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अखिलेश को इस्तीफा भेजने वाले विधायक बर्खास्त
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2013 08:13 AM IST
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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने औरैया के विधूना से विधायक प्रमोद गुप्ता को सपा से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
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गुप्ता ने बृहस्पतिवार को अपने क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा भेज दिया था।
पार्टी ने उनके इस्तीफा को संज्ञान में न लेकर शुकवार की शाम उन्हें दल से निष्कासित करने का ऐलान कर दिया। मुलायम सिंह के रिश्तेदार होने के बावजूद पार्टी से उनकी बर्खास्तगी को काफी गंभीर और कठोर फैसला माना जा रहा है।
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पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रमोद गुप्ता उर्फ एलएस को पार्टी विरोधी कार्यों में लिप्त होने के कारण सपा से छह साल के लिए बरखास्त कर दिया गया है।
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भले ही पार्टी प्रवक्ता चौधरी गुप्ता के निष्कासन की वजह अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियां बता रहे हों। पर, मामला सिर्फ इतना भर ही नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, विधूना संसदीय सीट कन्नौज का हिस्सा है। कन्नौज से पहले खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सांसद रहे हैं। अब उनकी पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं।
इसके चलते पार्टी के भीतर कन्नौज और विधूना को लेकर खींचतान सी रहती है। बताया जाता है कि विधूना के थानाध्यक्ष प्रवेश राणा को लेकर भी कन्नौज बनाम विधूना खींचतान चल रही थी।
इसी खींचतान में थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया। विधायक प्रमोद ने इसे अपनी तौहीन माना और उन्होंने इस फैसले का विरोध किया। इसी पर रार बढ़ गई।
इलाके में चल रही चर्चा को सच मानें तो गुप्ता अपने मनपसंद अधिकारियों को विधूना व औरैया में तैनात कराना चाहते थे। उनको लेकर नेतृत्व को लगातार तमाम शिकायतें मिल रही थीं।
यह शिकायतें भी आ रही थीं कि वे प्रशासन के सामान्य कामकाज में हस्तक्षेप करते हैं। बताया जाता है कि सपा नेतृत्व विधायक प्रमोद गुप्ता को लेकर काफी पहले से क्षुब्ध था।
राजधानी के एक स्थानीय निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले प्रमोद के पुत्र ने अपनी शिक्षिका से दुर्व्यवहार किया था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विधानसभा तक में इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ी थी।
असंबद्ध सदस्य के रूप में बैठेंगे विधानसभा में
पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद प्रमोद गुप्ता असंबद्ध सदस्य के रूप में विधानसभा में बैठेंगे। इस बीच अगर उन्होंने दलबदल कर लिया अथवा विधानपरिषद या राज्यसभा के चुनाव में पार्टी की व्हिप के खिलाफ मतदान कर दिया तो उनकी विधानसभा सदस्यता भी जा सकती है।