{"_id":"67d2fdcc9326185c3301fd0a","slug":"water-and-air-quality-is-deteriorating-in-sonbhadra-singrauli-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-125552-2025-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: सोनभद्र-सिंगरौली में जल और वायु की गुणवत्ता हो रही खराब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: सोनभद्र-सिंगरौली में जल और वायु की गुणवत्ता हो रही खराब
विज्ञापन
सोनभद्र-सिंगरौली परिक्षेत्र में जल और वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र की प्रमुख जल धाराएं रिहंद जलाशय, बलियानाला और सोन नदी प्रदूषण की चपेट में हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार जलस्रोतों में फ्लोराइड, नाइट्रेट और पारा की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई है। इससे क्षेत्रीय जल जीवन मिशन योजना पर भी संकट मंडराने लगा है। सोन नदी में प्रदूषण का स्तर अधिक होने का एक प्रमुख कारण चकाड़ी क्षेत्र में खुलेआम रेणुका नदी में राख बहाया जाना माना जा रहा है। रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को लेकर भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।
क्षेत्र में पीएम 10 और पीएम 5 कणों की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई है, जिससे सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षेत्र में संचालित उद्योगों की निगरानी बढ़ाने और अति-प्रदूषित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के लगभग 300 गांवों में स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 1692 लोग गंभीर श्वसन संक्रमण से पीड़ित पाए गए।
विज्ञापन
इसके अलावा, फेफड़ों के संक्रमण और फ्लोरोसिस के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। एम्स भोपाल और आईआईटी कानपुर को इस क्षेत्र की वायु और जल गुणवत्ता का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट में बलियानाला के पानी को ट्रीट करने के बाद ही जलाशय में छोड़ने की सिफारिश की गई है। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्त निगरानी रखने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
जांच रिपोर्ट के अनुसार जलस्रोतों में फ्लोराइड, नाइट्रेट और पारा की मात्रा मानकों से अधिक पाई गई है। इससे क्षेत्रीय जल जीवन मिशन योजना पर भी संकट मंडराने लगा है। सोन नदी में प्रदूषण का स्तर अधिक होने का एक प्रमुख कारण चकाड़ी क्षेत्र में खुलेआम रेणुका नदी में राख बहाया जाना माना जा रहा है। रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को लेकर भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।
विज्ञापन
क्षेत्र में पीएम 10 और पीएम 5 कणों की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई है, जिससे सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षेत्र में संचालित उद्योगों की निगरानी बढ़ाने और अति-प्रदूषित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के लगभग 300 गांवों में स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें 1692 लोग गंभीर श्वसन संक्रमण से पीड़ित पाए गए।
विज्ञापन
इसके अलावा, फेफड़ों के संक्रमण और फ्लोरोसिस के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। एम्स भोपाल और आईआईटी कानपुर को इस क्षेत्र की वायु और जल गुणवत्ता का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट में बलियानाला के पानी को ट्रीट करने के बाद ही जलाशय में छोड़ने की सिफारिश की गई है। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्त निगरानी रखने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।