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चांदा में नहर कटने से 100 बीघे फसल जलमग्न
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चांदा (सुल्तानपुर)। सिंचाई खंड की ओर से संचालित चांदा नहर में बुधवार रात पानी छोड़े जाने के बाद खानपुर गांव के पास कटान हो गई। कटान से बुधवार की पूरी रात व बृहस्पतिवार को दिन भर पानी आसपास के खेतों में बहता रहा। पानी के तेज बहाव से आसपास के 100 बीघे से अधिक फसल जलमग्न हो गई। सूचना के बाद भी सिंचाई खंड के अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में रोष रहा।
सिंचाई खंड के अंतर्गत संचालित चांदा नहर की लंबाई करीब 28 किमी है। यह नहर आसपास के गांवों के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुुख माध्यम है। बुधवार को नहर में पानी छोड़ा गया था। पानी छोड़े जाने के बाद देर रात खानपुर गांव के पास अचानक नहर की पटरी में कटान हो गया। बताया जा रहा है कि कटान स्थल पर सिल्ट सफाई का कार्य नहीं कराया गया था।
बुधवार की पूरी रात नहर का पानी आसपास के खेतों में बहता रहा। पानी का बहाव तेज होने की वजह से आस-पास के खेत जलमग्न हो गए। बृहस्पतिवार की सुबह जब ग्रामीणों को कटान के बारे में पता चला तो वे मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने चांदा रजबहे में खानपुर गांव के पास कटान होने की जानकारी सिंचाई खंड के अधिकारियों को दी।
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सूचना के बाद भी सिंचाई खंड की ओर से पूरे दिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में रोष रहा। पूरे दिन पानी के बहाव से करीब 100 बीघे से अधिक भूमि पर बोई गई गेहूं, मटर, सरसों समेत अन्य फसलें जलमग्न हो गई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विभागीय स्तर पर सिल्ट सफाई का कार्य ठीक ढंग से नहीं कराया गया था।
इसी वजह से कटान हुई है। सूचना के बाद भी सिंचाई खंड के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। किसानों ने स्वयं ही नहर को बांधने का प्रयास किया लेकिन कटान ज्यादा और बहाव तेज होने के कारण सफल नहीं हुए। सिंचाई खंड के अधिकारी दिन भर बहाने बनाते रहे।
इन किसानों के डूबे खेत
चांदा नहर में कटान से खानपुर गांव के नागजेंद्र प्रताप सिंह, राजेंद्र प्रसाद सिंह, रवि सिंह, जयकुमार सिंह, विजय प्रताप सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, राजेंद्र प्रताप सिंह, शीतला प्रसाद सिंह, सीताराम सिंह, अवध बिहारी सिंह, ओमप्रकाश सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, हरिवंश सिंह, रिंटू, लल्लू पंडित, रामजस समेत अन्य किसान प्रभावित हुए हैं।
सिल्ट सफाई के नाम पर हुआ खेल
चांदा नहर में खानपुर गांव के पास बुधवार की रात हुई कटान से सिंचाई खंड के अंतर्गत कराई गई सिल्ट सफाई की पोल खुल गई है। पिछले नवंबर माह में सिंचाई खंड की ओर से लंभुआ विधानसभा क्षेत्र के सभी स्थानों पर नहर की सिल्ट सफाई का दावा किया गया था। इसके लिए विभागीय स्तर पर लाखों रुपये भी खर्च किए गए थे।
स्थानीय किसानों के अनुसार चांदा नहर की लंबाई करीब 28 किमी है। शुरू में करीब 17 किमी नहर में सिल्ट सफाई का कार्य कराया गया था। बाकी नहर की सिल्ट सफाई नहीं कराई गई। इससे पानी छोड़े जाने के बाद नहर की पटरी में कटान हो गई। पिछले साल भी इसी स्थान पर कटान से किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी।
किसी ने काटी नहर की पटरी
सिंचाई खंड के सहायक अभियंता संतोष कुमार ने बताया कि नहर का संचालन जल उपभोक्ता समिति की देखरेख में किया जाता है। नहर की पटरी किसी व्यक्ति ने काटी है। स्वत: नहीं कटी है। कटान स्थल पर एक अवर अभियंता को भेजा गया है। कटान को बंधवाने का कार्य शुरू करवा दिया गया है। जल्द ही कटान स्थल को बंधवा दिया जाएगा।
विलंब से मिली जानकारी: एक्सईएन
सिंचाई खंड के अधिशाषी अभियंता योगेश कुमार ने बताया कि चांदा नहर की कटान की वजह की जानकारी नहीं मिल सकी है। वे आवश्यक कार्य से बाहर हैं। अधिकारियों ने उन्हें काफी विलंब से सूचना दी। वापस लौटने के बाद मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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सिंचाई खंड के अंतर्गत संचालित चांदा नहर की लंबाई करीब 28 किमी है। यह नहर आसपास के गांवों के किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुुख माध्यम है। बुधवार को नहर में पानी छोड़ा गया था। पानी छोड़े जाने के बाद देर रात खानपुर गांव के पास अचानक नहर की पटरी में कटान हो गया। बताया जा रहा है कि कटान स्थल पर सिल्ट सफाई का कार्य नहीं कराया गया था।
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बुधवार की पूरी रात नहर का पानी आसपास के खेतों में बहता रहा। पानी का बहाव तेज होने की वजह से आस-पास के खेत जलमग्न हो गए। बृहस्पतिवार की सुबह जब ग्रामीणों को कटान के बारे में पता चला तो वे मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने चांदा रजबहे में खानपुर गांव के पास कटान होने की जानकारी सिंचाई खंड के अधिकारियों को दी।
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सूचना के बाद भी सिंचाई खंड की ओर से पूरे दिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में रोष रहा। पूरे दिन पानी के बहाव से करीब 100 बीघे से अधिक भूमि पर बोई गई गेहूं, मटर, सरसों समेत अन्य फसलें जलमग्न हो गई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विभागीय स्तर पर सिल्ट सफाई का कार्य ठीक ढंग से नहीं कराया गया था।
इसी वजह से कटान हुई है। सूचना के बाद भी सिंचाई खंड के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। किसानों ने स्वयं ही नहर को बांधने का प्रयास किया लेकिन कटान ज्यादा और बहाव तेज होने के कारण सफल नहीं हुए। सिंचाई खंड के अधिकारी दिन भर बहाने बनाते रहे।
इन किसानों के डूबे खेत
चांदा नहर में कटान से खानपुर गांव के नागजेंद्र प्रताप सिंह, राजेंद्र प्रसाद सिंह, रवि सिंह, जयकुमार सिंह, विजय प्रताप सिंह, सुरेंद्र प्रताप सिंह, राजेंद्र प्रताप सिंह, शीतला प्रसाद सिंह, सीताराम सिंह, अवध बिहारी सिंह, ओमप्रकाश सिंह, ब्रह्मदेव सिंह, हरिवंश सिंह, रिंटू, लल्लू पंडित, रामजस समेत अन्य किसान प्रभावित हुए हैं।
सिल्ट सफाई के नाम पर हुआ खेल
चांदा नहर में खानपुर गांव के पास बुधवार की रात हुई कटान से सिंचाई खंड के अंतर्गत कराई गई सिल्ट सफाई की पोल खुल गई है। पिछले नवंबर माह में सिंचाई खंड की ओर से लंभुआ विधानसभा क्षेत्र के सभी स्थानों पर नहर की सिल्ट सफाई का दावा किया गया था। इसके लिए विभागीय स्तर पर लाखों रुपये भी खर्च किए गए थे।
स्थानीय किसानों के अनुसार चांदा नहर की लंबाई करीब 28 किमी है। शुरू में करीब 17 किमी नहर में सिल्ट सफाई का कार्य कराया गया था। बाकी नहर की सिल्ट सफाई नहीं कराई गई। इससे पानी छोड़े जाने के बाद नहर की पटरी में कटान हो गई। पिछले साल भी इसी स्थान पर कटान से किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी।
किसी ने काटी नहर की पटरी
सिंचाई खंड के सहायक अभियंता संतोष कुमार ने बताया कि नहर का संचालन जल उपभोक्ता समिति की देखरेख में किया जाता है। नहर की पटरी किसी व्यक्ति ने काटी है। स्वत: नहीं कटी है। कटान स्थल पर एक अवर अभियंता को भेजा गया है। कटान को बंधवाने का कार्य शुरू करवा दिया गया है। जल्द ही कटान स्थल को बंधवा दिया जाएगा।
विलंब से मिली जानकारी: एक्सईएन
सिंचाई खंड के अधिशाषी अभियंता योगेश कुमार ने बताया कि चांदा नहर की कटान की वजह की जानकारी नहीं मिल सकी है। वे आवश्यक कार्य से बाहर हैं। अधिकारियों ने उन्हें काफी विलंब से सूचना दी। वापस लौटने के बाद मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।