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100 नंबर की भी की जाएगी निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो/ सोनभद्र
Updated Tue, 04 Oct 2016 10:48 PM IST
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100 नंबर
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सुरक्षा दुरुस्त करने के लिए जनपद में 100 नंबर को चलन में लाया जा रहा है। 100 नंबर पर शिकायत पर डायल 100 की टीम कुछ ही छड़ में वारदात स्थल पर होगी। ऐसे में डायल 100 को हर समय सेवा में रहने और टीम पर नजर रखने के लिए भी एक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। लखनऊ में बैठे पुलिस अधिकारी जीपीएस के जरिए जिले में संचालित होने जा रहे 100 नंबर के 55 वाहनों की निगरानी करेंगे। प्रत्येक वाहनों में जीपीएस लगाया जा रहा है, ताकि पुलिसकर्मी अपने उच्चाधिकारियों से झूठी रिपोर्टिंग न कर सकें। चुर्क स्थित पुलिस लाइन में 100 नंबर के लिए करीब 272 पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा हैै।
बतादेें कि सूबे के डीजीपी के निर्देश पर 26 सितंबर से पुलिस लाइन चुर्क में सौ नंबर के लिए चयनित हेड कांस्टेबल और कांस्टेबलों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें पुलिस कर्मियों को बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने पर घटनास्थल पर पहुंच कर वे लोग वहां मौजूद लोगों से कैसे व्यवहार करें, अपराधियों को पकडने में क्या-क्या सावधानियां बरते और मामला गंभीर होने पर उच्चाधिकारियों को घटंना से अवगत कराएं। इसके अलावा घायलों का प्राथमिक इलाज करने के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
क्योंकि जिले के लिए आवांटित सौ नंबर के 55 वाहनों में घायलों का प्रथम उपचार करने के लिए पट्टी, मलहम आदि दवाइयां होंगी। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक लल्लन सिंह ने कहा कि सौ नंबर वाहनों में जीपीएस लगाए जा रहे हैै। लखनऊ समेत अन्य शहरों से कभी भी उच्चाधिकारी किन प्वाइंट पर वाहन खडे है इसकी जानकारी लेंगे। गलत लोकेशन बताने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर शहरी क्षेत्र में 15 मिनट के भीतर और ग्रामीण इलाकों में 20 मिनट में सौ नंबर के वाहनों से फोर्स पहुंचेगी। प्रत्येक वाहन में दंगानिरोधी उपकरण के साथ दो हेड कांस्टेबल और उतने ही सिपाही तैनात रहेंगे।
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बतादेें कि सूबे के डीजीपी के निर्देश पर 26 सितंबर से पुलिस लाइन चुर्क में सौ नंबर के लिए चयनित हेड कांस्टेबल और कांस्टेबलों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें पुलिस कर्मियों को बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने पर घटनास्थल पर पहुंच कर वे लोग वहां मौजूद लोगों से कैसे व्यवहार करें, अपराधियों को पकडने में क्या-क्या सावधानियां बरते और मामला गंभीर होने पर उच्चाधिकारियों को घटंना से अवगत कराएं। इसके अलावा घायलों का प्राथमिक इलाज करने के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
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क्योंकि जिले के लिए आवांटित सौ नंबर के 55 वाहनों में घायलों का प्रथम उपचार करने के लिए पट्टी, मलहम आदि दवाइयां होंगी। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक लल्लन सिंह ने कहा कि सौ नंबर वाहनों में जीपीएस लगाए जा रहे हैै। लखनऊ समेत अन्य शहरों से कभी भी उच्चाधिकारी किन प्वाइंट पर वाहन खडे है इसकी जानकारी लेंगे। गलत लोकेशन बताने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर शहरी क्षेत्र में 15 मिनट के भीतर और ग्रामीण इलाकों में 20 मिनट में सौ नंबर के वाहनों से फोर्स पहुंचेगी। प्रत्येक वाहन में दंगानिरोधी उपकरण के साथ दो हेड कांस्टेबल और उतने ही सिपाही तैनात रहेंगे।
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