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Sultanpur News: प्राचार्य पर मेहरबानी से सुल्तानपुर की उम्मीदों को झटका
Tue, 09 Jul 2024 04:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 09 Jul 2024 04:06 AM IST
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सुल्तानपुर। पिछले साल जहां भवन न बन पाने के कारण सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया जा सका था। वहीं, इस वर्ष नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने मानक पूरे न होने पर मान्यता देने से इन्कार कर दिया है। इससे इस साल भी यहां पढ़ाई नहीं हो सकेगी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह शासन में बैठे अफसरों की प्राचार्य पर खास मेहरबानी रही, जिसमें उन्हें स्थानीय होने के बावजूद प्राचार्य बना दिया गया और फिर दो-दो मेडिकल कॉलेज का चार्ज भी सौंप दिया गया।
नेशनल मेडिकल काउंसिल के मानकों के अनुसार 100 सीट के एमबीबीएस कॉलेज के लिए 1200 पदों पर भर्ती होना जरूरी था। किंतु सुल्तानपुर में अभी केवल 636 पद ही भरे गए हैं। अभी 564 पद भरने बाकी हैं। इसके अलावा एनएमसी टीम को 24 जून के अपने विजिट में यहां अनेक खामियां मिली थीं, जिसमें मेडिकल कॉलेज के भवन का अधूरा रहना, प्रैक्टिकल लैब और लेक्चर रूम का काम भी अधूरा रहना शामिल था। भवन को लेकर भी एनएमसी की टीम ने आपत्ति जताई थी और सुधार करने के निर्देश दिए थे।
किंतु एक हफ्ते बाद जब वर्चुअल विजिट की गई तो उसमें भी यह काम अधूरे पाए गए। शासन ने सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य जिन डॉ. सलिल श्रीवास्तव को बनाया है, वह सुल्तानपुर के ही स्थानीय निवासी हैं और उनकी पत्नी अपना अस्पताल भी चलाती हैं। यह भी एनएमसी के मानक के विपरीत पाया गया। इसके अलावा प्राचार्य को शासन ने प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज का चार्ज भी दे रखा है। यह भी मानक के विपरीत मिला।
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हालांकि 15 दिन के भीतर दोबारा सुधार करके आवेदन करने का मौका मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास है। किंतु इतने कम समय में यह सारी खामियां दूर कर पाना संभव नजर नहीं आ रहा है। इन सब विषयों पर प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव से बात करने का प्रयास किया गया, किंतु लखनऊ में होने के कारण उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उन्हें मैसेज भेजकर भी इन बिंदुओं पर मेडिकल कॉलेज का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, किंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
एक समय में चार मेडिकल कॉलेजों का जिम्मा
प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव के पास फिलहाल भी दो मेडिकल कॉलेज का चार्ज है। कुछ समय पहले तो शासन ने उन्हें चार-चार मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसलिए वे सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज को बहुत कम समय दे पाते थे। अधिकांश चीजों के अधूरा रह जाने के पीछे भी उनकी इसी व्यस्तता को जिम्मेदार माना जा रहा है।
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नेशनल मेडिकल काउंसिल के मानकों के अनुसार 100 सीट के एमबीबीएस कॉलेज के लिए 1200 पदों पर भर्ती होना जरूरी था। किंतु सुल्तानपुर में अभी केवल 636 पद ही भरे गए हैं। अभी 564 पद भरने बाकी हैं। इसके अलावा एनएमसी टीम को 24 जून के अपने विजिट में यहां अनेक खामियां मिली थीं, जिसमें मेडिकल कॉलेज के भवन का अधूरा रहना, प्रैक्टिकल लैब और लेक्चर रूम का काम भी अधूरा रहना शामिल था। भवन को लेकर भी एनएमसी की टीम ने आपत्ति जताई थी और सुधार करने के निर्देश दिए थे।
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किंतु एक हफ्ते बाद जब वर्चुअल विजिट की गई तो उसमें भी यह काम अधूरे पाए गए। शासन ने सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य जिन डॉ. सलिल श्रीवास्तव को बनाया है, वह सुल्तानपुर के ही स्थानीय निवासी हैं और उनकी पत्नी अपना अस्पताल भी चलाती हैं। यह भी एनएमसी के मानक के विपरीत पाया गया। इसके अलावा प्राचार्य को शासन ने प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज का चार्ज भी दे रखा है। यह भी मानक के विपरीत मिला।
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हालांकि 15 दिन के भीतर दोबारा सुधार करके आवेदन करने का मौका मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास है। किंतु इतने कम समय में यह सारी खामियां दूर कर पाना संभव नजर नहीं आ रहा है। इन सब विषयों पर प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव से बात करने का प्रयास किया गया, किंतु लखनऊ में होने के कारण उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उन्हें मैसेज भेजकर भी इन बिंदुओं पर मेडिकल कॉलेज का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, किंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
एक समय में चार मेडिकल कॉलेजों का जिम्मा
प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव के पास फिलहाल भी दो मेडिकल कॉलेज का चार्ज है। कुछ समय पहले तो शासन ने उन्हें चार-चार मेडिकल कॉलेजों की जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसलिए वे सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज को बहुत कम समय दे पाते थे। अधिकांश चीजों के अधूरा रह जाने के पीछे भी उनकी इसी व्यस्तता को जिम्मेदार माना जा रहा है।