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प्राइवेट प्रैक्टिस करते मिले तीन चिकित्सक
Updated Sat, 19 Aug 2017 10:47 PM IST
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गौरीगंज। सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पाबंदी के आदेश का असर जिले में दिखने लगा है।
जिले में तैनात चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने की शिकायत पर सीएमओ ने जांच कराई तो तीन चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए।
सीएमओ ने शासन सहित विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर तीनों चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। सीएमओ की कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है।
जिले के विभिन्न अस्पतालों में तैनात तीन आर्थोपेडिक चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस करना भारी पड़ सकता है। योगी सरकार की ओर से सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का आदेश होते ही जिले का स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है।
सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव ने जिले में तैनात सभी चिकित्सकों की जांच कराई तो तीन चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए।
सीएमओ ने बताया कि जांच के दौरान सीएचसी असैदापुर (संयुक्त जिला चिकित्सालय गौरीगंज) में तैनात चिकित्सक मुख्यालय पर निवास नहीं कर रायबरेली स्थित विनायक नर्सिंग होम में प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए।
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सीएचसी मुसाफिरखाना में तैनात चिकित्सक मुसाफिरखाना में ही एक मेडिकल स्टोर पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने व अस्पताल परिसर के बजाय सुल्तानपुर में निवास करने की पुष्टि हुई है।
इसी सीएचसी में तैनात चिकित्सक सुल्तानपुर स्थित एक केंद्र पर प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए। सीएमओ ने तीनों चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर शासन के साथ ही विभाग के उच्चाधिकारियों को साक्ष्य सहित पत्र भेज दिया है।
काम का मांगा ब्यौरा : सीएमओ
सीएमओ आरएम श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों चिकित्सकों को पत्र जारी कर उनसे जुलाई 2016 से जुलाई 2017 तक किए गए इनडोर व शल्य क्रिया का विवरण मांगा गया है।
विवरण से उनको हर माह मिलने वाले वेतन की सार्थकता प्रमाणित हो सकेगी। सीएमओ ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात सभी चिकित्सकों को प्रदेश सरकार की ओर से प्राइवेट प्रैक्टिस निषेध भत्ता भी दिया जाता है।
सभी चिकित्सकों को निभानी होगी जिम्मेदारी
सीएमओ ने कहा कि जिले की सरकारी अस्पतालों में तैनात सभी चिकित्सकों को जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करना होगा।
सभी को तैनाती वाले अस्पताल परिसर में अनिवार्य रूप से निवास करना होगा। परिसर में आवास उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें जिला मुख्यालय पर ही निवास कर ड्यूटी करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में तैनात चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने की शिकायत पर सीएमओ ने जांच कराई तो तीन चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए।
सीएमओ ने शासन सहित विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर तीनों चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। सीएमओ की कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है।
जिले के विभिन्न अस्पतालों में तैनात तीन आर्थोपेडिक चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस करना भारी पड़ सकता है। योगी सरकार की ओर से सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का आदेश होते ही जिले का स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है।
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सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव ने जिले में तैनात सभी चिकित्सकों की जांच कराई तो तीन चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए।
सीएमओ ने बताया कि जांच के दौरान सीएचसी असैदापुर (संयुक्त जिला चिकित्सालय गौरीगंज) में तैनात चिकित्सक मुख्यालय पर निवास नहीं कर रायबरेली स्थित विनायक नर्सिंग होम में प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए।
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सीएचसी मुसाफिरखाना में तैनात चिकित्सक मुसाफिरखाना में ही एक मेडिकल स्टोर पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने व अस्पताल परिसर के बजाय सुल्तानपुर में निवास करने की पुष्टि हुई है।
इसी सीएचसी में तैनात चिकित्सक सुल्तानपुर स्थित एक केंद्र पर प्राइवेट प्रैक्टिस करते पाए गए। सीएमओ ने तीनों चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर शासन के साथ ही विभाग के उच्चाधिकारियों को साक्ष्य सहित पत्र भेज दिया है।
काम का मांगा ब्यौरा : सीएमओ
सीएमओ आरएम श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों चिकित्सकों को पत्र जारी कर उनसे जुलाई 2016 से जुलाई 2017 तक किए गए इनडोर व शल्य क्रिया का विवरण मांगा गया है।
विवरण से उनको हर माह मिलने वाले वेतन की सार्थकता प्रमाणित हो सकेगी। सीएमओ ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में तैनात सभी चिकित्सकों को प्रदेश सरकार की ओर से प्राइवेट प्रैक्टिस निषेध भत्ता भी दिया जाता है।
सभी चिकित्सकों को निभानी होगी जिम्मेदारी
सीएमओ ने कहा कि जिले की सरकारी अस्पतालों में तैनात सभी चिकित्सकों को जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करना होगा।
सभी को तैनाती वाले अस्पताल परिसर में अनिवार्य रूप से निवास करना होगा। परिसर में आवास उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें जिला मुख्यालय पर ही निवास कर ड्यूटी करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।