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Sultanpur News: अखिलेश वर्मा हत्याकांड में सगे भाई सहित पांच को उम्रकैद
Wed, 07 Oct 2026 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:48 PM IST
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. सजा सुनाने के बाद दोषियों को कोर्ट से बाहर ले जाती पुलिस। स्रोत-सोशल मीडिया
सुल्तानपुर। मकान पर कब्जे के विवाद में 15 साल पूर्व गल्ला व्यवसायी अखिलेश वर्मा की हुई हत्या के मामले में एडीजे तृतीय की अदालत ने सात दिन पूर्व दोषी ठहराए गए अभियुक्तों की सजा पर बुधवार को फैसला सुनाया। सेशन जज श्याम मोहन जायसवाल की अदालत ने दोषी सगे भाई दीपक वर्मा, प्रदीप वर्मा और ओमप्रकाश, उनके पुत्र उमेश कुमार व छोटेलाल निषाद को उम्रकैद व कुल 5.60 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदंड की धनराशि का 80 प्रतिशत पीड़ित पक्ष को दिए जाने का आदेश पारित किया है।
दोस्तपुर थाने के देवरी गांव निवासी वादी मुकदमा अनिल वर्मा ने 24 जुलाई 2011 की घटना बताते हुए अखंडनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके आरोप के मुताबिक उनकी बहन नीलम का विवाह अंबेडकरनगर जिले के अकबरपुर के रसूलपुर निवासी अखिलेश वर्मा से हुआ था। वादी के मुताबिक उनके जीजा व बहन नीलम वर्मा अखंडनगर थाने के डोमापुर में मकान बनवाकर रहते थे। वह गल्ला खरीदने-बेचने का काम करते थे। वादी के मुताबिक उनके मकान के बारे में डोमापुर के ही रहने वाले राजमणि पक्ष से विवाद चल रहा था। वादी के आरोप के मुताबिक आरोपियों ने उनके जीजा का मकान कब्जा कर लिया था। इसके संबंध में उन्होंने वादी के घर आकर 24 जुलाई 2011 को जानकारी दी थी। वादी के मुताबिक उसी शाम को शाहपुर निवासी आरोपी छोटेलाल केवट ने उनके जीजा अखिलेश को फोन करके बुलाया था। वहां से उनके जीजा गड़ौरा चले गए थे, लेकिन वह वापस नहीं लौटे थे।
दूसरे दिन सुबह गड़ौरा में अखिलेश घायल अवस्था में मिले थे। आरोप है कि हमले की वजह से उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने राजमणि वर्मा, उनके पुत्र दीपक वर्मा, प्रदीप वर्मा, सह आरोपी ओमप्रकाश, उनके पुत्र उमेश, बृजेश व छोटेलाल निषाद एवं एक बाल अपचारी के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था।
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ट्रायल के दौरान राजमणि की हो गई मौत
ट्रायल के दौरान आरोपी राजमणि की मृत्यु हो चुकी है, जबकि पांच अभियुक्तों के खिलाफ ट्रायल पूरा हुआ। एडीजीसी क्रिमिनल संदीप सिंह ने बताया कि मृत्यु के पूर्व अखिलेश वर्मा ने अभियुक्तों के खिलाफ बयान दिया था, जो केस को साबित करने में कारगर रहा। अदालत ने 30 सितंबर को अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उनकी सजा पर सुनवाई के लिए पहले पांच अक्तूबर की तारीख तय की थी। फिलहाल उस दिन फैसला टल गया था। बुधवार को मामले में दोषियों की सजा पर कोर्ट का फैसला आया।
कोर्ट के फैसले पर मृतक की पत्नी ने जताया संतोष
सुल्तानपुर। गल्ला व्यवसायी अखिलेश वर्मा की पत्नी नीलम वर्मा बुधवार को कोर्ट का फैसला आने के दौरान अदालत में मौजूद रही। दोषियों की सजा पर फैसला आने के बाद उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद आज उनके पति के दोषियों को उनकी करनी की असल सजा मिली है। बताया कि जिस समय उनके पति की हत्या हुई थी उस समय उनकी पुत्री अनुपम वर्मा लगभग तीन साल व पुत्र अमन वर्मा मात्र दो साल का था। उन्होंने पति की मृत्यु के बाद मायके वालों के सहयोग से अपने बच्चों की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ काफी संघर्षमय तरीके से केस की पैरवी की।
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दोस्तपुर थाने के देवरी गांव निवासी वादी मुकदमा अनिल वर्मा ने 24 जुलाई 2011 की घटना बताते हुए अखंडनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके आरोप के मुताबिक उनकी बहन नीलम का विवाह अंबेडकरनगर जिले के अकबरपुर के रसूलपुर निवासी अखिलेश वर्मा से हुआ था। वादी के मुताबिक उनके जीजा व बहन नीलम वर्मा अखंडनगर थाने के डोमापुर में मकान बनवाकर रहते थे। वह गल्ला खरीदने-बेचने का काम करते थे। वादी के मुताबिक उनके मकान के बारे में डोमापुर के ही रहने वाले राजमणि पक्ष से विवाद चल रहा था। वादी के आरोप के मुताबिक आरोपियों ने उनके जीजा का मकान कब्जा कर लिया था। इसके संबंध में उन्होंने वादी के घर आकर 24 जुलाई 2011 को जानकारी दी थी। वादी के मुताबिक उसी शाम को शाहपुर निवासी आरोपी छोटेलाल केवट ने उनके जीजा अखिलेश को फोन करके बुलाया था। वहां से उनके जीजा गड़ौरा चले गए थे, लेकिन वह वापस नहीं लौटे थे।
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दूसरे दिन सुबह गड़ौरा में अखिलेश घायल अवस्था में मिले थे। आरोप है कि हमले की वजह से उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने राजमणि वर्मा, उनके पुत्र दीपक वर्मा, प्रदीप वर्मा, सह आरोपी ओमप्रकाश, उनके पुत्र उमेश, बृजेश व छोटेलाल निषाद एवं एक बाल अपचारी के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था।
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ट्रायल के दौरान राजमणि की हो गई मौत
ट्रायल के दौरान आरोपी राजमणि की मृत्यु हो चुकी है, जबकि पांच अभियुक्तों के खिलाफ ट्रायल पूरा हुआ। एडीजीसी क्रिमिनल संदीप सिंह ने बताया कि मृत्यु के पूर्व अखिलेश वर्मा ने अभियुक्तों के खिलाफ बयान दिया था, जो केस को साबित करने में कारगर रहा। अदालत ने 30 सितंबर को अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उनकी सजा पर सुनवाई के लिए पहले पांच अक्तूबर की तारीख तय की थी। फिलहाल उस दिन फैसला टल गया था। बुधवार को मामले में दोषियों की सजा पर कोर्ट का फैसला आया।
कोर्ट के फैसले पर मृतक की पत्नी ने जताया संतोष
सुल्तानपुर। गल्ला व्यवसायी अखिलेश वर्मा की पत्नी नीलम वर्मा बुधवार को कोर्ट का फैसला आने के दौरान अदालत में मौजूद रही। दोषियों की सजा पर फैसला आने के बाद उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद आज उनके पति के दोषियों को उनकी करनी की असल सजा मिली है। बताया कि जिस समय उनके पति की हत्या हुई थी उस समय उनकी पुत्री अनुपम वर्मा लगभग तीन साल व पुत्र अमन वर्मा मात्र दो साल का था। उन्होंने पति की मृत्यु के बाद मायके वालों के सहयोग से अपने बच्चों की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ काफी संघर्षमय तरीके से केस की पैरवी की।