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नालियों व नालों तक पर खड़ी हो गईं इमारतें
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सुल्तानपुर। शहर में नालियों एवं नालों तक पर बेरोकटोक निर्माण चल रहा है। कार्रवाई नहीं होने से शहरी क्षेत्र में दर्जनों स्थानों पर इमारतें खड़ी हो गई हैं।
सूचनाओं पर विनियमित क्षेत्र सिर्फ नोटिस देकर दायित्वों से इतिश्री कर ले रहा है। धराशायी आदेश अमल में नहीं आने से कब्जे जारी हैं। इसकी वजह से नाले, नालियों तक के अस्तित्व पर संकट आ गया है। स्थिति यह है कि गोमती नदी के किनारे तक पर भवन बन गए हैं।
शहर में बिना मैप स्वीकृति के भी अंधाधुंध निर्माण जारी है। मैप स्वीकृति के अभाव व मैप के खिलाफ निर्माण कराने के लिए शहर में प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। सामने प्लास्टिक लगाकर पीछे निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अधिकारी जानते हुए भी उस तरफ निगाह नहीं डाल रहे हैं।
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शहर में बिना मैप की स्वीकृति व नजूल भूमि में निर्माण समेत अन्य आरोपों में विनियमित क्षेत्र ने अभी तक करीब 800 प्रकरणों में नोटिस जारी की है।
अधिकांश जगहों पर नोटिस जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य तकरीबन पूरा हो गया। नोटिस जारी करने के बाद विनियमित क्षेत्र ने कार्य रोकने के लिए आगे कोई कार्रवाई नहीं की।
अवैध निर्माण समेत अन्य आरोपों में विनियमित क्षेत्र ने सैकड़ा भर से अधिक के खिलाफ धराशायी नोटिस भी जारी की है। महीनों पूर्व जारी नोटिस पर कार्रवाई आज तक अमल में नहीं आई। इसमें अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं।
शहर में प्रयागराज-अयोध्या मार्ग पर एकदम नाली के मुहाने पर पिलर व दीवार खड़ी करके कई भवन बना लिए गए हैं। नाली के किनारे तक रिहाइशी मकान व दुकान बनने से पानी बहने व सफाई में दिक्कत आने लगी है। बारिश के दिनों में दिक्कत बढ़ जा रही है।
शहर के बढ़ैयावीर मोहल्ले से गुजरे नाले पर कब्जा करके मकान बना लिए गए हैं। इसमें कुछ लोगों का मानचित्र भी अधिकारियों ने मंजूर कर दिया है।
रिहाइशी मकान व दुकान बनने से नाले के अस्तित्व पर संकट आ गया है। कुछ जगहों पर लोगों ने नाले पर पटिया रखकर नाले को गायब कर दिया है।
शहर से होकर बहने वाली गोमती नदी के तट पर भी अतिक्रमण जोरों पर है। दर्जनों जगहों पर गोमती नदी के किनारे तक लोगों ने मकान बना लिए हैं। अभी कुछ जगहों पर निर्माण व प्लाटिंग जारी है।
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सूचनाओं पर विनियमित क्षेत्र सिर्फ नोटिस देकर दायित्वों से इतिश्री कर ले रहा है। धराशायी आदेश अमल में नहीं आने से कब्जे जारी हैं। इसकी वजह से नाले, नालियों तक के अस्तित्व पर संकट आ गया है। स्थिति यह है कि गोमती नदी के किनारे तक पर भवन बन गए हैं।
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शहर में बिना मैप स्वीकृति के भी अंधाधुंध निर्माण जारी है। मैप स्वीकृति के अभाव व मैप के खिलाफ निर्माण कराने के लिए शहर में प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है। सामने प्लास्टिक लगाकर पीछे निर्माण कार्य कराया जा रहा है। अधिकारी जानते हुए भी उस तरफ निगाह नहीं डाल रहे हैं।
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शहर में बिना मैप की स्वीकृति व नजूल भूमि में निर्माण समेत अन्य आरोपों में विनियमित क्षेत्र ने अभी तक करीब 800 प्रकरणों में नोटिस जारी की है।
अधिकांश जगहों पर नोटिस जारी होने के बाद भी निर्माण कार्य तकरीबन पूरा हो गया। नोटिस जारी करने के बाद विनियमित क्षेत्र ने कार्य रोकने के लिए आगे कोई कार्रवाई नहीं की।
अवैध निर्माण समेत अन्य आरोपों में विनियमित क्षेत्र ने सैकड़ा भर से अधिक के खिलाफ धराशायी नोटिस भी जारी की है। महीनों पूर्व जारी नोटिस पर कार्रवाई आज तक अमल में नहीं आई। इसमें अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं।
शहर में प्रयागराज-अयोध्या मार्ग पर एकदम नाली के मुहाने पर पिलर व दीवार खड़ी करके कई भवन बना लिए गए हैं। नाली के किनारे तक रिहाइशी मकान व दुकान बनने से पानी बहने व सफाई में दिक्कत आने लगी है। बारिश के दिनों में दिक्कत बढ़ जा रही है।
शहर के बढ़ैयावीर मोहल्ले से गुजरे नाले पर कब्जा करके मकान बना लिए गए हैं। इसमें कुछ लोगों का मानचित्र भी अधिकारियों ने मंजूर कर दिया है।
रिहाइशी मकान व दुकान बनने से नाले के अस्तित्व पर संकट आ गया है। कुछ जगहों पर लोगों ने नाले पर पटिया रखकर नाले को गायब कर दिया है।
शहर से होकर बहने वाली गोमती नदी के तट पर भी अतिक्रमण जोरों पर है। दर्जनों जगहों पर गोमती नदी के किनारे तक लोगों ने मकान बना लिए हैं। अभी कुछ जगहों पर निर्माण व प्लाटिंग जारी है।