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निर्जल व्रत रख दिया डूबते सूर्य को अर्घ्य
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Tue, 17 Nov 2015 10:24 PM IST
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सूर्य उपासना के महापर्व छठ पर मंगलवार को सीताकुंड घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ा। सैकड़ों महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु व परिवार के सुख समृद्धि की कामना के साथ निर्जल व्रत रहकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। दीप-पुष्प व फल लेकर महिलाओं ने सामूहिक रूप से छठ माता की विधिवत पूजा-अर्चना की। बुधवार को उगते सूर्य का पूजन होगा।
मंगलवार को आदि गंगा गोमती स्थित शहर के सीताकुंड घाट पर आस्था व श्रद्घा का सैलाब देखने को मिला। 36 घंटों तक निर्जल उपवास के संकल्प के साथ संतान की लंबी उम्र की कामना को लेकर सैकड़ों महिलाएं गाजे-बाजे के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य देने घाट पर पहुंचीं। परिवारीजन पूजन सामग्रियां लेकर महिलाओं के साथ रहे। रंग-रोगन से निखरा व रोशनी से जगमग सीताकुंड घाट देर शाम निराली छटा बिखेर रहा था। घाट पर बनाई गई वेदियों (पिंडों) पर समूह में महिलाओं ने नियत विधि-विधान से छठ माता की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने छठ माता को गन्ना, फल, फूल व मिष्ठान आदि अर्पित कर पुत्रों के लंबी उम्र की कामना की। कठिन निर्जल व्रत के बावजूद महिलाओं के चेहरों पर श्रद्घा व उत्साह दिखा। कुछ परिवार के पुरुषों ने भी व्रत रखा हुआ था। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मंगलगान करती महिलाएं देर रात घर पहुंचीं।
हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
शहर के सीताकुंड घाट पर पिछले साल से कहीं ज्यादा संख्या में महिलाएं डाला छठ माता की पूजा करने के लिए पहुंची। घाट पर महिलाओं की पूजा अर्चना के लिए सीढ़ी के दोनों तरफ व्यवस्था की गई थी, जहां बैठकर पूजा की गई। रास्ते के दोनों ओर पूजा स्थल के किनारे रस्सी लगाकर बैरिकेडिंग की गई थी। पूजन स्थल पर टेंट लगाकर श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी।
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लुभावने दृश्य की झलक की ललक, आतिशबाजी
गोमती नदी में सूर्यास्त के वक्त अर्घ्य देने का दृश्य काफी लुभावना रहा। जहां एक ओर गोमती नदी की बहती जलधारा में पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना महिलाओं ने सूर्य देव से की, वहीं घाट पर जलते दीपकों की छवि देखने वालों का तांता लगा रहा। बच्चों ने घाट के एक छोर पर जमकर पटाखे छुड़ाए।
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मंगलवार को आदि गंगा गोमती स्थित शहर के सीताकुंड घाट पर आस्था व श्रद्घा का सैलाब देखने को मिला। 36 घंटों तक निर्जल उपवास के संकल्प के साथ संतान की लंबी उम्र की कामना को लेकर सैकड़ों महिलाएं गाजे-बाजे के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य देने घाट पर पहुंचीं। परिवारीजन पूजन सामग्रियां लेकर महिलाओं के साथ रहे। रंग-रोगन से निखरा व रोशनी से जगमग सीताकुंड घाट देर शाम निराली छटा बिखेर रहा था। घाट पर बनाई गई वेदियों (पिंडों) पर समूह में महिलाओं ने नियत विधि-विधान से छठ माता की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने छठ माता को गन्ना, फल, फूल व मिष्ठान आदि अर्पित कर पुत्रों के लंबी उम्र की कामना की। कठिन निर्जल व्रत के बावजूद महिलाओं के चेहरों पर श्रद्घा व उत्साह दिखा। कुछ परिवार के पुरुषों ने भी व्रत रखा हुआ था। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मंगलगान करती महिलाएं देर रात घर पहुंचीं।
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हर साल बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
शहर के सीताकुंड घाट पर पिछले साल से कहीं ज्यादा संख्या में महिलाएं डाला छठ माता की पूजा करने के लिए पहुंची। घाट पर महिलाओं की पूजा अर्चना के लिए सीढ़ी के दोनों तरफ व्यवस्था की गई थी, जहां बैठकर पूजा की गई। रास्ते के दोनों ओर पूजा स्थल के किनारे रस्सी लगाकर बैरिकेडिंग की गई थी। पूजन स्थल पर टेंट लगाकर श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी।
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गोमती नदी में सूर्यास्त के वक्त अर्घ्य देने का दृश्य काफी लुभावना रहा। जहां एक ओर गोमती नदी की बहती जलधारा में पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना महिलाओं ने सूर्य देव से की, वहीं घाट पर जलते दीपकों की छवि देखने वालों का तांता लगा रहा। बच्चों ने घाट के एक छोर पर जमकर पटाखे छुड़ाए।