, गोसाईगंज, जयसिंहपुर, लंभुआ, मोतिगरपुर, चांदा, करौंदीकलां समेत करीब 50 ऐसे स्थान हैं, जहां बालू का खनन होता है। खनन माफिया बालू का खनन गोमती नदी के निचले हिस्से में कराते हैं।
बालू के खनन के लिए जीसीबी व पोकलैंड जैसी मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। बालू को ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर लादकर मुख्यालय पर ही बेच लिया जाता है। ग्रामीण कई बार इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से करते हैं, लेकिन कम ही मामलों में कार्रवाई हो पाती है।
कभी-कभार रस्म अदायगी की कार्रवाई कर पुलिस अपना पल्ला झाड़ लेती है। आज तक शायद ही कोई आरोपी पकड़ा गया हो। उच्चाधिकारियों की फटकार के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली जरूर पकड़ ली जाती हैं।
इसी साल पत्रकार तरुण मिश्र की अवैध खनन का विरोध करने पर गोसाईगंज थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का खुलासा खुद आईजी जोन लखनऊ ने किया था। आईजी जोन ने प्रेस कांफ्रेंस में माना था कि अवैध खनन में पुलिस की मिलीभगत होती है।
नोडल अधिकारी/ एडीएम प्रशासन कृष्णलाल तिवारी ने बताया कि जनवरी से अगस्त तक कुल 52 ट्रैक्टर ट्रॉलियों को खनन में लिप्त पाए जाने पर सीज किया गया है। प्रत्येक ट्रैक्टर के खिलाफ 25 हजार रुपये की दर से जुर्माना किया गया है।
जिले में सभी प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी हाल में खनन न होने न पाए।
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जिले में मिट्टी का खनन आम बात हो गई है। ग्रामीणों की सूचना के बाद कभी-कभार हरकत में आई पुलिस एक दो ट्रॉलियों को सीज कर कागजी कोरम पूरा कर लेती है लेकिन फिर सब पुराने ढर्रे पर आ जाता है।
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अवैध खनन के मामले में ही पूर्व में एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या की जा चुकी है। तब इसकी पुष्टि आईजी जोन लखनऊ ने खुद की थी। उन्होंने इस धंधे में पुलिस की संलिप्तता की बात से भी इंकार नहीं किया था।
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हाईकोर्ट के अवैध खनन पर रोक के बावजूद जिले में कुड़वार, कोतवाली नगर, गोसाईगंज, जयसिंहपुर, लंभुआ, मोतिगरपुर, चांदा, करौंदीकलां समेत करीब 50 ऐसे स्थान हैं, जहां बालू का खनन होता है। खनन माफिया बालू का खनन गोमती नदी के निचले हिस्से में कराते हैं।
बालू के खनन के लिए जीसीबी व पोकलैंड जैसी मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। बालू को ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर लादकर मुख्यालय पर ही बेच लिया जाता है। ग्रामीण कई बार इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से करते हैं, लेकिन कम ही मामलों में कार्रवाई हो पाती है।
कभी-कभार रस्म अदायगी की कार्रवाई कर पुलिस अपना पल्ला झाड़ लेती है। आज तक शायद ही कोई आरोपी पकड़ा गया हो। उच्चाधिकारियों की फटकार के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली जरूर पकड़ ली जाती हैं।
इसी साल पत्रकार तरुण मिश्र की अवैध खनन का विरोध करने पर गोसाईगंज थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का खुलासा खुद आईजी जोन लखनऊ ने किया था। आईजी जोन ने प्रेस कांफ्रेंस में माना था कि अवैध खनन में पुलिस की मिलीभगत होती है।
नोडल अधिकारी/ एडीएम प्रशासन कृष्णलाल तिवारी ने बताया कि जनवरी से अगस्त तक कुल 52 ट्रैक्टर ट्रॉलियों को खनन में लिप्त पाए जाने पर सीज किया गया है। प्रत्येक ट्रैक्टर के खिलाफ 25 हजार रुपये की दर से जुर्माना किया गया है।
जिले में सभी प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी हाल में खनन न होने न पाए।