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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Jamil was killed in Rural Politics

सियासी वर्चस्व की जंग में हुई जमील की हत्या

Fri, 11 Sep 2015 10:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर Updated Fri, 11 Sep 2015 10:14 PM IST
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इसौली विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी बेल्ट में पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू और उनके ब्लॉक प्रमुख भाई यशभद्र सिंह मोनू का सिक्का चलता है। हर पंचायत चुनाव में 15 से 20 बीडीसी सदस्य, करीब 5-6 ग्राम प्रधान इनके प्रभाव में निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। मोनू लगातार दो बार धनपतगंज से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। यहां तक कि उनकी चाची अनीता सिंह जिला पंचायत सदस्य तक निर्विरोध हो चुकी हैं।

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कुछ ऐसा ही प्रभाव दक्षिणी क्षेत्र में हत्या के आरोप में जेल में निरुद्ध एक शातिर अपराधी कायम करना चाहता है। पूर्व बीडीसी सदस्य व समाजवादी पार्टी के इसौली के विधानसभा क्षेत्र उपाध्यक्ष जमील अहमद की हत्या में आरोपी फहीम उसका खास है। इन्हें किसी का राजनीतिक संरक्षण तो नहीं प्राप्त है, लेकिन जरायम के दम पर दोनों क्षेत्र में सियासी वर्चस्व की जद्दोजहद में लगे हैं।
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 2007 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों ने चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू का विरोध किया था। हालांकि उस चुनाव में सोनू को जीत मिली थी। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों अपराधियों ने यशभद्र सिंह मोनू का खुला विरोध किया था। चुनाव में मोनू के पराजित होने के बाद इनके हौसले बढ़े। दोनों खुद की सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश में लग गए। जेल में निरुद्ध शातिर अपराधी ने फहीम के जरिए इस कोशिश को अंजाम देना शुरू किया। कोशिश यह थी कि एकाध डीडीसी समेत कुछ बीडीसी और ग्राम प्रधान के पद दहशत के दम पर निर्विरोध करा लिए जाएं। दोनों की इस कोशिश में जमील अहमद रोड़ा बन रहा था, लिहाजा उसकी हत्या कर दी गई।   
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सुल्तानपुर में खेमों में बंटी सपा

सुल्तानपुर। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भले ही 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए लगातार कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को वार्मअप कर रहे हों लेकिन जिले के हालात ठीक नहीं दिख रहे। जिले में समाजवादी पार्टी साफ तौर पर धड़ों में बंटी नजर आ रही है। पदाधिकारी हों या कार्यकर्ता सब किसी न किसी खेमे से जुड़े हैं। कई मौकों पर इनकी दबी-छुपी खेमेबाजी सार्वजनिक भी हो चुकी है। 

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