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Sonebhadra News: तार इतने नीचे लटक रहे कि हाथ से पकड़ सकते हैं बिजली निगम की ‘लापरवाही’
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जिले में पांच दशक पुराने जर्जर तार और खंभों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। कई जगह कम ऊंचाई पर लटकते हुए तार और जर्जर पोल हादसे का कारण बनते हैं। तार इतने नीचे लटके हैं कि आदमी हाथ से भी पकड़ सकते हैं।
इसे बदलने के लिए जिले में आरडीएसएस योजना से कराए जा रहे कार्यों की रफ्तार भी बेहद धीमी है। जर्जर खंभे व तारों को बदलने का कार्य कुछ इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है। बिजली निगम की तरफ से नौ उपकेंद्रों को चिह्नित किया गया था, जिन इलाकों में लगे जर्जर तार व खंभे जर्जर हो गए हैं।
पहले चरण में इन्हीं उपकेंद्रों पर कार्य कराया जाना था। अभी तक नगवां ब्लॉक के दुबेपुर व खलियारी क्षेत्र में जर्जर तार व खंभों को बदलने का काम ही हुआ है। पन्नूगंज, कुसुम्हा सहित अन्य विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में चार से पांच दशक पुराने लगे जर्जर तार व खंभे जस के तस हैं।
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डेढ़ साल शुरू हुए जर्जर तार व खंभों को बदलने का काम दिसंबर तक ही पूरा किया जाना था, मगर अभी अभी तक सिर्फ 55 फीसदी ही कार्य पूरा हुआ है। जिले के चोपन, करमा, घोरावल, दुद्धी, चतरा और कोन सहित अन्य इलाकों में अभी जर्जर तारों को नहीं बदला जा सका है।
इन इलाकों में जर्जर तारों के टूटने से पूर्व में हादसे भी हो चुके हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में महज आठ से दस फीट की ऊंचाई पर हाईंटेशन तार ढीले होकर नीचे लटक रहे हैं। हल्की हवा चलने पर तार आपस में टकराते हैं और उससे निकली चिंगारी खेत-खलिहान में रखी फसलों को तबाह कर देती है।
यहां आठ फीट की ऊंचाई पर लटक रहे हाईंटेशन तार
रॉबर्ट्सगंज नगर में सिविल लाइंस रोड के साथ ही मेन मार्केट में जर्जर तार लटक रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार बास के सहारे गुजारा गया है। वहीं कई स्थानों पर ढीले तारों को लकड़ी से बांधा गया है। नगर से सटे गांव घुरमा, बरकरा, जैत, मझिगांव, लसड़ा, सिरपालपुर, बेठिगांव निस्फ गांव समेत कुसुम्हा फीडर से जुड़े 50 से अधिक गांवों में जर्जर तारों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। कई स्थानों पर आठ से दस फीट की ऊंचाई पर 11 हजार वोल्टेज के तार लटक रहे हैं।
जर्जर तारों की वजह से यहां हो चुके हैं हादसे
राॅबर्ट्सगंज नगर से सटे बरकरा गांव में जर्जर 11 हाईंटेशन तार टूटने की वजह से गांव के किसान नार सिंह की मौत हो गई थी। इसी तरह हरिहरपुर गांव में पिछले 11 जुलाई टूटकर गिरे हाइटेंशन तार की चपेट में आकर किसान अजय शुक्ला की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष ही मई माह में चोपन थाना क्षेत्र के पटवध गांव में अमिला मोड़ के पास टूटे एलटी तार की चपेट में आने से महिला मुन्नी जायसवाल की मृत्यु हो गई थी। वहीं कोन थाना क्षेत्र के चेरवाडीह गांव में हाइटेंशन तार टूट कर खेत में गिरने से किसान कपूरचंद पासवान की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी। आठ साल पहले सिरपालपुर में हादसा हुआ था।
वाहन के धक्के से क्षतिग्रस्त हुआ खंभा
राॅबर्ट्सगंज के सिविल लाइंस रोड किनारे लगा 11 हजार विद्युत लाइन का खंभा वाहन के धक्के से क्षतिग्रस्त हो गया। बृहस्पतिवार को बिजली विभाग के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त खंभे को बदलवाया। साथ ही ढीले तारों को लकड़ी से बंधवाया गया। दोपहर में बिजली निगम के साथ ही नगर पालिका परिषद के कर्मचारी मरम्मत कार्य करते देखे गए। इस संबंध में एसडीओ इं.केएस यादव का कहना है कि अज्ञात वाहन के धक्के से खंभा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका मरम्मत करा दिया गया।
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इसे बदलने के लिए जिले में आरडीएसएस योजना से कराए जा रहे कार्यों की रफ्तार भी बेहद धीमी है। जर्जर खंभे व तारों को बदलने का कार्य कुछ इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है। बिजली निगम की तरफ से नौ उपकेंद्रों को चिह्नित किया गया था, जिन इलाकों में लगे जर्जर तार व खंभे जर्जर हो गए हैं।
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पहले चरण में इन्हीं उपकेंद्रों पर कार्य कराया जाना था। अभी तक नगवां ब्लॉक के दुबेपुर व खलियारी क्षेत्र में जर्जर तार व खंभों को बदलने का काम ही हुआ है। पन्नूगंज, कुसुम्हा सहित अन्य विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में चार से पांच दशक पुराने लगे जर्जर तार व खंभे जस के तस हैं।
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डेढ़ साल शुरू हुए जर्जर तार व खंभों को बदलने का काम दिसंबर तक ही पूरा किया जाना था, मगर अभी अभी तक सिर्फ 55 फीसदी ही कार्य पूरा हुआ है। जिले के चोपन, करमा, घोरावल, दुद्धी, चतरा और कोन सहित अन्य इलाकों में अभी जर्जर तारों को नहीं बदला जा सका है।
इन इलाकों में जर्जर तारों के टूटने से पूर्व में हादसे भी हो चुके हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में महज आठ से दस फीट की ऊंचाई पर हाईंटेशन तार ढीले होकर नीचे लटक रहे हैं। हल्की हवा चलने पर तार आपस में टकराते हैं और उससे निकली चिंगारी खेत-खलिहान में रखी फसलों को तबाह कर देती है।
यहां आठ फीट की ऊंचाई पर लटक रहे हाईंटेशन तार
रॉबर्ट्सगंज नगर में सिविल लाइंस रोड के साथ ही मेन मार्केट में जर्जर तार लटक रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार बास के सहारे गुजारा गया है। वहीं कई स्थानों पर ढीले तारों को लकड़ी से बांधा गया है। नगर से सटे गांव घुरमा, बरकरा, जैत, मझिगांव, लसड़ा, सिरपालपुर, बेठिगांव निस्फ गांव समेत कुसुम्हा फीडर से जुड़े 50 से अधिक गांवों में जर्जर तारों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। कई स्थानों पर आठ से दस फीट की ऊंचाई पर 11 हजार वोल्टेज के तार लटक रहे हैं।
जर्जर तारों की वजह से यहां हो चुके हैं हादसे
राॅबर्ट्सगंज नगर से सटे बरकरा गांव में जर्जर 11 हाईंटेशन तार टूटने की वजह से गांव के किसान नार सिंह की मौत हो गई थी। इसी तरह हरिहरपुर गांव में पिछले 11 जुलाई टूटकर गिरे हाइटेंशन तार की चपेट में आकर किसान अजय शुक्ला की मौत हो गई थी। पिछले वर्ष ही मई माह में चोपन थाना क्षेत्र के पटवध गांव में अमिला मोड़ के पास टूटे एलटी तार की चपेट में आने से महिला मुन्नी जायसवाल की मृत्यु हो गई थी। वहीं कोन थाना क्षेत्र के चेरवाडीह गांव में हाइटेंशन तार टूट कर खेत में गिरने से किसान कपूरचंद पासवान की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी। आठ साल पहले सिरपालपुर में हादसा हुआ था।
वाहन के धक्के से क्षतिग्रस्त हुआ खंभा
राॅबर्ट्सगंज के सिविल लाइंस रोड किनारे लगा 11 हजार विद्युत लाइन का खंभा वाहन के धक्के से क्षतिग्रस्त हो गया। बृहस्पतिवार को बिजली विभाग के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त खंभे को बदलवाया। साथ ही ढीले तारों को लकड़ी से बंधवाया गया। दोपहर में बिजली निगम के साथ ही नगर पालिका परिषद के कर्मचारी मरम्मत कार्य करते देखे गए। इस संबंध में एसडीओ इं.केएस यादव का कहना है कि अज्ञात वाहन के धक्के से खंभा क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका मरम्मत करा दिया गया।