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Sonebhadra News: मारकुंडी में बनेगा आदिवासी संग्रहालय, बजट का इंतजार

Sun, 28 May 2023 11:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2023 11:38 PM IST
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Tribal Museum to be built in Markundi, waiting for budget
सोनभद्र। जनजातीय सभ्यता और संस्कृति को सहेजने के लिए जिले में जनजातीय संग्रहालय का निर्माण होना है। इसके मारकुंडी में जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। शुरुआती चरण में संग्रहालय के निर्माण के लिए शासन ने 60 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। अब बजट अवमुक्त होने का इंतजार है। संग्रहालय को मूर्त रूप देने के लिए जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है।
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प्रदेश में आदिवासी की सबसे अधिक संख्या में सोनभद्र में है। जनजातीय के रूप में अधिसूचित अधिकांश जातियां यहां निवास करती हैं। घने जंगलों और सुदूरवर्ती इलाके में निवासरत इन जातियों की अलग-अलग संस्कृति है। इनके खान-पान से लेकर पहनावा, पूजा पद्धति, विवाह परंपराएं और धार्मिक माान्यताएं भी दूसरों से अलग हैं। गरीबी और पिछड़ेपन से जूझ रहे इस वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रयासरत है तो इसके साथ ही इनकी संस्कृति को भी सहेजने की पहल की जा रही है। इसके लिए लंबे समय से जनजातीय संग्रहालय खोलने की मांग उठती रही है। केंद्रीय मंत्री और मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने इसके लिए पत्र भी लिखा था। विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में प्रचार पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिर्जापुर-सोनभद्र के सीमावर्ती इलाके में जनजातीय संग्रहालय के निर्माण का जिक्र किया था। पीएम की इस घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कवायद तेज करते हुए 60 करोड़ रुपये संग्रहालय निर्माण के लिए स्वीकृत किए थे। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मारकुंडी में बंधी के समीप जमीन भी चिह्नित कर ली है। इस पर संग्रहालय निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। इसके बाद संस्कृति विभाग की टीम भी जगह का भ्रमण कर चुकी है। अब बजट अवमुक्त होने का इंतजार किया जा रहा है। निकाय चुनाव की आचार संहिता बीतने के बाद अब इस दिशा में कवायद फिर से तेज हुई है। नए वित्तीय सत्र में शीघ्र बजट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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पुराने संग्रहालयों की भी ली जाय सुध
नए जनजातीय संग्रहालय के निर्माण के साथ ही जिले में पहले से मौजूद पुरातत्व विभाग के संग्रहालयों को भी सहेजने की जरूरत है। रामगढ़ के मऊ कलां और घोरावल के शिवद्वार में स्थापित संग्रहालय में सैकड़ों वर्ष पुरानी कई पुरातत्विक धरोहरों को संरक्षित किया गया है। समुचित देख-रेख न होने से दोनों संग्रहालय उपेक्षा का शिकार हैं। उन पर अक्सर ताला लगा रहता है। शिवद्वार स्थित संग्रहालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में मोटी दरार पड़ चुकी है। यह भवन कब गिर जाय कोई भरोसा नहीं। ऐसे में इनके संरक्षण की भी जरूरत है।
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जनजातीय संग्रहालय के लिए मारकुंडी में जमीन चिह्नित की जा चुकी है। इसके लिए प्रस्ताव भी प्रेषित कर दिया गया है। आगे का कार्य शासन स्तर से होना है। पिछले दिनों टीम ने यहां भ्रमण भी किया था। कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बजट के लिए डीएम के माध्यम से पत्र प्रेषित कराया जाएगा। -डॉ. सुभाष चंद्र यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व व संस्कृति अधिकारी।
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