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सालाना दो मीटर नीचे खिसक रहा जलस्तर
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Wed, 06 Apr 2016 10:49 PM IST
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पहले से ही संकटग्रस्त क्षेत्र में शुमार सोनभद्र के ऊर्जांचल का भूगर्भ तेजी से सूख रहा है। पानी का तल सालाना दो मीटर की दर से नीचे खिसक रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के दल ने एक हफ्ते पहले सर्वे (टेस्टिंग) में पाया कि तीन साल में जलस्तर छह मीटर से ज्यादा नीचे गिरा है। टीम ने अपने सुझाव के साथ यह रिपोर्ट केंद्रीय जल मंत्रालय को भेज दी है।
पूर्वांचल का बुंदेलखंड कहे जाने वाले सोनभद्र जलस्तर के मामले में वर्ष 2009 से ही क्रिटिकल (संकटग्रस्त) जोन में जा चुका है। उसके बाद केंद्रीय भूजल बोर्ड इस क्षेत्र पर बराबर निगरानी बनाए हुए है। मार्च माह के अंत में वैज्ञानिक डा. यूबी सिंह की अगुवाई में बोर्ड की टीम ने जिले के जलस्तर का सर्वे किया। उसमें पता चला कि म्योरपुर (ऊर्जांचल), दुद्धी और बभनी हालात चिंताजनक हो चुके हैं जबकि राबर्ट्सगंज (जिला मुख्यालय), चोपन, चतरा, नगवां, घोरावल इलाके में भी जलतल तेजी से खिसक रहा है।
अनपरा, शक्तिनगर, बीजपुर, दुद्धी, बभनी, म्योरपुर और रेणुकूट परिक्षेत्र में तीन साल पहले पानी दस मीटर नीचे मिलता था लेकिन अब 16 से 16.10 मीटर नीचे चला गया है। रिहंद बांध के इलाके में भी गिरावट दर्ज की गई है। राबर्ट्सगंज, घोरावल, पन्नूगंज, नगवां एरिया में जलस्तर 12 से 14 मीटर के करीब पहुंच गया है। राबर्ट्सगंज परिक्षेत्र में ही कंडाकोट पहाड़ी इलाके में की हालत सर्वाधिक चिंताजनक है जहां पानी पानी 20 मीटर नीचे मिल रहा है। पिछले साल दिसंबर माह जल तल 19.1 मीटर दर्ज किया गया था। यहां गिरावट तीन मीटर से भी ज्यादा है। वैज्ञानिक डा. यूबी सिंह के मुताबिक पूरे जिले में ऊर्जांचल की हालत सर्वाधिक खराब है, जहां सालाना दो मीटर से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इसके प्रमुख कारण बारिश में कमी, पानी का अत्यधिक दोहन और नियमित रूप से भूजल रिचार्ज न होना हैं।
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पूर्वांचल का बुंदेलखंड कहे जाने वाले सोनभद्र जलस्तर के मामले में वर्ष 2009 से ही क्रिटिकल (संकटग्रस्त) जोन में जा चुका है। उसके बाद केंद्रीय भूजल बोर्ड इस क्षेत्र पर बराबर निगरानी बनाए हुए है। मार्च माह के अंत में वैज्ञानिक डा. यूबी सिंह की अगुवाई में बोर्ड की टीम ने जिले के जलस्तर का सर्वे किया। उसमें पता चला कि म्योरपुर (ऊर्जांचल), दुद्धी और बभनी हालात चिंताजनक हो चुके हैं जबकि राबर्ट्सगंज (जिला मुख्यालय), चोपन, चतरा, नगवां, घोरावल इलाके में भी जलतल तेजी से खिसक रहा है।
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अनपरा, शक्तिनगर, बीजपुर, दुद्धी, बभनी, म्योरपुर और रेणुकूट परिक्षेत्र में तीन साल पहले पानी दस मीटर नीचे मिलता था लेकिन अब 16 से 16.10 मीटर नीचे चला गया है। रिहंद बांध के इलाके में भी गिरावट दर्ज की गई है। राबर्ट्सगंज, घोरावल, पन्नूगंज, नगवां एरिया में जलस्तर 12 से 14 मीटर के करीब पहुंच गया है। राबर्ट्सगंज परिक्षेत्र में ही कंडाकोट पहाड़ी इलाके में की हालत सर्वाधिक चिंताजनक है जहां पानी पानी 20 मीटर नीचे मिल रहा है। पिछले साल दिसंबर माह जल तल 19.1 मीटर दर्ज किया गया था। यहां गिरावट तीन मीटर से भी ज्यादा है। वैज्ञानिक डा. यूबी सिंह के मुताबिक पूरे जिले में ऊर्जांचल की हालत सर्वाधिक खराब है, जहां सालाना दो मीटर से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इसके प्रमुख कारण बारिश में कमी, पानी का अत्यधिक दोहन और नियमित रूप से भूजल रिचार्ज न होना हैं।
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