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Sultanpur News: तराई क्षेत्र में कई गांवाें के संपर्क मार्ग डूबे
Sat, 16 Sep 2023 12:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 16 Sep 2023 12:22 AM IST
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धनपतगंज के नौगवातीर से मायंग को जाने वाली सड़क पानी से डूबी। -संवाद
धनपतगंज (सुल्तानपुर)। गोमती नदी के उफनाने से तराई के कई गांवों के संपर्क मार्ग डूब गए हैं। सौ बीघे से अधिक की फसल जलमग्न होने से पशुओं के चारे का संकट पैदा हो गया है। नदी का जलस्तर 83.130 मिलीमीटर पहुंचने से कई गांव कटान की जद में आ गए हैं। इस वजह से ग्रामीणों के सामने दिक्कतें बढ़ गई हैं।
पिछले दिनों पश्चिमी जिलों में हुई बारिश से उफनाई गोमती नदी विकराल रूप अख्तियार करती जा रही है। नदी का पानी गांवों का रुख कर चुका है। इलाके का प्रमुख मार्ग अमऊ-शंकरगढ़ तकरीबन 300 मीटर और मायंग-नौगवां मार्ग औदहा गांव के पास तकरीबन 400 मीटर दूरी में डूब गया है। सड़क पर पानी भरने से चार चक्का वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। सिर्फ जान जोखिम में डालकर दो पहिया, साइकिल सवार व पैदल ही लोग पानी से निकल रहे हैं।
माधवपुर सोती, पूरेगयादत्त, औदहा, अमऊ, जासरपुर, पूरेशुकलान जैसे दर्जन भर गांवों के लोगोंं को दैनिक जरूरत के लिए शंकरगढ़ और मायंग पहुंचने में पानी के रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। कंपोजिट विद्यालय अमऊ जासरपुर के अध्यापक शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मार्ग पर पानी भरने से प्राइमरी के बच्चों को स्कूल आने में परेशानी हो रही है। छात्र संख्या काफी कम हो गई है।
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पानी में करीब सैकड़ा भर बीघा फसलों के डूबने से चारे की समस्या खड़ी हो गई है। फसल डूबने से उनके नष्ट हो जाने का खतरा बना है। जलस्तर बढ़ने से कोलिया व बगीयवा के ग्रामीणों को कटान की आशंका सताने लगी है। सिहोरिया निवासी रामसनेही, रामशरण संतोष और पूरे शुकलाने निवासी बृजेश शुक्ला, घेर्राऊ शुक्ला व चंद्र प्रकाश ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए इलाके में सरकारी अमला अभी तक अग्रिम राहत व्यवस्था के लिए झांकने नहीं आया है।
एसडीएम को क्षेत्रों में नजर रखने का निर्देश
एसडीएम को संबंधित क्षेत्रों में नजर रखने का निर्देश दिया गया है। नुकसान की खबर मिलने पर संबंधित को सहायता पहुंचाई जाएगी। अभी नदी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे है।
-मनोज पांडेय, जिला दैवी आपदा अधिकारी
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पिछले दिनों पश्चिमी जिलों में हुई बारिश से उफनाई गोमती नदी विकराल रूप अख्तियार करती जा रही है। नदी का पानी गांवों का रुख कर चुका है। इलाके का प्रमुख मार्ग अमऊ-शंकरगढ़ तकरीबन 300 मीटर और मायंग-नौगवां मार्ग औदहा गांव के पास तकरीबन 400 मीटर दूरी में डूब गया है। सड़क पर पानी भरने से चार चक्का वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। सिर्फ जान जोखिम में डालकर दो पहिया, साइकिल सवार व पैदल ही लोग पानी से निकल रहे हैं।
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माधवपुर सोती, पूरेगयादत्त, औदहा, अमऊ, जासरपुर, पूरेशुकलान जैसे दर्जन भर गांवों के लोगोंं को दैनिक जरूरत के लिए शंकरगढ़ और मायंग पहुंचने में पानी के रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। कंपोजिट विद्यालय अमऊ जासरपुर के अध्यापक शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मार्ग पर पानी भरने से प्राइमरी के बच्चों को स्कूल आने में परेशानी हो रही है। छात्र संख्या काफी कम हो गई है।
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पानी में करीब सैकड़ा भर बीघा फसलों के डूबने से चारे की समस्या खड़ी हो गई है। फसल डूबने से उनके नष्ट हो जाने का खतरा बना है। जलस्तर बढ़ने से कोलिया व बगीयवा के ग्रामीणों को कटान की आशंका सताने लगी है। सिहोरिया निवासी रामसनेही, रामशरण संतोष और पूरे शुकलाने निवासी बृजेश शुक्ला, घेर्राऊ शुक्ला व चंद्र प्रकाश ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए इलाके में सरकारी अमला अभी तक अग्रिम राहत व्यवस्था के लिए झांकने नहीं आया है।
एसडीएम को क्षेत्रों में नजर रखने का निर्देश
एसडीएम को संबंधित क्षेत्रों में नजर रखने का निर्देश दिया गया है। नुकसान की खबर मिलने पर संबंधित को सहायता पहुंचाई जाएगी। अभी नदी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे है।
-मनोज पांडेय, जिला दैवी आपदा अधिकारी