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अनूठी रामलीला: मंच पर एक साथ होती हैं कई पीढ़ियां, दादा बनते परशुराम तो पोता लक्ष्मण की भूमिका में

Sun, 08 Oct 2023 02:12 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 08 Oct 2023 02:12 PM IST
सार

वक्त के साथ भूमिकाएं बदली, नहीं बदले तो रामलीला के कलाकार। हम बात कर रहे हैं सोनभद्र जिले के दुद्धी की अनूठी रामलीला की।  यहां कोई 50 तो कोई 65 साल से अभिनय कर रहा है। 

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Unique Ramlila Many generations come together on stage Parashuram role by grandfather while grandson in role o
दुद्धी की रामलीला के मंच पर एक साथ होती हैं कई पीढ़ियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोनभद्र जिले के दुद्धी नगर की रामलीला का इतिहास काफी पुराना है। सिंगरौली स्टेट के समय से यहां रामलीला का मंचन होता आ रहा है, जो आज भी कायम है। पहले इसे नगर के सेठ-आढ़ती मिलकर कराते थे, मगर अब यह जन सामान्य के सहयोग से रामलीला होती है। खास बात यह कि इस लीला का मंचन स्थानीय लोग ही करते हैं। कई कलाकार दशकों से इस रामलीला से जुड़े हैं तो किसी की तीसरी-चौथी पीढ़ी मंचन में लगी है। बस वक्त के साथ उनकी भूमिकाएं बदलती रही हैं। साल भर वह कहीं रहे, लेकिन रामलीला के लिए दुद्धी जरूर आते हैं।

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रामलीला मंडली के मैनेजर कमलेश कमल खुद करीब 48 सालों से कैकेयी, सुलोचना, जनक, दशरथ, साधु रावण जैसे अलग-अलग किरदार में अभिनय करते रहे हैं। उनके परिवार के नवयुवक भी विभिन्न भूमिकाओं में रामलीला से जुड़े हैं। देवेंद्र मिश्र करीब 65 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं। उन्होंने बचपन में सबसे पहले शत्रुघ्न की भूमिका निभाई।
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50 वर्षों से शूर्पणखा और ताड़का की भूमिका में हरिहर प्रसाद

इसके बाद उम्र बढ़ने के साथ वह भरत, लक्ष्मण, राम, मेघनाथ, परशुराम, अहिरावण और रावण के रोल में भी मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। उनके परिवार की चार पीढ़ी कुछ वर्षों पहले तक एक साथ मंच पर अभिनय करती रही है। चाचा स्व. प्रेमचंद मिश्र रामलीला में व्यास की भूमिका निभाते थे। वहीं देवेंद्र मिश्र रावण और परशुराम की भूमिका में थे। पुत्र नित्यानंद मिश्रा मेघनाथ और पोता लक्ष्मण के किरदार में रहे हैं।

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इसी तरह हरिहर प्रसाद भी 50 वर्षों से शूर्पणखा, ताड़का की भूमिका निभाते रहे हैं। नीरज अग्रहरि ने इंद्र, बाणासुर, बाली तो धनौरा के मनोज पांडेय 14 वर्षों तक राम का अभिनय करते रहे हैं। वहीं पवन सिंह 15 वर्षों से लगातार रावण का किरदार निभा रहे हैं। ईश्वरीय मिश्रा 60 वर्षों से वशिष्ठ, विश्वामित्र जैसे किरदारों में रहते हैं। इस बार रामलीला 14 अक्तूबर को मुकूट पूजा के साथ आरंभ होगी।

250 साल पुरानी है रामलीला

यूपी-एमपी के सीमावर्ती क्षेत्र में सिंगरौली स्टेट का प्रभाव रहा है। वहीं के राजा ने काशी की तर्ज पर यहां रामलीला की शुरुआत कराई थी। सिंगरौली में मुकूट पूजा के साथ रामलीला आरंभ होती थी। रिहंद बांध के निर्माण के दौरान सिंगरौली स्टेट डूब क्षेत्र में समा गया। इसके बाद रामलीला भी दुद्धी नगर में पहुंच गई।

ज्यादातर कलाकार दुद्धी के ही थे, लिहाजा उन्होंने अपने नगर में रामलीला शुरू किया, जो आज भी जारी है। देवेंद्र मिश्र बताते हैं कि कलाकाराें की प्रतिभा को देखते हुए सिंगरौली स्टेट के राजा ने रामलीला के लिए मुकूट प्रदान किया था। आज भी यह मुकूट मौजूद है, लेकिन अब इसे कोई पहन नहीं पाता। इसका वजन काफी ज्यादा है।

रास नहीं आते बाहरी कलाकार

रामलीला कमेटी के मैनेजर कमलेश कमल के मुताबिक बीच में कई बार ऐसी स्थिति भी बनी कि लीला मंचन के लिए बाहर की मंडली को बुलाना पड़ा, लेकिन उनका अभिनय दर्शकों को रास ही नहीं आया। नतीजा मंडली के साथ स्थानीय कलाकाराें ने लगकर रामलीला को पूरा कराया। धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, नक्कटैया, लक्ष्मण शक्ति और राज्याभिषेक के दिन भीड़ उमड़ती है।

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