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Sonebhadra News: पैथॉलाजी में हर रोज पहुंच रहे तीन सौ मरीज, 60 फीसदी की हो पाती है जांच
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सोनभद्र। जिला अस्पताल को अब मेडिकल कॉलेज में तब्दील कर दिया गया है। मरीजों का लगातार दबाव बढ़ने के बावजूद यहां पैथालॉजी लैब में लगी मशीन पुरानी होने के कारण सुचारु नहीं चल पा रही। दिन भर में बमुश्किल 50 से 60 फीसदी मरीजों की ही जांच हो पाती है। संसाधनों की कमी से हर रोज बड़ी संख्या में मरीज मायूस लौटते हैं। दूरदराज से आने वाले मरीजों को अक्सर अगले दिन नंबर लगाना पड़ता है या निजी केंद्राें की शरण लेनी पड़ती है।
जिला अस्पताल में हर रोज ओपीडी में 700-800 मरीज आते हैं। सर्दी, बुखार, वायरल संक्रमण जैसी बीमारियों से जूझते अधिकांश मरीजों को सही उपचार के लिए ब्लड जांच की जरूरत पड़ती है। अस्पताल आने वाले करीब तीन से साढ़े तीन सौ मरीजों को हर रोज डॉक्टर खून जांच की सलाह देते हैं, मगर बमुश्किल 50 से 60 फीसदी मरीजों की ही जांच हो पाती है। अस्पताल की पैथॉलाजी की क्षमता ऐसी नहीं हैं कि इतने लोगों की जांच और सैंपल लिया लिया जा सके। मैन पॉवर की कमी भी अलग समस्या है। ऐसे में रोजाना बगैर सैंपल दिए ही 40-50 फीसदी मरीजों को लौटना पड़ता है या निजी केंद्र में जाना पड़ रहा है।
सुबह 11 बजे तक ही लेते हैं सैंपल
ठंड के समय भले ही सीएचसी और पीएचसी के समय में बदलाव किया गया है, मगर जिला अस्पताल में बदलाव का नियम नहीं हैं। अस्पताल में ओपीडी का संचालन सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक होता है। दुद्धी, कोन, म्योरपुर सहित कई ऐसे इलाके हैं। जहां से जिला अस्पताल की दूरी सौ किमी ने डेढ़ सौ किमी तक है। ऐसे में ठंड के कारण इन इलाकों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को साढ़े दस से ग्यारह बज जाता है। ऐसे में जब मरीज जांच के लिए पैथॉलाजी पहुंचते हैं तो पता चलता है कि सैंपल लेने का समय सुबह ग्यारह बजे तक बीत चुका है। ऐसे में उन्हें लौटना पड़ता है। सोमवार को बड़ी संख्या में मरीज बगैर सैंपल दिए लौट गए।
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केस:1- बिचपई निवासी बबीता 16 को दांत दिखाना था। सुबह साढ़े आठ बजे वो अस्पताल पहुंचीं। चिकित्सक ने उनके बीमारी की जानकारी लेने के बाद खून जांच कराने की सलाह दी। तब तक साढ़े बारह बज चुके थे। पैथाॅलाजी से उसे अगले दिन आने की बात कहते हुए लौटा दिया गया।
केस:2-राबर्ट्सगंज निवासी रमाकांत उपचार के लिए जिला अस्पताल आए थे। चिकित्सक ने उन्हें खून की जांच कराने की सलाह दी। वह दोपहर 12:155 बजे पैथॉलाजी पहुंचे तो अगले दिन आने की बात कहते हुए लौटा दिया गया।
बड़ी मशीन की जरूरत
जिला अस्पताल में वर्तमान समय की क्षमता भार को देखे तो उसके लिए सालों पुरानी बाॅयोकेमिस्ट्री एनालाइजर (फुली आटोमैटिक) मशीन सक्षम नहीं हैं। सोमवार की दोपहर एक बजे तक ओपीडी-इमरजेंसी के कुल 175 सैंपल लिए गए। बाॅयोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन में एक बार में 50 सैंपल ही लगते हैं। एक सैंपल में कई जांचें होती हैं। जिससे कई बार उनमें एक से डेढ़ या इससे अधिक समय भी लगता है। ऐसे में अधिकतम 200 तक सैंपल की जांच होते-होते दिन बीत जाता है।
रात में नहीं हो पाती जांच
पैथालॉजी में मैन पॉवर की कमी है। ऐसे में ओपीडी के मरीजों की जांच के सैंपल जहांं 11 बजे तक लिए जाते हैं तो इमरजेंसी के सैंपल लेने की अधिकतम सीमा शाम छह बजे तक है। रात और सुबह आने वाले मरीजों को ब्लड सैंपल के लिए सुबह आठ बजने का इंतजार करना होता है।
पैथोलॉजी और अस्पताल का समय पहले से तय है। उपलब्ध संसाधनों से बेहतर सेवा देने का प्रयास रहता है। मशीनों की क्षमता बढ़ाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. डीके सिंह,सीएमएस जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में हर रोज ओपीडी में 700-800 मरीज आते हैं। सर्दी, बुखार, वायरल संक्रमण जैसी बीमारियों से जूझते अधिकांश मरीजों को सही उपचार के लिए ब्लड जांच की जरूरत पड़ती है। अस्पताल आने वाले करीब तीन से साढ़े तीन सौ मरीजों को हर रोज डॉक्टर खून जांच की सलाह देते हैं, मगर बमुश्किल 50 से 60 फीसदी मरीजों की ही जांच हो पाती है। अस्पताल की पैथॉलाजी की क्षमता ऐसी नहीं हैं कि इतने लोगों की जांच और सैंपल लिया लिया जा सके। मैन पॉवर की कमी भी अलग समस्या है। ऐसे में रोजाना बगैर सैंपल दिए ही 40-50 फीसदी मरीजों को लौटना पड़ता है या निजी केंद्र में जाना पड़ रहा है।
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सुबह 11 बजे तक ही लेते हैं सैंपल
ठंड के समय भले ही सीएचसी और पीएचसी के समय में बदलाव किया गया है, मगर जिला अस्पताल में बदलाव का नियम नहीं हैं। अस्पताल में ओपीडी का संचालन सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक होता है। दुद्धी, कोन, म्योरपुर सहित कई ऐसे इलाके हैं। जहां से जिला अस्पताल की दूरी सौ किमी ने डेढ़ सौ किमी तक है। ऐसे में ठंड के कारण इन इलाकों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को साढ़े दस से ग्यारह बज जाता है। ऐसे में जब मरीज जांच के लिए पैथॉलाजी पहुंचते हैं तो पता चलता है कि सैंपल लेने का समय सुबह ग्यारह बजे तक बीत चुका है। ऐसे में उन्हें लौटना पड़ता है। सोमवार को बड़ी संख्या में मरीज बगैर सैंपल दिए लौट गए।
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केस:1- बिचपई निवासी बबीता 16 को दांत दिखाना था। सुबह साढ़े आठ बजे वो अस्पताल पहुंचीं। चिकित्सक ने उनके बीमारी की जानकारी लेने के बाद खून जांच कराने की सलाह दी। तब तक साढ़े बारह बज चुके थे। पैथाॅलाजी से उसे अगले दिन आने की बात कहते हुए लौटा दिया गया।
केस:2-राबर्ट्सगंज निवासी रमाकांत उपचार के लिए जिला अस्पताल आए थे। चिकित्सक ने उन्हें खून की जांच कराने की सलाह दी। वह दोपहर 12:155 बजे पैथॉलाजी पहुंचे तो अगले दिन आने की बात कहते हुए लौटा दिया गया।
बड़ी मशीन की जरूरत
जिला अस्पताल में वर्तमान समय की क्षमता भार को देखे तो उसके लिए सालों पुरानी बाॅयोकेमिस्ट्री एनालाइजर (फुली आटोमैटिक) मशीन सक्षम नहीं हैं। सोमवार की दोपहर एक बजे तक ओपीडी-इमरजेंसी के कुल 175 सैंपल लिए गए। बाॅयोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन में एक बार में 50 सैंपल ही लगते हैं। एक सैंपल में कई जांचें होती हैं। जिससे कई बार उनमें एक से डेढ़ या इससे अधिक समय भी लगता है। ऐसे में अधिकतम 200 तक सैंपल की जांच होते-होते दिन बीत जाता है।
रात में नहीं हो पाती जांच
पैथालॉजी में मैन पॉवर की कमी है। ऐसे में ओपीडी के मरीजों की जांच के सैंपल जहांं 11 बजे तक लिए जाते हैं तो इमरजेंसी के सैंपल लेने की अधिकतम सीमा शाम छह बजे तक है। रात और सुबह आने वाले मरीजों को ब्लड सैंपल के लिए सुबह आठ बजने का इंतजार करना होता है।
पैथोलॉजी और अस्पताल का समय पहले से तय है। उपलब्ध संसाधनों से बेहतर सेवा देने का प्रयास रहता है। मशीनों की क्षमता बढ़ाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। - डॉ. डीके सिंह,सीएमएस जिला अस्पताल।