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Sultanpur News: सिराज पर 25 हजार का इनाम, एसटीएफ को कमान
Thu, 10 Aug 2023 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 10 Aug 2023 12:32 AM IST
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सुल्तानपुर। अधिवक्ता आजाद अहमद की हत्या करके फरार चल रहा मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर सिराज अहमद पर पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अब यूपी एसटीएफ ने भी सिराज को दबोचने की कमान संभाल ली है। लगातार बढ़ते दबाव के बीच शासन भी पल-पल इस हत्याकांड की रिपोर्ट ले रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही सिराज और उसके साथी कानून के शिकंजे में आ जाएंगे।
कोतवाली देहात क्षेत्र के भुलकी चौराहे पर सरेआम अधिवक्ता आजाद अहमद और उनके भाई मुन्नवर को गोलियां बरसाने का मुख्य आरोपी सिराज अहमद पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जबकि इसे लेकर तीन दिन से अधिवक्ता कार्य बहिष्कार किए हुए हैं। अधिवक्ता इस घटना को लेकर बेहद आंदोलित हैं। एसओजी समेत छह टीमें उसकी तलाश में लगी हैं।
यह देखते हुए अब यूपी एसटीएफ ने भी मोर्चा संभाल लिया है। एसटीएफ के अधिकारी सुल्तानपुर शहर में देखे गए हैं। पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा कहते हैं कि एसटीएफ अलग विंग है, इसलिए उसकी सक्रियता की जानकारी उन्हें नहीं है। किंतु यूपी एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। एसटीएफ के कमान थामने के बाद अब माना जा रहा है कि सिराज कानून के शिकंजे से बहुत दूर नहीं रह पाएगा।
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पुलिस टीम से सिराज की दोस्ती पर उठे सवाल, जांच की मांग
25 हजार का इनामी बदमाश बने सिराज के जुर्म की दुनिया एक दिन में आबाद नहीं हुई। इसे लंबा अरसा लगा और इस दौरान उसे जहां राजनीतिक संरक्षण मिला। वहीं पुलिस के साथ भी उसकी दोस्ती के किस्से अनजाने नहीं हैं। बुधवार को बार एसोसिएशन की बैठक में कई अधिवक्ताओं ने खुलेआम पुलिस अधिकारियों के नाम ले लेकर बताया कि उनके साथ सिराज के मधुर संबंध रहे हैं। कुछ एक नाम तो ऐसे भी चर्चा में हैं, जो सिराज की तलाश में भी लगे हैं।
बैठक में युवा अधिवक्ताओं ने दो इंस्पेक्टरों को सिराज का बेहद करीबी बताया। कहा कि इन दोनों के साथ वह तस्वीरें भी खिंचवाता रहता था। यही वजह थी कि वह आसानी से अपनी कुर्क की गई करोड़ों की संपत्तियों को मुक्त कराने में कामयाब रहा। अधिवक्ताओं में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि यदि यह अधिकारी उसे अपने करीब न बैठाते तो शायद वह ऐसा दुस्साहसी कदम न उठा पाता। एक हिस्ट्रीशीटर के साथ पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के रिश्तों की जांच की मांग अधिवक्ताओं ने की।
इसके बाद जब जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया तो उसमें भी यह बिंदु प्रमुखता से रखा गया कि अपराधियों के साथ संलिप्त अधिकारियों कर्मचारियों को भी जांच के बाद दंडित किया जाए। इस बारे में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि अधिवक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए थे। इसलिए ज्ञापन में जांच कराने और उसके बाद कार्रवाई की मांग की गई है।
सत्तारूढ़ दल के एक नेता का भी करीबी
सुल्तानपुर। इनामी बदमाश सिराज अहमद यूं तो सपा के नेताओं से करीबी रिश्ता बनाकर रखता था। लेकिन सत्तारूढ़ दल में भी उसके बेहद करीबी हैं। एक नेता के लिए तो कुछ साल पहले विवाद में भी हिस्सा लिया था। जिसको लेकर खासी चर्चा रही थी। चर्चा है कि इस नेता के जरिए भी वह अफसरों की करीबी हासिल करता था। ऐसे में यदि पुलिस से उनके गठजोड़ की जांच हुई तो यह चेहरा भी सामने आ सकता है।
पूर्व ज्येष्ठ ब्लाॅक प्रमुख को मिला सुरक्षा घेरा
सुल्तानपुर। सिराज के गांव के ही निवासी पूर्व ज्येष्ठ ब्लाॅक प्रमुख जावेद अहमद इस प्रकरण के बाद से सुरक्षा घेरे में हैं। वे लगातार सिराज के गैरकानूनी कामों और प्राॅपर्टी के अवैध धंधे का विरोध करते रहे हैं। जावेद अहमद ने सिराज पर सरकारी जमीन कब्जा करने का मुकदमा भी दर्ज करवाया है। इस बारे में सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि सिराज से दुश्मनी के कारण ही जावेद अहमद को सुरक्षा प्रदान की गई है।
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कोतवाली देहात क्षेत्र के भुलकी चौराहे पर सरेआम अधिवक्ता आजाद अहमद और उनके भाई मुन्नवर को गोलियां बरसाने का मुख्य आरोपी सिराज अहमद पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जबकि इसे लेकर तीन दिन से अधिवक्ता कार्य बहिष्कार किए हुए हैं। अधिवक्ता इस घटना को लेकर बेहद आंदोलित हैं। एसओजी समेत छह टीमें उसकी तलाश में लगी हैं।
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यह देखते हुए अब यूपी एसटीएफ ने भी मोर्चा संभाल लिया है। एसटीएफ के अधिकारी सुल्तानपुर शहर में देखे गए हैं। पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा कहते हैं कि एसटीएफ अलग विंग है, इसलिए उसकी सक्रियता की जानकारी उन्हें नहीं है। किंतु यूपी एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। एसटीएफ के कमान थामने के बाद अब माना जा रहा है कि सिराज कानून के शिकंजे से बहुत दूर नहीं रह पाएगा।
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पुलिस टीम से सिराज की दोस्ती पर उठे सवाल, जांच की मांग
25 हजार का इनामी बदमाश बने सिराज के जुर्म की दुनिया एक दिन में आबाद नहीं हुई। इसे लंबा अरसा लगा और इस दौरान उसे जहां राजनीतिक संरक्षण मिला। वहीं पुलिस के साथ भी उसकी दोस्ती के किस्से अनजाने नहीं हैं। बुधवार को बार एसोसिएशन की बैठक में कई अधिवक्ताओं ने खुलेआम पुलिस अधिकारियों के नाम ले लेकर बताया कि उनके साथ सिराज के मधुर संबंध रहे हैं। कुछ एक नाम तो ऐसे भी चर्चा में हैं, जो सिराज की तलाश में भी लगे हैं।
बैठक में युवा अधिवक्ताओं ने दो इंस्पेक्टरों को सिराज का बेहद करीबी बताया। कहा कि इन दोनों के साथ वह तस्वीरें भी खिंचवाता रहता था। यही वजह थी कि वह आसानी से अपनी कुर्क की गई करोड़ों की संपत्तियों को मुक्त कराने में कामयाब रहा। अधिवक्ताओं में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि यदि यह अधिकारी उसे अपने करीब न बैठाते तो शायद वह ऐसा दुस्साहसी कदम न उठा पाता। एक हिस्ट्रीशीटर के साथ पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के रिश्तों की जांच की मांग अधिवक्ताओं ने की।
इसके बाद जब जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया तो उसमें भी यह बिंदु प्रमुखता से रखा गया कि अपराधियों के साथ संलिप्त अधिकारियों कर्मचारियों को भी जांच के बाद दंडित किया जाए। इस बारे में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि अधिवक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए थे। इसलिए ज्ञापन में जांच कराने और उसके बाद कार्रवाई की मांग की गई है।
सत्तारूढ़ दल के एक नेता का भी करीबी
सुल्तानपुर। इनामी बदमाश सिराज अहमद यूं तो सपा के नेताओं से करीबी रिश्ता बनाकर रखता था। लेकिन सत्तारूढ़ दल में भी उसके बेहद करीबी हैं। एक नेता के लिए तो कुछ साल पहले विवाद में भी हिस्सा लिया था। जिसको लेकर खासी चर्चा रही थी। चर्चा है कि इस नेता के जरिए भी वह अफसरों की करीबी हासिल करता था। ऐसे में यदि पुलिस से उनके गठजोड़ की जांच हुई तो यह चेहरा भी सामने आ सकता है।
पूर्व ज्येष्ठ ब्लाॅक प्रमुख को मिला सुरक्षा घेरा
सुल्तानपुर। सिराज के गांव के ही निवासी पूर्व ज्येष्ठ ब्लाॅक प्रमुख जावेद अहमद इस प्रकरण के बाद से सुरक्षा घेरे में हैं। वे लगातार सिराज के गैरकानूनी कामों और प्राॅपर्टी के अवैध धंधे का विरोध करते रहे हैं। जावेद अहमद ने सिराज पर सरकारी जमीन कब्जा करने का मुकदमा भी दर्ज करवाया है। इस बारे में सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि सिराज से दुश्मनी के कारण ही जावेद अहमद को सुरक्षा प्रदान की गई है।