अनूठी रामलीला: सोमभद्र में सीता स्वयंवर के मंच से संवर रही गरीब बेटियों की जिंदगी, अब तक 87 की शादी
सोनभद्र जिले में रामलीला की अनूठी परंपरा निभाई जा रही है। सीता स्वयंवर के मंच पर राम की मर्यादा तो मंडप में सामाजिक जिम्मेदारी निभाई जाती है। कमेटी कन्यादान करती है। वर्ष 2001 में शुरू हुई इस परंपरा के तहत अब तक 87 बेटियों की शादी कराई जा चुकी है।
विस्तार
भगवान श्रीराम के जीवन से मिलने वाली मर्यादा, त्याग और परोपकार की सीख सोनभद्र की रामलीलाओं में सामाजिक सरोकार का रूप ले रही है। गुरमा में सीता स्वयंवर के प्रसंग के दौरान गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह कराया जाता है।
सीता, उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति के विवाह प्रसंग के बीच मंडप सजता है, मंगलगीत गूंजते हैं और सात फेरे के बाद बेटियां अपने ससुराल के लिए विदा होती हैं। इस अनूठी पहल में हजारों लोग शामिल होते हैं और कन्यादान कर नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हैं।
वर्ष 2001 में शुरू हुई इस परंपरा के तहत अब तक 87 बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। वहीं, चुर्क में भी वर्ष 2012 से रामलीला मंच पर गरीब कन्याओं का विवाह कराया जा रहा है। दूसरी ओर, बीजपुर में इस वर्ष 16 अक्तूबर को 11 निर्धन जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने की तैयारी है। गुरमा में वर्ष 1954 से रामलीला का मंचन हो रहा है।
चुर्क में 2012 से बेटियों के हाथ हो रहे पीले
गुरमा की तर्ज पर चुर्क में भी रामलीला मंच से गरीब कन्याओं का विवाह कराया जा रहा है। आयोजक ओमप्रकाश यादव ने बताया कि वर्ष 2012 से हर साल एक गरीब कन्या की शादी कराई जाती है। इस वर्ष बिच्छी-बहुअरा निवासी आशा बियार का विवाह चुर्क निवासी रामसेवक से होगा। आशा के माता-पिता का निधन हो चुका है। रामलीला मंच पर पहले एक विधवा का पुनर्विवाह भी कराया जा चुका है।