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एडवाइजरी-1
Updated Thu, 27 Jul 2017 10:31 PM IST
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हर महीने मिल रहे हेपेटाइटिस के आठ नए मरीज
रोग को लेकर संजीदा नहीं स्वास्थ्य महकमा
जागरूकता के नाम पर जिले में कोई व्यवस्था नहीं
फोटो संख्या-17,18,19
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। हेपेटाइटिस को लेकर स्वास्थ्य महकमा संजीदा नहीं है। हर महीने इस रोग के आठ नए केस आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। जागरूकता के लिए चलाए जा रहे अभियान नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिले में सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक हेपेटाइटिस का टीका उपलब्ध है, लेकिन जिला महिला अस्पताल में वैक्सीन ही नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक और पैथालॉजी में होने वाली जांच को आधार मानें तो छह माह में चार हजार आठ सौ लोगों की हुई जांच में करीब 50 लोग हेपेटाइटिस से पीड़ित मिले हैं। ये आंकड़ा तब है जब जिले में हेपेटाइटिस ए, ई और डी की जांच नहीं हो पाती। ये तीनों जांचें लखनऊ में अथवा जिले के प्राइवेट पैथालॉजी में होती हैं।
क्या है हेपेटाइटिस ए व ई
फोटो संख्या-13
सुल्तानपुर। जिला महिला अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. आनंद सिंह कहते हैं के हेपेटाइटिस ए व ई ये वायरस दूषित खाद्य व पेय पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचता है। इस प्रकार के हेपेटाइटिस के मामले गर्मी व बरसात के मौसम में ज्यादा सामने आते हैं क्योंकि इन मौसम में पेयजल और पेय पदार्थ दूषित हो जाते हैं।
क्या है हेपेटाइटिस बी व सी
फोटो संख्या-14
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल के सीएमएस/ सर्जन डॉ. वीबी सिंह बताते हैं कि इन दोनों प्रकार के हेपेटाइटिस को पैदा करने वाले वायरस दूषित इंजेक्शन के लगने, सर्जरी से संबंधित अस्वच्छ उपकरणों, सुई और ब्लेड के इस्तेमाल के जरिए हेपेटाइटिस से ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। जांच किए बगैर रक्त के चढ़ाने से भी कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित हो सकता है। नवजात शिशु की मां से भी हेपेटाइटिस बी का वायरस शिशु को संक्रमित कर सकता है, बशर्ते कि बच्चे की मां हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त हो।
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हेपेटाइटिस के लक्षण
1. भूख न लगना, जी मचलाना, उल्टी होना, पीलिया (जांडिस) होना, बुखार आना, रोग की गंभीर स्थिति में सूजन होना और पेट में तरल पदार्थ का संचित होना, रोग की अत्यंत गंभीर स्थिति में कुछ रोगियों के मुंह या नाक से खून की उल्टी हो सकती है।
हेपेटाइटिस ए व ई का उपचार
1. हेपेटाइटिस ए व ई और एल्कोहोलिक हेपेटाइटिस के लिए कोई विशिष्ट दवाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ मरीज के लक्षणों और उसके रोग की गंभीरता के अनुसार किया जाता है।
हेपेटाइटिस बी व सी का उपचार
1. हेपेटाइटिस बी के लिए खाने वाली एंटी वायरल दवाएं-जैसे टेनोफोविर और एंटिकाविर (ब्रांड नेम नहीं) आदि उपलब्ध हैं। इन दवाओं को चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों को लेना चाहिए। हेपेटाइटिस सी के लिए कई कारगर एंटी वायरल दवाएं उपलब्ध हैं। ये दवाएं हेपेटाइटिस सी के वायरस को खत्म कर देती हैं।
इस तरह होती जांच
फोटो संख्या-15
सुल्तानपुर। सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी बताते हैं कि लीवर फंक्शन टेस्ट, वायरस टेस्टिंग और अल्ट्रासाउंड से किया जाता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन, सीटी स्कैन और एंडोस्कोपी की जरूरत पड़ सकती हैं। हेपेटाइटिस की जांचें जिला अस्पताल की पैथालॉजी और सीएचसी पर की जाती है।
ठेले पर बिकने वाले खाने से बचें
फोटो संख्या-16
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल के चिकित्सक/ ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अमित सिंह बताते हैं कि हेपेटाइटिस ए और ई से बचाव संभव है। इसके लिए व्यक्तिगत व सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता रखें, अस्वच्छ व दूषित पानी न पीएं। सड़कों पर लगे असुरक्षित फूड स्टॉलों पर कुछ भी खाने से बचें। इसके साथ ही हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए टीका (वैक्सीन) भी उपलब्ध है। इस वैक्सीन को लगवाने के बाद कभी भी हेपेटाइटिस नहीं हो सकता है। हेपेटाइटिस ई की वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं है। हेपेटाइटिस डी का अभी तक कोई तोड़ नहीं निकल सका है।
इनसेट
वैक्सीन को लेकर डॉक्टरों के अलग बयान
जिला महिला अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. आनंद सिंह बताते हैं कि जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं को दी जाने वाली हेपेटाइटिस बी की खुराक काफी दिनों से खत्म है। दूसरी तरफ सीएमओ डॉ. चंद्रभूषणनाथ त्रिपाठी ने बताया कि जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और सभी सीएचसी पर पर्याप्त मात्रा में हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन उपलब्ध है।
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रोग को लेकर संजीदा नहीं स्वास्थ्य महकमा
जागरूकता के नाम पर जिले में कोई व्यवस्था नहीं
फोटो संख्या-17,18,19
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। हेपेटाइटिस को लेकर स्वास्थ्य महकमा संजीदा नहीं है। हर महीने इस रोग के आठ नए केस आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। जागरूकता के लिए चलाए जा रहे अभियान नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिले में सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक हेपेटाइटिस का टीका उपलब्ध है, लेकिन जिला महिला अस्पताल में वैक्सीन ही नहीं है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक और पैथालॉजी में होने वाली जांच को आधार मानें तो छह माह में चार हजार आठ सौ लोगों की हुई जांच में करीब 50 लोग हेपेटाइटिस से पीड़ित मिले हैं। ये आंकड़ा तब है जब जिले में हेपेटाइटिस ए, ई और डी की जांच नहीं हो पाती। ये तीनों जांचें लखनऊ में अथवा जिले के प्राइवेट पैथालॉजी में होती हैं।
क्या है हेपेटाइटिस ए व ई
फोटो संख्या-13
सुल्तानपुर। जिला महिला अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. आनंद सिंह कहते हैं के हेपेटाइटिस ए व ई ये वायरस दूषित खाद्य व पेय पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचता है। इस प्रकार के हेपेटाइटिस के मामले गर्मी व बरसात के मौसम में ज्यादा सामने आते हैं क्योंकि इन मौसम में पेयजल और पेय पदार्थ दूषित हो जाते हैं।
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क्या है हेपेटाइटिस बी व सी
फोटो संख्या-14
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल के सीएमएस/ सर्जन डॉ. वीबी सिंह बताते हैं कि इन दोनों प्रकार के हेपेटाइटिस को पैदा करने वाले वायरस दूषित इंजेक्शन के लगने, सर्जरी से संबंधित अस्वच्छ उपकरणों, सुई और ब्लेड के इस्तेमाल के जरिए हेपेटाइटिस से ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। जांच किए बगैर रक्त के चढ़ाने से भी कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित हो सकता है। नवजात शिशु की मां से भी हेपेटाइटिस बी का वायरस शिशु को संक्रमित कर सकता है, बशर्ते कि बच्चे की मां हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त हो।
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हेपेटाइटिस के लक्षण
1. भूख न लगना, जी मचलाना, उल्टी होना, पीलिया (जांडिस) होना, बुखार आना, रोग की गंभीर स्थिति में सूजन होना और पेट में तरल पदार्थ का संचित होना, रोग की अत्यंत गंभीर स्थिति में कुछ रोगियों के मुंह या नाक से खून की उल्टी हो सकती है।
हेपेटाइटिस ए व ई का उपचार
1. हेपेटाइटिस ए व ई और एल्कोहोलिक हेपेटाइटिस के लिए कोई विशिष्ट दवाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ मरीज के लक्षणों और उसके रोग की गंभीरता के अनुसार किया जाता है।
हेपेटाइटिस बी व सी का उपचार
1. हेपेटाइटिस बी के लिए खाने वाली एंटी वायरल दवाएं-जैसे टेनोफोविर और एंटिकाविर (ब्रांड नेम नहीं) आदि उपलब्ध हैं। इन दवाओं को चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों को लेना चाहिए। हेपेटाइटिस सी के लिए कई कारगर एंटी वायरल दवाएं उपलब्ध हैं। ये दवाएं हेपेटाइटिस सी के वायरस को खत्म कर देती हैं।
इस तरह होती जांच
फोटो संख्या-15
सुल्तानपुर। सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी बताते हैं कि लीवर फंक्शन टेस्ट, वायरस टेस्टिंग और अल्ट्रासाउंड से किया जाता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर फाइब्रोस्कैन, सीटी स्कैन और एंडोस्कोपी की जरूरत पड़ सकती हैं। हेपेटाइटिस की जांचें जिला अस्पताल की पैथालॉजी और सीएचसी पर की जाती है।
ठेले पर बिकने वाले खाने से बचें
फोटो संख्या-16
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल के चिकित्सक/ ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अमित सिंह बताते हैं कि हेपेटाइटिस ए और ई से बचाव संभव है। इसके लिए व्यक्तिगत व सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता रखें, अस्वच्छ व दूषित पानी न पीएं। सड़कों पर लगे असुरक्षित फूड स्टॉलों पर कुछ भी खाने से बचें। इसके साथ ही हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए टीका (वैक्सीन) भी उपलब्ध है। इस वैक्सीन को लगवाने के बाद कभी भी हेपेटाइटिस नहीं हो सकता है। हेपेटाइटिस ई की वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं है। हेपेटाइटिस डी का अभी तक कोई तोड़ नहीं निकल सका है।
इनसेट
वैक्सीन को लेकर डॉक्टरों के अलग बयान
जिला महिला अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. आनंद सिंह बताते हैं कि जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं को दी जाने वाली हेपेटाइटिस बी की खुराक काफी दिनों से खत्म है। दूसरी तरफ सीएमओ डॉ. चंद्रभूषणनाथ त्रिपाठी ने बताया कि जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल और सभी सीएचसी पर पर्याप्त मात्रा में हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन उपलब्ध है।