{"_id":"57e56c1c4f1c1b3076a822d7","slug":"the-women-kept-fast-worship","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं ने रखा व्रत, की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं ने रखा व्रत, की पूजा
अमर उजाला ब्यूरो/ सोनभद्र
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:23 PM IST
विज्ञापन
राबर्ट्सगंज के रामजानकी मंदिर परिसर में जीवित्पुत्रिका पर्व पर पूजन करतीं महिलाएं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जिले भर में अश्विन मास की अष्टमी तिथि शुक्रवार को पुत्र की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए माताओं ने निर्जल और निराहार रहकर जीवित्पुत्रिका व्रत रखा। विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर इस दौरान आठ कहानियां सुनकर, सोहर, बधाई आदि मांगलिक गीत गाकर व्रत किया। नवमीं तिथि शनिवार को प्रसाद का वितरण होगा और पूड़ी-पकवान खाकर माताएं व्रत का पारण करेंगी।
राबर्ट्सगंज नगर स्थित विजयगढ़ वाटिका के सामने स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर पर जीवित्पुत्रिका व्रत कर रही रानी पटेल, मधुबाला, सीता पांडेय, सुमन चौबे आदि ने बताया कि यह व्रत निर्जल और निराहार रहकर पुत्र की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए किया जाता है। इसमें फल-फूल, मिष्ठान, खिलौना, जिउतिया, पूड़ी-पकवान, वस्त्र आदि चढ़ाकर बैर, कुश और पलाश की डाली गाड़ कर विधि-विधान से सामूहिक रुप से पूजन-अर्चन का विधान है। कहा कि पूजन स्थल पर ही शाम को आठ कहानियां सुनने के बाद सोहर, बधाई आदि मांगलिक गीत गाकर व्रत पूर्ण किया गया। नवमी तिथि शनिवार को प्रसाद का वितरण होगा और व्रती माताएं पूड़ी-पकवान खाकर व्रत का पारण करेंगी। चोपनः सोन नदी के किनारे जीवित्पुत्रिका व्रत करने वाली माताओं ने शुक्रवार की शाम को सामूहिक रूप से पूजन-अर्चन किया।
राबर्ट्सगंज नगर स्थित विजयगढ़ वाटिका के सामने स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर पर जीवित्पुत्रिका व्रत कर रही रानी पटेल, मधुबाला, सीता पांडेय, सुमन चौबे आदि ने बताया कि यह व्रत निर्जल और निराहार रहकर पुत्र की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए किया जाता है। इसमें फल-फूल, मिष्ठान, खिलौना, जिउतिया, पूड़ी-पकवान, वस्त्र आदि चढ़ाकर बैर, कुश और पलाश की डाली गाड़ कर विधि-विधान से सामूहिक रुप से पूजन-अर्चन का विधान है। कहा कि पूजन स्थल पर ही शाम को आठ कहानियां सुनने के बाद सोहर, बधाई आदि मांगलिक गीत गाकर व्रत पूर्ण किया गया। नवमी तिथि शनिवार को प्रसाद का वितरण होगा और व्रती माताएं पूड़ी-पकवान खाकर व्रत का पारण करेंगी। चोपनः सोन नदी के किनारे जीवित्पुत्रिका व्रत करने वाली माताओं ने शुक्रवार की शाम को सामूहिक रूप से पूजन-अर्चन किया।
विज्ञापन