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एटीएम खाली, नकदी की मारामारी
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सुल्तानपुर में प्रदर्शन करते बैंक कर्मी।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल का शुक्रवार को जिले में व्यापक असर देखने को मिला। हड़ताल के दूसरे दिन भी बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। शुक्रवार को भी सौ से अधिक बैंक शाखाओं में दिन भर ताले लगे रहे। जमा, निकासी, चेक क्लियरेंस, लोन अप्रूवल जैसे काम प्रभावित हुए। बैंक कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए विरोध जाहिर किया। हड़ताल से दो दिनों में करीब ढाई अरब रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। वहीं दो दिनों की हड़ताल से शहर व ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 60 से अधिक एटीएम शुक्रवार को कैशलेस हो गए। इससे लोगों को रुपये के लिए भटकना पड़ा।
सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर चल रही तैयारियों का विरोध करने के लिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने बृहस्पतिवार से पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था। हड़ताल के आह्वान के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में बैंक कर्मी हड़ताल पर चले गए। इसी क्रम में जिले में भी बृहस्पतिवार से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, बॉब, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया समेत 100 से अधिक शाखाओं में कामकाज बंद कर दिया गया। शुक्रवार को दूसरे दिन भी हड़ताल की वजह से बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। हड़ताल के कारण शाखाओं में जमा और निकासी, चेक निकासी और ऋण मंजूरी जैसी सेवाएं ठप रहीं। इससे खाताधारकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मुरलीनगर के व्यापारी राजाराम ने बताया कि उनका खाता पीएनबी में है। उन्हें सामान मंगाने के लिए धन निकासी करनी थी। दो दिनों की हड़ताल से परेशानी खड़ी हो गई है। केएनआई कस्बा निवासी संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि दो दिनों की बैंक हड़ताल ने समस्या बढ़ा दी है। बैंक कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन बृहस्पतिवार को करीब 120 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ था। वहीं, शुक्रवार को भी हड़ताल की वजह से करीब 130 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ।
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दो दिनों की हड़ताल से करीब ढाई अरब (250 करोड़) रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मचारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष धरना दिया। इसके बाद शहर में जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष आलोक सिंह ने कहा कि बैंकों में निजीकरण की व्यवस्था के खिलाफ बैंक कर्मियों में सरकार के खिलाफ रोष है। उन्होंने बताया कि शनिवार को बैंकों में पूर्व की तरह कामकाज होगा। प्रदर्शन करने वालों में बैंक ऑफ बड़ौदा के आरसी शुक्ला, डीडी तिवारी, अरुण सिंह, सौरभ शुक्ल, रवींद्र वर्मा, आरसी विश्वकर्मा, उपेंद्र सिंह, संजीव यादव, राकेश पाल, अनिल मिश्र, अशोक शुक्ल, पीके खन्ना समेत बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी शामिल रहे।
60 से अधिक एटीएम हुए कैशलेस
सुल्तानपुर। जिले में विभिन्न बैंक शाखाओं के 138 एटीएम हैं। दो दिनों की हड़ताल से शहर व ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 60 से अधिक एटीएम शुक्रवार को कैशलेस हो गए। शहर के बस स्टेशन स्थित इंडियन बैंक, बॉब, एचडीएफसी समेत अन्य एटीएम कैशलेस रहे। खाताधारकों को धन निकासी के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी। शहर के अलावा कूरेभार, कुड़वार, मोतिगरपुर, कादीपुर, अखंडनगर समेत अन्य स्थानों पर स्थापित एटीएम में ताले लटके रहे। ऐसे में धन की निकासी के लिए ग्रामीण क्षेत्र के एटीएम कार्डधारकों को भी काफी भटकना पड़ा। दोस्तपुर कस्बा स्थित पीएनबी के एटीएम में बृहस्पतिवार से ही कैश नहीं था। दोस्तपुर कस्बे के धर्मेंद्र कुमार व जीवेश तिवारी ने बताया कि जरूरत के समय एटीएम में पैसा नहीं मिलता है।
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सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर चल रही तैयारियों का विरोध करने के लिए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) ने बृहस्पतिवार से पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था। हड़ताल के आह्वान के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में बैंक कर्मी हड़ताल पर चले गए। इसी क्रम में जिले में भी बृहस्पतिवार से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, बॉब, पीएनबी, बैंक ऑफ इंडिया समेत 100 से अधिक शाखाओं में कामकाज बंद कर दिया गया। शुक्रवार को दूसरे दिन भी हड़ताल की वजह से बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। हड़ताल के कारण शाखाओं में जमा और निकासी, चेक निकासी और ऋण मंजूरी जैसी सेवाएं ठप रहीं। इससे खाताधारकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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मुरलीनगर के व्यापारी राजाराम ने बताया कि उनका खाता पीएनबी में है। उन्हें सामान मंगाने के लिए धन निकासी करनी थी। दो दिनों की हड़ताल से परेशानी खड़ी हो गई है। केएनआई कस्बा निवासी संतोष कुमार मिश्र ने बताया कि दो दिनों की बैंक हड़ताल ने समस्या बढ़ा दी है। बैंक कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन बृहस्पतिवार को करीब 120 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ था। वहीं, शुक्रवार को भी हड़ताल की वजह से करीब 130 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ।
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दो दिनों की हड़ताल से करीब ढाई अरब (250 करोड़) रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मचारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष धरना दिया। इसके बाद शहर में जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष आलोक सिंह ने कहा कि बैंकों में निजीकरण की व्यवस्था के खिलाफ बैंक कर्मियों में सरकार के खिलाफ रोष है। उन्होंने बताया कि शनिवार को बैंकों में पूर्व की तरह कामकाज होगा। प्रदर्शन करने वालों में बैंक ऑफ बड़ौदा के आरसी शुक्ला, डीडी तिवारी, अरुण सिंह, सौरभ शुक्ल, रवींद्र वर्मा, आरसी विश्वकर्मा, उपेंद्र सिंह, संजीव यादव, राकेश पाल, अनिल मिश्र, अशोक शुक्ल, पीके खन्ना समेत बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी शामिल रहे।
60 से अधिक एटीएम हुए कैशलेस
सुल्तानपुर। जिले में विभिन्न बैंक शाखाओं के 138 एटीएम हैं। दो दिनों की हड़ताल से शहर व ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 60 से अधिक एटीएम शुक्रवार को कैशलेस हो गए। शहर के बस स्टेशन स्थित इंडियन बैंक, बॉब, एचडीएफसी समेत अन्य एटीएम कैशलेस रहे। खाताधारकों को धन निकासी के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी। शहर के अलावा कूरेभार, कुड़वार, मोतिगरपुर, कादीपुर, अखंडनगर समेत अन्य स्थानों पर स्थापित एटीएम में ताले लटके रहे। ऐसे में धन की निकासी के लिए ग्रामीण क्षेत्र के एटीएम कार्डधारकों को भी काफी भटकना पड़ा। दोस्तपुर कस्बा स्थित पीएनबी के एटीएम में बृहस्पतिवार से ही कैश नहीं था। दोस्तपुर कस्बे के धर्मेंद्र कुमार व जीवेश तिवारी ने बताया कि जरूरत के समय एटीएम में पैसा नहीं मिलता है।