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491 अनुदेशकों के मानदेय से कट गया
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सुल्तानपुर। प्रदेश सरकार जिले के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 491 अनुदेशकों को करारा झटका दिया है। अनुदेशकों के मानदेय से करीब 80 लाख रुपये काट लिए गए हैं।
मार्च से लेकर मई 2019 तक तीन माह के मानदेय में 21 हजार रुपये की जगह मात्र 4830 रुपये ही अनुदेशकों के खाते में गए हैं। मानदेय काटे जाने से अनुदेशकों में रोष है।
जिले के 612 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में लगभग 500 अनुदेशक कार्यरत हैं। पहले इन अनुदेशकों को 8470 रुपये मानदेय मिलता था। बाद में सरकार ने मानदेय घटाकर सात हजार रुपये कर दिया।
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पिछले दिनों शासन ने मार्च 2018 से अनुदेशकों के मानदेय को सात हजार रुपये कर दिया है। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने मार्च 2018 के बाद अर्जित 8470 रुपये में से 1470 रुपये की दर से रिकवरी कर मानदेय भेजने का निर्देश दिया था।
शासन के निर्देश पर बीएसए ने मार्च 2018 से फरवरी 2019 तक 11 माह का 1470 की दर से प्रत्येक अनुदेशक के मानदेय से 16,170 रुपये काट लिया। अनुदेशकों को तीन माह का मानदेय 21 हजार रुपये मिलना था।
इसमें से 16,170 रुपये काटकर 4830 रुपये खाते में भेजा गया है। 491 अनुदेशकों का 23 लाख 71 हजार 530 रुपये मानदेय एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया गया है।
जिले के 1735 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 1855 शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये की दर से दो माह का मानदेय उनके खातों में भेजा गया है। भेजे गए मानदेय की कुल धनराशि तीन करोड़ 70 लाख 51 हजार 160 रुपये है। गौरतलब है कि शिक्षा मित्रों को अप्रैल व मई माह का मानदेय नहीं मिला था।
मानदेय काटे जाने के विरोध में अनुदेशक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आशुतोष यादव ने कहा कि हम लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।
अनुदेशकों को चार माह से फूटी कौड़ी नहीं मिली थी। अब जब मानदेय भेजा गया है तो हर अनुदेशक के 16,170 रुपये काट लिए गए हैं। अनुदेशक संघ इस पर विरोध जताएगा।
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मार्च से लेकर मई 2019 तक तीन माह के मानदेय में 21 हजार रुपये की जगह मात्र 4830 रुपये ही अनुदेशकों के खाते में गए हैं। मानदेय काटे जाने से अनुदेशकों में रोष है।
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जिले के 612 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में लगभग 500 अनुदेशक कार्यरत हैं। पहले इन अनुदेशकों को 8470 रुपये मानदेय मिलता था। बाद में सरकार ने मानदेय घटाकर सात हजार रुपये कर दिया।
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पिछले दिनों शासन ने मार्च 2018 से अनुदेशकों के मानदेय को सात हजार रुपये कर दिया है। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने मार्च 2018 के बाद अर्जित 8470 रुपये में से 1470 रुपये की दर से रिकवरी कर मानदेय भेजने का निर्देश दिया था।
शासन के निर्देश पर बीएसए ने मार्च 2018 से फरवरी 2019 तक 11 माह का 1470 की दर से प्रत्येक अनुदेशक के मानदेय से 16,170 रुपये काट लिया। अनुदेशकों को तीन माह का मानदेय 21 हजार रुपये मिलना था।
इसमें से 16,170 रुपये काटकर 4830 रुपये खाते में भेजा गया है। 491 अनुदेशकों का 23 लाख 71 हजार 530 रुपये मानदेय एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर कर दिया गया है।
जिले के 1735 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 1855 शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये की दर से दो माह का मानदेय उनके खातों में भेजा गया है। भेजे गए मानदेय की कुल धनराशि तीन करोड़ 70 लाख 51 हजार 160 रुपये है। गौरतलब है कि शिक्षा मित्रों को अप्रैल व मई माह का मानदेय नहीं मिला था।
मानदेय काटे जाने के विरोध में अनुदेशक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आशुतोष यादव ने कहा कि हम लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।
अनुदेशकों को चार माह से फूटी कौड़ी नहीं मिली थी। अब जब मानदेय भेजा गया है तो हर अनुदेशक के 16,170 रुपये काट लिए गए हैं। अनुदेशक संघ इस पर विरोध जताएगा।